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मेघालय: बांस और मिर्च के अचार से शुरू किया व्यवसाय, अब विदेशों तक जाते हैं प्रोडक्ट्स

वानशोंग ने ग्रामीण महिलाओं और छात्रों के लिए अब तक फ़ूड प्रोसेसिंग पर 30 से भी ज्यादा ट्रेनिंग सेशन किए हैं!

मेघालय के शिलांग में पोह्क्सेह की रहने वाली कोंग फिकारालिन वानशोंग पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से अपनी फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट चला रही हैं। फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट की सफलता के बाद उन्होंने बेकरी में भी अपना हाथ आज़माया और अब उनका नाम शहर के मशहूर बेकर्स में शामिल हो गया है। उन्हें लोग प्यार से ‘कोंग कारा’ के नाम से जानते हैं।

साल 2010 में कोंग कारा को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ उद्यमी पुरस्कार’ से भी नवाज़ा गया था। उन्होंने द बेटर इंडिया को बताया कि कैसे उनका सफर एक शौक से शुरू हुआ और कई उतार-चढ़ाव के बाद वह अपनी एक पहचान बनाने में कामयाब रहीं।

वह बतातीं हैं कि उन्हें खाना बनाने का हुनर और शौक, दोनों ही अपनी माँ से विरासत में मिला। कोंग कारा ने अपनी माँ के साथ काफी वक़्त बिताया और अक्सर वह अपनी माँ को तरह-तरह के अचार बनाते देखतीं थीं। “हमारे घर में गार्डन था क्योंकि पापा को फूल- सब्जी उगाने का काफी शौक था। माँ वहीं से सब्जियां आदि लेकर अचार बनाती थी। इसके बाद, मैं उनके साथ पड़ोसियों और रिश्तेदारों के यहाँ बांटने जाती थी,” उन्होंने आगे कहा।

कोंग कारा ने बताया कि एक बार उन्होंने अपने पड़ोस में एक महिला को फलों का स्क्वेश बनाते देखा, जिसके बाद ही उनके मन में फलों के प्रोसेसिंग करने का ख्याल आया। दरअसल वह अचार बनाने के अलावा प्रोसेसिंग से संबंधित और भी बहुत कुछ सीखना चाहतीं थीं। इसके लिए 12वीं के बाद ही उन्होंने साल 1998 में डिपार्टमेंट ऑफ़ फ़ूड एंड न्यूट्रीशन द्वारा चलाई जा रही 2 हफ्ते की ट्रेनिंग की। इस ट्रेनिंग के दौरान उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। उन्होंने जाना कि स्वाद के साथ-साथ पोषण का ख्याल रखना भी बहुत ज़रूरी है।

Pickle made by Kong Kara

“मैंने जो कुछ भी सीखा, उसे मैं घर में ट्राई करती थी। कुछ भी नया बनाकर अपने आस-पड़ोस के लोगों को खिलाती थी। तब तक मेरे दिमाग में नहीं आया था कि मैं अपनी प्रोसेसिंग यूनिट शुरू करूंगी। इसके बाद मैंने जैम, स्क्वेश आदि बनाने की ट्रेनिंग भी ली। लगभग 5 साल तक मैंने घर पर ही अपनी स्किल्स को निखारा और सिर्फ अपने परिवार के लिए चीजें बनातीं थी,” उन्होंने बताया।

2005 में कोंग कारा को शिलांग में हो रहे एक लोकल फ़ूड फेस्टिवल में स्टॉल लगाने का मौका मिला। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके प्रोडक्ट्स कोई पैसे देकर खरीदना चाहेगा। वह शुरूआत में बैम्बू शूट और मिर्च का अचार लेकर गईं, जो कि हाथों-हाथ बिक गया। लोगों ने उनसे पूछा भी कि क्या वह कमर्शियल लेवल पर बेचतीं हैं और कैसे वह ऑर्डर कर सकते हैं? वह पहला मौका था, जब उनके मन में अपनी प्रोसेसिंग यूनिट शुरू कर अपना बिज़नेस शुरू करने का ख्याल आया। लेकिन फिर उन्हें लगा कि वह कैसे संभालेंगी क्योंकि उन्हें मैनेजमेंट का अनुभव नहीं था।

साल 2006 में उन्होंने फ़ूड प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़ी एक और ट्रेनिंग की और इसके बाद, साल 2007 में आखिरकार उन्होंने अपनी खुद की प्रोसेसिंग यूनिट ‘कारा फ्रेश फूड्स’ शुरू की। कोंग कारा बतातीं हैं कि उन्होंने अपनी किचन से ही अपना काम शुरू किया। वह खुद अचार बनातीं और शहर के स्टोर्स पर देकर आतीं। इसके साथ-साथ कुछ आयोजनों में स्टॉल लगाने की वजह से उन्हें सीधे ग्राहकों से भी ऑर्डर मिलना शुरू हो गए।

