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ट्रेन की वेटिंग लिस्ट में फंसे हैं? इस स्टार्टअप से करें संपर्क, मिलेगी कन्फर्म एयर टिकट

जानिए कैसे वेटिंग लिस्ट की परेशानी से यात्रियों को बचा रहा है मुंबई का स्टार्टअप, रेलोफाई

हम जब भी ट्रेन से सफ़र करते हैं तो टिकट की बुकिंग और सीट मिलेगी या नहीं, इस तनाव से अक्सर घिर जाते हैं। अगर आपकी टिकट वेटिंग लिस्ट में है या फिर RAC में है तो आपको कन्फर्म टिकट मिल पाना मुश्किल होता है। यात्रियों को चार्ट के बनने तक का इंतज़ार करना होता है।

अगर आपका टिकट कन्फर्म नहीं हुआ तो आपको या तो जनरल कम्पार्टमेंट की टिकट खरीदनी पड़ती है या फिर खड़े होकर सफ़र करना पड़ता है। ये ‘वेटिंग लिस्ट’ की परेशानी सिर्फ उन लोगों के लिए नहीं है जो तत्काल में टिकट बुक करते हैं बल्कि उन लोगों के लिए भी है जो पहले से टिकट लेते हैं।

इस प्रक्रिया की वजह से बहुत से रेलवे यात्रियों को हर साल परेशानी झेलनी पड़ती है। अक्सर लोग आपातकालीन स्थिति में टिकट कन्फर्म न होने पर ज्यादा पैसे देकर एयरलाइन की टिकट खरीदते हैं जैसा कि साल 2016 में मुंबई से रोहन देधिया ने किया।

अपनी दादी माँ को मुंबई से कच्छ, गुजरात ले जाने के लिए रोहन ने ट्रेन की दो टिकट बुक की लेकिन दोनों में से कोई भी यात्रा वाले दिन तक कन्फर्म नहीं हुई। इसके बाद उन्हें चार गुना भुगतान करके एयरटिकट खरीदनी पड़ी। इस घटना से परेशान रोहन ने ठान लिया कि कोई तो ऐसा तरीका होगा जिससे इस परेशानी को कम किया जा सके।

वह बताते हैं, “ट्रेन की टिकट एडवांस में बुक करने के बावजूद मुझे एयरटिकट खरीदनी पड़ी वह भी सामान्य से 4 गुना मूल्य पर। मुझे लगा कि मैंने टिकट के लिए इतने पैसे दिए हैं तो मतलब फ्लाइट एकदम फूल होगी और सीट नहीं होंगी। लेकिन जब मैं पहुंचा तो देखा कि लगभग 15 से 20% सीट खाली हैं। मुझे बहुत बुरा लगा और गुस्सा आया। इसलिए मैंने डायरेक्टरेट ऑफ़ सिविल एविएशन की वेबसाइट को चेक किया और पाया कि भारत में हर दिन फ्लाइट्स में लगभग 50 हज़ार सीट खाली जाती हैं। उस वक़्त इस विचार पर काम करना शुरू किया कि जो भी वेटिंग लिस्ट के यात्री हैं अगर वह ट्रेन की टिकट के मूल्य में हवाईजहाज से यात्रा कर सकें तो…”

4 साल बाद रोहन ने अपने इस अनुभव और सोच को हक़ीकत में बदलते हुए रेलोफाई की शुरुआत की। इसके ज़रिए वह वेटिंग लिस्ट की परेशानी को हल करने पर काम कर रहे हैं।

मुंबई स्थित यह स्टार्टअप ISB से पढ़े रोहन, IIT एलुमनाई वैभव सराफ और IIM एलुमनाई ऋषभ संघवी की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने साल 2019 में इसकी नींव रखी और 2020 से यह काम शुरू हुआ। शुरूआती महीनों में ही उनके यहाँ से 100 से भी ज्यादा प्रोटेक्शन पर्चेस हुई और लगभग 60 हज़ार से ज्यादा लोग उनकी वेबसाइट देख चुके हैं। ग्राहकों की परेशानी को हल करने के उद्देश्य से शुरू हुए इस स्टार्टअप को लगभग 700 लाख रुपये की फंडिंग मिल चुकी है।

कैसे काम करता है Railofy:

अगर चार्ट बनने के बाद भी आपका टिकट कन्फर्म नहीं हुआ है तो रेलोफाई से आपको उतने ही या थोड़े से ज्यादा पैसे में ट्रेन या बस की टिकट उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए आपको ट्रेन की वेटिंग लिस्ट या RAC में टिकट खरीदते समय ही, रेलोफाई पर प्लेन या बस की टिकट भी लॉक करनी पड़ती है। इससे बाद में अगर आपकी ट्रेन टिकट कन्फर्म न हो तो आप कम दाम में ही, जो लॉक करते समय टिकट का दाम था, उसी में प्लेन या बस की टिकट खरीद सकते हैं।

इसे ग्राहकों को आखिरी मिनट में बहुत ज्यादा पैसे देकर टिकट नहीं लेनी पड़ेगी। आपको बस इतना करना है कि टिकट बुक करते समय ही रेलोफाई की वेबसाइट पर जाकर मात्र 200 रुपये से अपनी प्लेन या बस की टिकट की प्रोटेक्शन पर्चेस करनी है। अगर आपकी ट्रेन टिकट कन्फर्म हो जाती है तो आपके बस ये 200 रुपये जाएंगे और अगर नहीं होती है तो आपको बिना कोई ज्यादा पैसे दिए टिकट मिल जाएगी। इससे ग्राहकों को मुश्किल से 500 रुपये तक ज्यादा भरने पड़ेंगे लेकिन वह लास्ट-मिनट हजारों खर्च करने से बेहतर उपाय है। रेलवे से आपको अपनी अनकनफर्म्ड टिकट का रिफंड मिल जाएगा।

