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पिछले 6 साल से हर रोज़ 150 से भी ज्यादा निराश्रित लोगों को निःशुल्क भोजन कराता है यह युवक!

साल 2012 से ऐसा कोई दिन नहीं गया जब हैदराबाद के दबीरपुरा फ्लाईओवर के नीचे गरीब व भूखे लोगों की कतारें न लगीं हों या फिर एक आदमी उन्हें खाना खिलाने न आया हो। जी हाँ, मिलिए हैदराबाद के सईद ओसमान अज़हर मक़सूसी से, जो पिछले छह सालों से लगातार इस फ्लाईओवर के नीचे भूखे लोगों को खाना बांटते हैं।

बेघर, गरीब लोग जो दो वक़्त खाना भी नहीं जूटा सकते, हर रोज बिना किसी शोरगुल के यहां दबीरपुरा पुल के नीचे कतारें बनाते हैं। फिर सभी बारी-बारी से अपनी प्लेट उठाकर धोते हैं और कतारों में बैठकर खाने के लिए अपनी बारी का इन्तजार करते हैं।

अज़हर कहते हैं, “भूख का कोई मज़हब नहीं होता।”

हर रोज 150 से भी ज़्यादा लोगों को खाना खिलाने वाले अज़हर हैदराबाद के ओल्ड सिटी यानी कि पुराने इलाके में रहते हैं। उनका प्लास्टर ऑफ़ पेरिस इंटीरियर डिज़ाइन का कारोबार है।

“एक दिन रेलवे स्टेशन जाते वक़्त मैंने एक दिव्यांग औरत को भीख मांगते हुए देखा। उसे पैसे नहीं चाहिए थे। वह खाना मांग रही थी, शायद दो-तीन दिन से भूखी थी। इसलिए मैंने अपने खाने का डिब्बा उसे दे दिया,” अज़हर ने बताया

अगले दिन इस घटना को सुनने के बाद अज़हर की पत्नी ने 10-12 लोगों के लिए खाना बनाया। जगह-जगह पर अज़हर ने जरूरतमंदों को वो खाने पैकेट दे दिए। इसके बाद यह सिलसिला शुरू हो गया।

अज़हर ने बताया कि बहुत छोटी उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया था और उसके बाद उनकी अम्मी ने बहुत मुश्किलों से उन्हें व उनके भाई-बहनों को पाल-पोसकर बड़ा किया। तो वे जानते हैं कि भूखे पेट सोना क्या होता है। इसलिए उन्होंने फैसला किया कि जितने भी भूखे लोगों को वे खाना खिला पाएंगें, वे जरूर खिलाएंगे।

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द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दिन तक खाने के पैकेट बांटने के बाद अज़हर ने पुल के नीचे ही खाना पकाना और बांटना शुरू कर दिया। इसके दो महीने में ही 50 से अधिक लोग पुल के नीचे अज़हर का इंतज़ार करने लगे। जैसे-जैसे लोग बढ़े, अज़हर समझ गए कि उनके लिए थोड़ी परेशानी हो सकती है। इसलिए उन्होंने एक रसोइये को इस काम के लिए रख लिया ताकि वह बिना किसी छुट्टी के हर रोज अधिक मात्रा में इन लोगों के लिए खाना बनाएं।

अज़हर ने कभी भी किसी से पैसे की मदद न लेते हुए अपनी जेब से ही सारा खर्च उठाया। पर इश्वर को शायद कुछ और ही मंजूर था। एक दिन कोई अजनबी अपना रास्ता भटक गया और इस पूल के नीचे आ पहुंचा, जहां अज़हर लोगों को खाना बाँट रहे थे। जब उसे अज़हर के नेक काम का पता चला तो उसने भी मदद करने की इच्छा जताई।

इसके बाद और भी लोग अज़हर से जुड़ गए। तीन साल पहले अज़हर द्वारा स्थापित उनकी सनी वेलफेयर फाउंडेशन भुखमरी को खत्म करने के उद्देश्य से जगह-जगह पर काम कर रही है।

आज की तारीख़ में उनका काम हैदराबाद के सिकंदराबाद में गाँधी अस्पताल तक फ़ैल गया है। एक वैन हर रोज वहां लगभग 100 लोगों के लिए खाना पहुंचाती है।

उनकी फाउंडेशन एक एनजीओ के साथ मिल बंगलुरु, रायचुर, गुवाहाटी जैसी जगहों पर भी काम कर रही है। उनके इस नेक काम से प्रभावित होकर हाल ही में अभिनेता सलमान खान की फाउंडेशन ‘बीइंग ह्यूमन’ ने उन्हें एक समारोह आमंत्रित किया। अज़हर पहले भी अभिनेता अमिताभ बच्चन के टीवी कार्यक्रम “आज की रात है ज़िन्दगी” में भी एक एपिसोड का हिस्सा बन चुके हैं। अज़हर के लिए उनकी सबसे बड़ी ख़ुशी यही है कि जो काम उन्होंने अकेले शुरू किया था, आज बहुत से दोस्त, अनजान साथी, नाते-रिश्तेदार जुड़ चुके हैं।

फोटो: फेसबुक

अज़हर का कहना है,

“मैं लोगों से पैसे की मदद नहीं लेता, अगर कोई दाल-चावल भिजवाता है तो मैं मना नहीं करता। बाकी मैं फ़ेसबुक पर तस्वीरें शेयर करता हूँ, ताकि लोगों में जागरूकता आये कि कितने लोग हर रोज भूखे सोते हैं।”

अपनी माँ को अपनी प्रेरणा मानने वाले अज़हर आज भी बिलकुल सादा जीवन जीते हैं। उनका एक-मात्र उद्देश्य जरूरतमंदों की सेवा करना है। उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि खाने के लिए कौन उनके पास आता है। वे तो केवल मानते है कि दाने-दाने पर लिखा होता है खाने वाले का नाम।

अज़हर से सम्पर्क करने के लिए उन के फेसबुक पेज पर क्लिक करें।


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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