Kong Kara (In Middle) and her team

“परेशानियाँ तो कई सारी थी लेकिन लगभग एक-दो साल में ही मैंने घर के पास ही अपनी अलग प्रोसेसिंग यूनिट सेट-अप कर ली। सिर्फ दो प्रोडक्ट्स के साथ शुरू हुआ काम लगभग 15-20 प्रोडक्ट्स तक पहुँच गया। अचार के बाद स्क्वेश और जैम प्रोडक्ट्स भी बनाना शुरू किया,” उन्होंने बताया।

अपनी प्रोसेसिंग यूनिट में 3-4 लोगों को काम देने के साथ-साथ उन्होंने बहुत-सी महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी है। कोंग कारा बतातीं हैं कि वह अब तक मेघालय के अलग-अलग डिपार्टमेंट के साथ मिलकर फ़ूड प्रोसेसिंग पर लगभग 30 ट्रेनिंग सेशन कर चुकी हैं। इसके साथ-साथ वह रॉ मेटेरियल के लिए स्थानीय बाज़ारों के अलावा 3-4 किसानों के संपर्क में भी रहतीं हैं। उनके प्रोडक्ट्स में बैम्बू, हरी मिर्च, लाल मिर्च, कटहल, हल्दी, मशरूम जैसे अचार, अननास, पैशन फ्रूट आदि के स्क्वाश और कई तरह के जैम शामिल हैं।

शिलांग के लगभग 20 स्टोर्स पर उनके प्रोडक्ट्स जाते हैं और इसके अलावा उन्हें हर महीने लगभग 500 ऑर्डर्स आते हैं। गर्व की बात यह है कि उनके प्रोडक्ट्स सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है बल्कि बाहर के देश जैसे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि भी गए हैं।

Meghalaya Woman Entrepreneur

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कोंग कारा को अपने उत्पाद कई बड़े और नामी मंच पर प्रदर्शित करने का मौका भी मिला है। मेघालय सरकार के आयोजनों के अलावा उन्हें दिल्ली में भी एक प्रदर्शनी में हिस्सा लेने का मौका मिला है।

“फ़ूड प्रोसेसिंग से जुड़ा हुआ कुछ भी हो मुझे करना और सीखना बहुत पसंद है। कुछ साल पहले मुझे सरकार की ही एक योजना के तहत बेंगलुरू में JM बेकरी के साथ बेकिंग सीखने का मौका मिला। यह बहुत ही अलग अनुभव था और मुझे काफी मजा भी आया,” उन्होंने कहा।

इस ट्रेनिंग के अनुभव को उन्होंने बेकार नहीं जाने दिया बल्कि अपनी प्रोसेसिंग यूनिट के साथ-साथ उन्होंने अपना बेकरी का काम भी शुरू कर दिया। बेकरी बिज़नेस अभी बहुत बड़े लेवल पर नहीं है लेकिन वह शुरू से ही ग्राहकों की मांग के अनुसार कुछ अलग प्रोडक्ट्स जैसे राइस केक, पेस्ट्रीज, पफ, लेमन पाई और ब्रेड आदि सर्व कर रही हैं। हर दिन के साथ उनका बिज़नेस आगे बढ़ रहा है और एक सफल उद्यमी के तौर पर उनकी पहचान भी।

सबसे अच्छी बात यह है कि उन्होंने अपना प्रोसेसिंग का बिज़नेस अपने चार बच्चों की अच्छी परवरिश करते हुए खड़ा किया है। परिवार का पूरा सहयोग उन्हें मिला और साथ ही, उन्होंने अपने शौक और सपने के लिए पूरी मेहनत की। आज वह सालाना 6 लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफा कमाती हैं और राज्य के सफल उद्यमियों में उनका नाम शुमार होता है।

Meghalaya Woman Entrepreneur

वह कहतीं हैं, “बढ़ती मांग के चलते हमें प्रोसेसिंग यूनिट को बड़ा करना है और अभी यह अंडर कंस्ट्रक्शन है। पिछले साल के अंत में हमने प्रोसेसिंग का काम रोककर बेकरी पर फोकस किया ताकि प्रोसेसिंग यूनिट नए सिरे से बनकर तैयार हो जाए। इस साल लॉकडाउन की वजह से काम रुक गया लेकिन अगले साल तक हमारी यूनिट फिर से शुरू हो जाएगी।”

कोंग कारा की प्रोसेसिंग यूनिट सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि शिलांग और आस-पास के इलाकों के महिलाओं और बच्चों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी प्रोसेसिंग यूनिट से सैकड़ों महिलाओं ने ट्रेनिंग ली है और कई छात्रों ने अपनी इंटर्नशिप यहाँ से की है। कोंग कारा कहतीं हैं कि चुनौतियाँ हर क्षेत्र में मिलेंगी, आपको बस अपने अवसर तलाशने होंगे।

महिलाओं के लिए वह सिर्फ एक ही संदेश देती हैं कि हमेशा धैर्य और आत्म-विश्वास से काम लें। कड़ी मेहनत करें और खुद पर भरोसा क्योंकि चुनौतियाँ और असफलताएं कितनी ही क्यों न हों, लेकिन उनकी कोशिशें उन्हें सफलता ज़रूर दिलाएंगी!

वानशोंग से संपर्क करने के लिए आप उन्हें kara2014abk@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं!

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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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