Railway Ticket Not Confirmed

रेलोफाई के इस मॉडल से मुंबई की दीपिका ने लगभग 18 हज़ार रुपये की बचत की। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के छह सदस्यों ने लगभग तीन महीने पहले से ही दिल्ली से मुंबई ट्रेन टिकट बुक की थी। लेकिन उनकी टिकट कन्फर्म नहीं हुई। वह आगे कहती हैं कि तत्काल टिकट 4000 हज़ार रुपये की थी और फ्लाइट की टिकट 5000 रुपये की। पर रेलोफाई से उन्हें प्लेन की टिकट 2000 रुपये की पड़ी और तय दिन ही उनके परिवार के सभी सदस्य मुंबई पहुँच गए, वह भी समय से पहले।

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क्या करना है:

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने किस वेबसाइट से टिकट बुक की है।

  • सबसे पहले रेलोफाई के होमपेज पर अपनी ट्रेन टिकट का PNR या RAC नंबर डालिए और वेटलिस्ट के लिए प्रोटेक्शन ले लीजिये।
  • आप यात्रा के अलग विकल्प चुन सकते हैं- प्लेन या बस
  • इसके बाद यह एप्लीकेशन आपको टिकट के चार्ज दिखाएगी और यही मूल्य आपकी यात्रा की तारीख तक के लिए लॉक हो जाएगा। इससे अगर मार्केट में टिकट का मूल्य बढ़ा तो भी आपको टिकट कम दाम, जो आपने लॉक किया था उसी में मिलेगी।
  • एप्लीकेशन से आप तीन विकल्पों में से फ्लाइट के स्लॉट भी चुन सकते हैं।
  • अब प्रोटेक्शन फीस देकर आप प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
  • अब रेलोफाई की टीम PNR पर नज़र रखेगी और अगर आपकी टिकट कन्फर्म नहीं होती है चार्ट बनने तक भी तो रेलोफाई आपको ईमेल करके फ्लाइट टिकट और लॉक किया हुआ दाम बतायेगा। उसी दौरान रेलवे से आपका रिफंड की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।

कैसे हुआ यह संभव:

रोहन और उनकी टीम ने बहुत ज्यादा रिसर्च करके दिन-रात रेलवे और एविएशन सेक्टर के एक्सपर्ट्स से बात करके यह समाधान निकाला है। उनका मुख्य उद्देश्य एयरलाइन्स से बात करके उन्हें सामान्य मूल्य में टिकट देने के लिए राजी करना होता है।

लोगों के व्यवहार, फ्लाइट रूट्स और एयरलाइन्स के पैटर्न आदि पर 4 साल तक काम करने बाद वह अपना स्टार्टअप शुरू कर पाए हैं। जब उनका मॉडल इस स्टेज पर आ गया कि ग्राहकों और एयरलाइन दोनों के लिए फायदा है, तब उन्होंने एयरलाइन्स से मीटिंग्स शुरू की। रोहन बताते हैं कि उनके इस प्रपोजल को कोई 40 बार एयरलाइन्स द्वारा रिजेक्ट किया गया होगा। क्योंकि एयरलाइन आखिरी मिनट तक अपनी सीट्स को ज्यादा पैसे में बेचने पर विश्वास करती हैं। इसलिए अलग-अलग एयरलाइन कंपनियों की बजाय उन्होंने एक पर ही फोकस किया।

मार्गदर्शन के लिए रोहन ने एविएशन सेक्टर में काम कर रहे अपने सीनियर्स से बात की। उनसे सलाह ली और बार-बार प्रपोजल एयरलाइन कंपनी के पास ले जाते रहे। उनसे फीडबैक लिया। इस तरह की बातचीत के दौरान ही उनकी मुलाक़ात IRCTC के पूर्व जॉइंट जनरल मैनेजर सुनील कुमार से हुई। सुनील ने 9 साल तक रेलवे के साथ काम किया है और उन्होंने रेलोफाई के फाउंडर्स की काफी मदद की।

वह बताते हैं कि हर दिन लगभग 85 हज़ार यात्रियों की टिकट कन्फर्म नहीं होती है और इनमें कुछ ही फ्लाइट की टिकट खरीद सकते हैं। वेटिंग लिस्ट की परेशानी को हल करने के बारे में वह भी सोचते थे और ऐसे मॉडल पर काम करना चाहते थे जहाँ यात्रियों की मदद हो सके। रेलोफाई के साथ जुड़कर उन्हें यह काम करने का मौका मिला।

रोहन आगे कहते हैं कि लोगों का विश्वास जितना भी मुश्किल रहा क्योंकि ऐसा कुछ कोई कर सकता है यह किसी को यकीन नहीं होता। रेलोफाई टीम ने लोगों को अपना पैटर्न समझने के लिए अपने ऑफिस तक बुलाया है और उन्हें विश्वास दिलाया है कि उनका पैसा बर्बाद नहीं होगा। सोशल मीडिया के ज़रिए भी वह लोगों से जुड़ने में कामयाब रहे हैं। अब तक उन्हें मार्केटिंग के लिए कोई इन्वेस्टमेंट नहीं करनी पड़ी है।

बेशक, रेलोफाई की मदद से बहुत से लोगों की समस्या दूर हो रही है। अगर आप रेलोफाई के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें!

मूल लेख: गोपी करेलिया

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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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