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121 अंक प्राप्त कर JEE 2018 पास करने वाला तेलंगाना का पहला आदिवासी छात्र है साईं कृष्णा!

फोटो: द न्यूज़ मिनट

दिलाबाद के 17 वर्षीय आदिवासी छात्र, गदम साईं कृष्णा ने जेईई (एडवांस) 2018 परीक्षा में एसटी श्रेणी के तहत 105वीं अखिल भारतीय रैंक प्राप्त कर अपने माता-पिता और परधान समुदाय का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया है। वह तेलंगाना के पहले आदिवासी छात्र हैं, जिन्होंने 121 अंक प्राप्त कर टेस्ट पास किया है। उनके सामान्य कट ऑफ से केवल 5 अंक कम है।

बेला मंडल के कॉब्बाई गांव से ताल्लुक रखने वाले साईं कृष्णा के पिता का नाम गदम तुलसीराम है। लम्बादा समुदाय के विरोध में आदिवासी छात्रों द्वारा विद्यालयों और कॉलेजों के बहिष्कार करने के बाद भी साईं कृष्णा ने यह उपलब्धि हासिल की है। लम्बादा शिक्षकों द्वारा भेदभाव किये जाने पर छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार शुरू कर दिया था और यहां तक ​​कि माता-पिता ने भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने से इनकार कर दिया था।

साईं कृष्णा ने द न्यूज़ मिनट को बताया कि वे मुंबई से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करना चाहते हैं। उसके बाद वे आईएएस बनना चाहते हैं। सिविल सर्विस में जाना उनका और उनके पिता का सपना है।

साईं कृष्णा के पिता एक प्राथमिक स्कूल में शिक्षक हैं। उन्होंने कहा, “मुझे पता था कि मेरा बेटा अच्छा स्कोर करेगा, लेकिन उम्मीद नहीं थी कि वह जेईई टॉप करेगा।”

तुलसीराम ने कहा कि उन्हें आशा है कि उनका बेटा आईएएस में शामिल होगा और आदिवासियों के उत्थान के लिए काम करेगा।

“मैं व्यक्तिगत रूप से उन समस्याओं को जानता हूं जिनका आदिवासियों को सामना करना पड़ता है। अधिकांश मुद्दों को हल नहीं किया जाता है, क्योंकि अधिकारी व्यक्तिगत रूप से आदिवासी गांवों में नहीं जाते हैं और उनके कल्याण की परवाह नहीं करते हैं। मुझे उम्मीद है कि मेरा बेटा एक दिन कलेक्टर बनेगा और हमारी समस्याओं को हल करने का प्रयास करेगा।”

( संपादन – मानबी कटोच )

 


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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