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सुरमा: इस लीजेंड की कहानी से प्रेरित है दिलजीत दोसांझ और तापसी पन्नू की अगली फिल्म!

शाद अली की नई फिल्म विख्यात हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह की खेल में “वापसी की कहानी” के बारे में बताती है।

यह बायोपिक 13 जुलाई 2018 को रिलीज़ होगी और इसमें प्रतिभाशाली अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में नज़र आएँगे, जबकि तापसी पन्नू “एक बेटी, एक खिलाड़ी, एक बहादुर लड़की” की भूमिका निभा रहीं हैं। इस फिल्म के मुख्य अभिनेता निश्चित रूप से हमें उत्तेजित करते है, लेकिन उससे भी ज्यादा दिलचस्प है संदीप सिंह की कहानी- भारतीय राष्ट्रीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान जो एक बार बहुत करीब से गोली लगने के बाद बच गए थे और उन्होंने इस दुर्घटना के तीन सालों बाद भारत के लिए सुल्तान अजलान शाह कप जीता।

हम आपको संदीप की कहानी संक्षेप में बता रहे हैं, हालाँकि इसे सिल्वर स्क्रीन पर देखने का मजा अलग ही होगा।


संदीप का जन्म हरियाणा के कुरुक्षेत्र में साल 1986 में हुआ था। उनके बड़े भाई, बिक्रमजीत सिंह भी एक फील्ड हॉकी खिलाड़ी हैं। वह मैदान पर अपने प्रसिद्ध ड्रैग-फ़्लिक के लिए लोकप्रिय रूप से “फ़्लिकर सिंह” के रूप में जाने जाते थे। साल 2010 में, उनकी 145 किमी/घंटा की रफ्तार के कारण उन्हें दुनिया में सबसे तेज़ ड्रैग-फ़्लिकर कहा जाता था।

जल्द ही, संदीप का रैंक बढ़ा और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर खेलना शुरू कर दिया।

साल 2004 में, संदीप ने कुआला लम्पुर में आयोजित सुल्तान अजलान शाह कप से अपनी अंतर्राष्ट्रीय पारी की शुरुआत की। साल 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली भारतीय पुरुषों की हॉकी टीम का भी वे हिस्सा थे। वे हॉकी इंडिया लीग के उद्घाटन में नीलामी में बोली के लिए पांचवे नंबर पर सबसे महंगे खिलाड़ी थे। उसी टूर्नामेंट में, उन्होंने खेले गए 12 खेलों में 11 गोल किए।

हॉकी क्षेत्र में उनकी प्रतिभा कई वर्षों से उनके प्रदर्शन से स्पष्ट है।

हालांकि आकस्मिक रूप से बंदूक की गोली लगने के कारण हो सकता था कि वे भारत का प्रतिनिधित्व न कर पाते या फिर देश इस तरह का एक महान खिलाड़ी खो देता।

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दरअसल, साल 2006 में, संदीप एक राष्ट्रीय शिविर में भाग लेने के लिए दिल्ली-कालका शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। एक रेलवे सुरक्षा बल जवान से गलती से चली गोली ने उन्हें घायल कर दिया। उस गोली ने संदीप की पसलियों के साथ-साथ उनके गुर्दे और किडनी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था। सबसे खतरनाक यह था कि गोली की वजह से उनकी रीढ़ की हड्डी में भी चोट आयी।

उस हादसे में फ्लिकर सिंह पक्षाघात के कगार पर थे।

“गोली मेरे तीन अंगों को घायल करते हुए निकली और मैं वहीं पर ढेर हो गया। मैं बस जाना चाहता था और खेलना चाहता था, जब भी मैं मैदान को देखता, या जब भी मैं टीवी पर मैच देखता तब-तब फिर से खिलाड़ी बनने के लिए मैं अंदर से रोता था, ” संदीप ने फ्री प्रेस जर्नल को बताया।

खेल के लिए उनके प्यार का वर्णन नहीं किया जा सकता है।

“जब मैंने गोली लगने के बाद पहली बार हॉकी देखी, तो मैंने अपने भाई से कहा, मेरी हॉकी स्टिक लाओ, मैं अपनी हॉकी स्टिक के साथ सोना चाहता हूं, और मैं फिर से हॉकी खिलाड़ी बनना चाहता हूँ,” संदीप ने बताया

धीरे-धीरे वे ठीक होने लगे। यह फिर से मैदान पर उतरने का उनका दृढ़ संकल्प था, या भाग्य या फिर दोनों, इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है। लेकिन, उस घातक चोट के तीन साल बाद संदीप ने भारतीय हॉकी टीम के कप्तान के रूप में वापसी की। भारतीय राष्ट्रीय टीम के कप्तान के रूप में मैदान पर उनकी प्रतिभा पहले दिन से ही चमकने लगी।

इतने लंबे अंतराल के बाद पहले ही साल में अंतरराष्ट्रीय जीत के लिए एक टीम की अगुवाई करना कोई आसान काम नहीं था। पर संदीप ने अपनी काबिलियत को तब साबित कर दिया जब उनके नेतृत्व में टीम सुल्तान अजलान शाह कप जीत गयी।

सुरमा फिल्म संदीप सिंह के जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों को स्क्रीन पर लाने के लिए तैयार है। उनकी प्रतिभा निश्चित रूप से दर्शकों के दिलों और बॉक्स-ऑफिस पर छा जाएगी। 11 जून, 2018 को फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज़ हो गया है। आप देख सकते हैं,

( संपादन – मानबी कटोच )


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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