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हाथो से विकलांग यह अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी अपने गाँव में ला रहा है हरित क्रांति!

फोटो: फेसबुक

हाल ही में बेंगलुरु के रहने वाले 38 वर्षीय टी.वी सुब्रमणी ने अंतरराष्ट्रीय खेलों के दिव्यांग वर्ग में दो स्वर्ण पदक जीते हैं। उन्होंने श्रीलंका में पैरा इंटरनेशनल एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में डिस्क थ्रो में स्वर्ण पदक भी जीता है। और अब यह काबिल खिलाड़ी स्वयं अपने दम पर अपने गांव को हरित गांव बनाने की राह पर हैं।

बेंगलुरू के पास येलहंका तालुक में बसे अपने गांव में पर्यावरण की रक्षा के लिए वे हरित मिशन पर हैं। सुब्रमणी ने राज्य सरकार को एक या दो एकड़ जमीन प्रदान करने की अपील की है ताकि वे वर्तमान शहरी अराजकता के बीच जंगल विकसित करने की अपनी योजना पर काम कर सके।

उन्होंने कहा, “यह मेरा मिशन है क्योंकि पर्यावरण दिन-प्रतिदिन प्रदूषित हो रहा है। लोगों को हरित गतिविधियों में शामिल होना चाहिए अन्यथा गांवों में रहना असंभव हो जाएगा।”

अपने हाथों से विकलांग, पर इरादों से मजबूत, सुब्रमणी ने रजानुकुंटे के आस-पास, सड़क के किनारे लगभग 67 पेड़ लगाएं हैं और उन्हें सींचा भी है।

फोटो: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

सुब्रमणी के दोस्त, मुरली और मंजुनाथ ने उनके प्रोजेक्ट को वित्तीय सहयता प्रदान की है। नियमित रूप से देख-रेख कर रहे सुब्रमणी को आम, नीम और अनेक प्रकार के पेड़-पौधे लगाने में लगभग 6-7 साल लग गए।

इससे पहले, उन्होंने अपने स्थानीय गांव दोदतुमकुरु में पानी के टैंकों के साथ 50-60 पौधे लगाए थे, जिससे इस क्षेत्र में आर्द्रभूमि के साथ विभिन्न पक्षी और पशु प्रजातियां लाभान्वित हुईं। सुब्रमणी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए, वृक्ष समिति के सदस्य विजय निशांत कहते हैं, “हम अपने गांव में सड़क के किनारे एक दिव्यांग व्यक्ति द्वारा इतना हरित कार्य देखकर आश्चर्यचकित थे। अब हमने उनके हरित कार्य में योगदान देने का वादा किया है और बहुत से लोगों को इसके लिए आगे आना चाहिए।”

सुब्रमणी ने डिस्क थ्रो और भाले में अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीता है। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर अन्य एथलेटिक कार्यक्रमों में 64 पदक अर्जित किए हैं। उन्होंने क्रिकेट और कबड्डी दोनों टीमों का भी नेतृत्व किया है। किसी भी कमजोरी को उन्होंने अपने रास्ते का कांटा नहीं बनने दिया।

उन्हें अंतर्राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने के लिए रजानुकुंटे ग्राम पंचायत ने वित्तीय सहायता दी। सुब्रमणी कहते हैं कि ग्राम पंचायत हमेशा से ही गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए और मेरे खेलों के लिए भी समय-समय पर मदद करती रही है।

वे एक मेडिकल स्टोर में सहायक के रूप में काम करते है और एक मिल्क डेरी में भी काम करते हैं, जहाँ से उन्हें राशन वैगरह की भी मदद मिल जाती हैं। इसके अलावा उन्हें 1200 रूपये प्रति माह विकलांग पेंशन मिलती है। सुब्रमणी अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं।

अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करते हुए वे स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ, अपने गांव में एक जंगल बनाने पर काम करेंगें। उम्मीद है और भी बहुत से लोग उनके इस मिशन में उनका सहयोग करेंगें। आप सुब्रमणी से उनके फेसबुक के जरिये जुड़ सकते हैं।

( संपादन – मानबी कटोच )


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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