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जानिए कैसे घर में लगा सकते हैं ‘सुपरफ़ूड’ कहे जाने वाला सहजन का पौधा

सहजन के पौधे के पत्ते, फूल और फलियाँ, तीनों ही चीजें पोषण से भरपूर होती हैं और इसलिए लोगों को इसे अपने खान-पान में शामिल करने की सलाह दी जाती है!

विश्व की सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद, भारत में भुखमरी आज भी बड़ी समस्या है। पिछले साल जारी हुई एक रिपोर्ट के अनुसार 117 देशों वाले भुखमरी सूचकांक में भारत 102 नंबर पर है। इन सबकी वजह  से कुपोषण भी बड़ी समस्या बनी हुई है। इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए ही आँगनबाड़ी और स्कूल के स्तर पर बच्चों को पोषण से भरपूर खान-पान देने की तरफ ध्यान दिया जा रहा है।

खासतौर पर, सुपरग्रेन्स जैसे रागी, बाज़रा और ज्वार और सब्ज़ियों में सुपरफूड कहे जाने वाले मोरिंगा यानी की सहजन को भोजन में शामिल किया जा रहा है। देश के ग्रामीण इलाकों में आज भी आपको घर-घर में सहजन के पेड़ मिलेंगे। सहजन की फलियाँ सब्ज़ी बनाने में इस्तेमाल होने के साथ-साथ, इसके पत्ते और उनका पाउडर भी बहुत काम की चीज़ है। बहुत-सी हर्बल कंपनियां आज सहजन के पत्तों का पाउडर बनाकर हर्बल टी और काढ़ा आदि तैयार कर रही हैं।

सहजन को हर घर तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत, बीकानेर के एक प्रोफेसर, श्याम सुंदर ज्याणी ने द बेटर इंडिया को बताया, “दुनियाभर में सहजन की लगभग 13 प्रजातियां अब तक पाई जाती हैं, जिनमें से मोरिंगा ओलिफेरा सबसे ज़्यादा लगाई जाती है और यह हमारी देसी प्रजाति है। इसमें कई तरह के विटामिन जैसे विटामिन A, बीटासीरोटीन, विटामिन B, विटामिन B1, B2, B3, C, E और विटामिन K भी पाई जाती है। इसके अलावा, यह कई तरह के मिनरल्स जैसे, जिंक, कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सल्फर आदि का भी अच्छा स्त्रोत है।”

ज्याणी कहते हैं कि अगर हम अपने खान-पान में सहजन को शामिल कर लें तो कई तरह के पोषण हमें मिलते हैं। आज द बेटर इंडिया के माध्यम से ज्याणी बता रहे हैं कि हम अपने घर के आँगन या फिर छत पर गमले में कैसे सहजन उगा सकते हैं:

  • अगर आप सीधा ज़मीन में बीज लगा रहे हैं तो आप एक-डेढ़ फ़ीट चौड़ा और लम्बा और एक फ़ीट गहरा गड्ढा करें।
  • गड्ढा करने के बाद इसमें पानी डालें और पानी जब अच्छे से ज़मीन सोख ले, तब इसमें बीज लगाएं।
Moringa Seeds
  • गड्ढे के बीच में अपनी ऊँगली से मापकर एक इंच या एक बिस्वा छेद करें और इसमें बीज को लगाकर मिट्टी डाल दें।
  • आपको अब सिर्फ एक लोटा पानी देना है। अगले एक हफ्ते तक हर रोज़ सिर्फ एक लोटा पानी दें।
Moringa Plant
  • एक हफ्ते बाद आपका बीज अंकुरित होगा और पौधा बनने लगेगा। इसके बाद और एक-डेढ़ हफ्ते तक एक लोटा पानी देते रहें।
  • लगभग 15-16 दिन बाद, पौधे की लम्बाई थोड़ी और बढ़ने लगेगी।
  • अब इसमें पानी की मात्रा बढ़ाएं और कम से कम एक बाल्टी पानी रोज़ दें।
  • एक महीने बाद आप देखेंगे कि पौधे की लम्बाई काफी अच्छी हो गई है।
Give adequate water

समय पर पानी देने से पौधे की लम्बाई बढ़ती रहती है और लगभग 4 महीने बाद इसमें फूल आना शुरू होते हैं और 6 माह बाद फलियाँ लगती हैं, जिसे शहरों में ड्रमस्टिक के नाम से जाना जाता है।

सहजन को लगाने का सबसे उचित समय होता है फरवरी-मार्च या फिर बरसात का मौसम यानी कि जुलाई के महीने में। बरसात के मौसम में इसका विकास काफी अच्छा होता है। प्रोफेसर ज्याणी कहते हैं कि अगर कोई शहर में सहजन का पौधा अपनी छत या बालकनी में लगाना चाहता है तो उन्हें थोड़ा बड़ा गमला चाहिए होगा।

“सबसे अच्छा है कि आप किसी ड्रम को काटकर इसमें से दो गमले बना लें, जैसा कि मैंने किया है। वरना आप 12 से 18 इंच का गमला लें,” उन्होंने कहा।

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Moringa in a pot

source

  • गमले में पॉटिंग मिक्स डालें, जिसमें आप मिट्टी, रेत और जैविक खाद मिला सकते हैं।
  • इसमें आप बीज लगा दें और छिड़काव करके पानी दें।
  • ध्यान रहे कि इसे आपको ऐसी जगह रखना है, जहाँ इसे धूप मिले।
  • 7-8 दिन में पौधा अंकुरित हो जाएगा।
  • लगभग एक महीने तक आपको पौधे को सिर्फ पानी देना है।
  • एक महीने बाद आप इसमें गोबर की खाद मिलाएं और फिर चार महीने बाद आप इसे खाद दें। ज्याणी कहते हैं कि हर साल जुलाई के महीने में अगर आप अपने पेड़ को खाद देंगे तो फलियाँ अच्छी लगेंगी।
  • अगर आपने छत पर सहजन लगाया है तो आप इसकी लम्बाई 4 फीट तक होने बाद इसमें कटिंग करते रहें।
Drumsticks in pot

“इसके पत्ते, फूल और फलियाँ सब बहुत ही पौष्टिक होती हैं और सबसे अच्छी बात है कि एक बार लगने के बाद सहजन के पेड़ को बहुत ज्यादा रख-रखाव की भी ज़रूरत नहीं होती है। सहजन की फलियाँ कितने दिनों में मिलने लगेंगी यह बीज की किस्म पर भी निर्भर करता है। 6 से 8 महीने में फलियाँ मिलेंगी,” ज्याणी ने कहा।

कोई पेस्ट आदि लगने पर आप इसमें नीम या धतूरे का अर्क बनाकर डाल सकते हैं, यह कीट प्रतिरोधक का काम करता है।

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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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