in

एक आया, जिसने अपनी जान देकर बचाई पांच बच्चों की जान!

फोटो: शिबू आर चंद्रन (फेसबुक)/नयना हरीकृष्णन (फेसबुक)

पिछले सोमवार लगभग 3:45 बजे एक स्कूल वैन केरल के मराडू के पास कट्टीथारा रोड पर तालाब में गिर गयी। पास ही के घर में लगे सीसीटीवी कैमरा में यह घटना कैद हो गई। दरअसल, चालक रोड पर वैन को मोड़ने का प्रयास कर रहा था तो वैन का पिछला दायां पहिया स्लैश में फंस गया और फिर वैन पानी में गिर गयी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वैन में ‘किड्स वर्ल्ड’ प्ले स्कूल के आठ छात्र थे, जो घर लौट रहे थे। चार वर्षीय दो बच्चे, विद्या लक्ष्मी और आदित्य एस नायर अपनी आया 35 वर्षीय लता उन्नी के साथ डूब गए थे और उन्हें पीएस मिशन अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया गया।

इस घटना के दुःख और पीड़ा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। हालाँकि, लता उन्नी के बलिदान को उजागर करना आवश्यक है।

बच्चो की जान बचाने के लिए लता ने अपनी जान की भी परवाह नहीं की। उन्होंने वैन में फंसे पांच बच्चों को बाहर निकाला और किनारे पर निवासियों तक पहुंचाया। जिसके चलते इन पांच बच्चों का जीवन बच पाया है। इन बच्चों को बचाते हुए वे खिड़की में फंस गई और बेहोश हो गई। जब तक उन्हें बाहर निकाल कर अस्पताल ले जाया गया, तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी।

वाहन-चालक, अनिल कुमार को आईसीयू में भर्ती कराया गया, एक और छात्र, 5 वर्षीय कैरोलीन, मेडिकल ट्रस्ट अस्पताल में वेंटिलेटर पर है। समय रहते बचाए गए पांच बच्चे अभी ठीक हैं।

लता के पार्थिव शरीर को बाद में उनके घर ले जाया गया। लता की दो जुड़वां बेटियां हैं, जो अभी आठवीं कक्षा में पढ़ती हैं। उन के पति उन्नी के. एल मजदूरी करते हैं। वे पिछले पांच सालों से प्लेस्कूल ‘किड्ज़ वर्ल्ड’ के साथ आया के रूप में काम कर रही थी।

लता के लिए स्वयं को बचाना आसान था पर किसी भी माँ का दिल किसी के भी नन्हें बच्चों को कैसे मरने देता।

इस घटना में, स्थानीय निवासियों की मदद भी सराहनीय है, जिन्होंने पुलिस और अग्नि प्राधिकरणों के स्थान पर पहुंचने से पहले बचाव कार्य शुरू कर दिया था।

बेनी पी, एक निवासी जो बच्चों को बचाने के लिए तालाब में कूद गए थे, उन्होंने प्रकाशन को बताया, “मैं बच्चों को कुछ अन्य लोगों के साथ बचाने के लिए कूद गया और जल्द ही एहसास हुआ कि बच्चे बैकसीट में फंस गए थे। हमें पांच बच्चों को बचाने के लिए आगे वाली खिड़की तोड़नी पड़ी। बच्चों को बचाना आसान नहीं था क्योंकि तालाब झाड़ियों और दुर्गंध से भरा था।”

हम उम्मीद करते हैं कि इस दुर्घटना से उबरने के लिए लता के परिवार को उचित भावनात्मक और वित्तीय सहायता मिलेगी। इसी के साथ लता को सदैव उस हीरो के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने अपनी जान गँवा कर उन पांच बच्चों की जान बचायी।

( संपादन – मानबी कटोच )


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे।

 

 

 

शेयर करे

Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

स्वाद और सुगंध के साथ संस्कृति से भी जुड़े हैं ये सात तरह के चावल!

हाथो से विकलांग यह अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी अपने गाँव में ला रहा है हरित क्रांति!