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नौकरी नहीं मिली तो बेचे पकौड़े; अब शहर भर में हैं इनके 35 पकौड़ा स्टॉल!

फोटो: एमएसएन।कॉम/आज तक

भी कुछ महीने पहले एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेरोजगारी के सवाल पर कहा था कि पकौड़े बेचना भी रोजगार हो सकता है। बेरोजगार रहने से अच्छा है कि आप दिन के दो सौ रूपये कमाएं। प्रधानमंत्री के इस कथन पर पूरे देश में बवाल हो गया था।

पर कहते हैं न कि आपको किसी भी घटना में सकारत्मक पहलु ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उम्मीद बनी रहे कि दुनिया अभी भी बहुत खूबसूरत है। प्रधानमंत्री की उस बात से प्रेरित होकर गुजरात के एक शख्स ने वाकइ में पकौड़े का ठेला लगा लिया और आज ये महाशय दिन-दुनी, रात-चौगनी तरक्की कर रहे हैं।

वडोदरा के रहनेवाले नारायणभाई राजपूत ने हिंदी विषय में स्नातकोतर की डिग्री हासिल की है पर एक लंबे समय तक उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली। पर फिर जब उन्होंने प्रधानमंत्री को यह पकौड़े वाली बात कहते हुए सुनी, तो उन्होंने झट से मन बना लिया कि हाथ पर हाथ रखे बैठने से बेहतर है कि पकौड़े का स्टॉल लगाया जाये।

इसके बाद नारायणभाई ने वडोदरा में ‘श्रीराम दालवड़ा’ के नाम से अपना एक स्टॉल शुरू किया। उन्होंने केवल 10 किलोग्राम सामग्री के साथ एक पकौड़ा स्टॉल शुरू किया था। आज शहर में उनके 35 स्टॉल हैं।

“प्रधानमंत्री की सलाह पर कि पकौड़ा बेचना भी एक रोजगार है, मैंने इसे एक बार करके देखने का विचार किया। मैंने केवल 10 किलोग्राम सामग्री के साथ एक पकौड़ा स्टॉल शुरू किया। अब, मैं 500 से 600 किलोग्राम सामग्री के पकौड़े बेचता हूं,” नारायण भाई ने बताया

अभी वे 10 रूपये में 100 ग्राम दाल पकौड़े बेचते हैं। काम शुरू करने के एक हफ्ते के अंदर ही उनके पास ग्राहकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। वे सुबह 7 बजे से लेकर 11 बजे तक 300 किलोग्राम दालवड़ा बेचते हैं और शाम को भी 4 घंटे में लगभग इतना ही दालवड़ा बेचते हैं।

नारायणभाई ने प्रधानमंत्री के इस कथन को एक चुनौती के रूप में लिया, पर किसे पता था कि यही उनकी ज़िन्दगी बदल देगा।

कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बशर्ते, उस रोजगार से इज़्ज़त और सम्मान के साथ आपका और आपके परिवार का पेट भरे। यदि इंसान मेहनत और लगन से काम करे तो वह अवश्य सफल होता है।

( संपादन – मानबी कटोच )


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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