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जानिए कैसे केवल रु. 20 लाख में बना है यह मिट्टी का घर, जहाँ पंखे की भी नहीं होती ज़रूरत

नयी टाइलें खरीदने के बजाय, सनी ने पुराने टूटे हुए मकानों की टाइलें महज़ रु.5 प्रति टाइल के दर से खरीदीं, जो आज बनाई जा रहीं टाइलों के मुकाबले बेहद सस्ती भी थीं और मज़बूत भी।

केरल के कोट्टियूर के रहने वाले 33 वर्षीय सनी नेल्सन मर्चेंट नेवी में अधिकारी थे लेकिन समय से पहले रिटायरमेंट लेकर वह अपने शहर लौट आए। यहाँ उन्होंने मिट्टी से एक ऐसा सुंदर और किफायती घर बनाया कि इसकी हर जगह चर्चा होने लगी।

अपने घर के बारे में सनी ने द बेटर इंडिया को बताया, “हमारा पैतृक घर गर्मी के मौसम में असहनीय रूप से गर्म होता है और हमें अक्सर AC का इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है, बल्कि बिजली का बिल भी काफी आता है। इसलिए मैंने एक ऐसा घर बनाने का निर्णय लिया जो प्रकृति के करीब हो।”

सनी ने मिट्टी से बनाये जाने वाले घरों के बारे में ढेर सारी जानकारी इकट्ठा की। उन्होंने यूट्यूब पर ऐसे कई वीडियो देखें, जिनमें ये जानकारी दी गई है कि मिट्टी की दीवारें घर में गर्मी के असर को काफी कम कर सकती है। इसके बाद उन्होंने इसी तकनीक को अपनाने का फैसला किया।

अप्रैल, 2019 में उन्होंने एकड़ जमीन खरीदी और अपने सपनों का घर बनाने के लिए स्थानीय श्रमिकों को ही काम दिया।

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आज, सनी अपने परिवार के साथ 1250 वर्ग फुट के मिट्टी से बने इस एक मंजिला घर में रहते हैं। घर में 3 बेडरूम हैं और इसे बनाने में 20 लाख रुपए खर्च हुए हैं। वहीं, इसकी फर्निशिंग में 3 लाख रुपए से भी कम लागत आई। सनी कहते हैं कि उन्हें सिर्फ जमीन खरीदने के लिए ऋण लेना पड़ा।
 

घर के बाहरी हिस्से के लिए प्राकृतिक लेटराइट

कोट्टियूर के एक निवासी ने अपने घर को लेटराइट ईंटों से बनाया था और इसी को देख सनी ने भी ऐसा ही करने का फैसला किया। लेटराइट एक तरह के प्राकृतिक पत्थर होते हैं, जो न केवल आर्द्रता को नियमित करते हैं, बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।

इसके बारे में सनी कहते हैं, “उस व्यक्ति की मदद से, मेरा सम्पर्क लेटराइट की ईंटों को बनाने में दक्ष कोझीकोड के कुछ मज़दूरों से हुआ। उन्होंने इन ईंटों का उपयोग घर और बरामदे पर पिलर बनाने के लिए किया। इसकी एक ईंट की कीमत 60 रुपए थी। जब मुझे पता चला कि इन मज़दूरों ने पहले मंदिरों को बनाने में मदद की है, तो मैंने कुछ अतिरिक्त पैसे देकर पिलर पर डिज़ाइन भी बनाने के लिए कहा।”

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लेटराइट ईंटें व ऑक्साइड फ्लोरिंग का इस्तेमाल किया गया है

सनी ने अपने घर के बाहरी हिस्से को प्लास्टर या पेन्ट नहीं करवाने का फैसला किया, क्योंकि नारंगी रंग की ये आड़ी-टेढ़ी लेटराइट ईंटें घर को एक सुन्दर स्वरुप दे रहीं थीं। इससे,प्लास्टरऔर पेंटिंग के पैसे की भी बचत हुई।

पुराने टूटे हुए मकानों की टाइलों से बनायी छत 

छत बनाने के लिए सनी ने मौसम प्रतिरोधी मिट्टी से बनी टाइलों का इस्तेमाल किया, जो टेराकोटा या स्लेट जैसी चीजों से अधिक टिकाऊ होती है।

इसके बारे में वह कहते हैं, “आजकल जो मिट्टी की टाइलें बनाई जाती हैं, वह पहले जैसी मजबूत नहीं है। इसलिए नयी टाइलें खरीदने की बजाय, मैंने उन ग्रामीणों से सम्पर्क किया, जिन्होंने हाल ही में अपने पुराने घरों को तोड़ा था। यहाँ के लोग ऐसी मिट्टी की टाइलों को जमा करके रखते हैं, क्योंकि उन्हें इसकी अच्छी कीमत मिलती है। इन टाइलों को उच्च दबाव वाले कंप्रेसर पर धोने के बाद पेन्ट किया गया, जिससे वे बिल्कुल नए लग रहे थे। मैंने इन टाइलों को 5 रुपये की दर से खरीदा, जबकि अन्य मिट्टी की टाइलों की कीमत 45 रुपये थी।”

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घर के अन्दर का हिस्सा

सनी के घर की दीवारों को मिट्टी से प्लास्टर किया गया है। इसे सही तरीके से करने के लिए उन्होंने त्रिशूर स्थित  ‘वास्तुमुख आर्किटेक्ट्स‘ नाम के एक फर्म से सम्पर्क किया, जो पर्यावरण के अनुकूल घरों को बनाती है। 

सनी कहते हैं, “वास्तुमुख का ऑफिस भी ईको-फ्रेंडली है, इसकी दीवारों को कई तरह की मिट्टी से प्लास्टर कर बनाया गया है। यहाँ, मेरे सारे संदेह दूर हो गए, जैसे कि कौन-सी मिट्टी टिकाऊ होगी, किसमें कम लागत आएगी, आदि। आखिर में मैंने मूल मिट्टी से प्लास्टर करने का फैसला किया।” 

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घर के अन्दर की दीवारों को मिट्टी से किया गया है प्लास्टर

वास्तुमुख ने घर के फर्श को रेड-ऑक्साइड से बनाया है। यह किफायती, पर्यावरण और कई जलवायु परिस्थितियों में अनुकूल होने के साथ-साथ इसके रखरखाव में भी काफी आसानी होती है। 

वही, सनी ने रसोई में अलमारियों को बनाने के लिए लकड़ी के उपयोग को काफी सीमित कर दिया।
इस विषय में वह कहते हैं, “मैंने लकड़ी की बजाय तख्तों को ‘फेरो-सीमेंट‘ से बनवाया। इसका उपयोग अलमारी और तख्तियां बनाने के लिए किया गया। इसके अलावा, खिड़कियों को सीमेंट से बनाकर इस पर लकड़ी का रंग चढ़ाया गया और चमकदार दिखने के लिए इसे पॉलिश भी किया गया।”

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घर में बनी रसोई

सनी ने अपने घर को जून, 2019 में बनाना शुरू किया और फरवरी, 2020 तक यह पूरी तरह बनकर तैयार था। लॉकडाउन लागू होने से ठीक पहले, वह यहाँ अपने परिवार के साथ  रहने आ गए, जो उनके लिए राहत की बात है।

वह अंत में कहते हैं, “मेरे घर में दो पंखे लगे हुए हैं, लेकिन उसका उपयोग शायद ही कभी होता है। यहाँ गर्मी का अहसास न के बराबर होता है।”

आप भी चाहे तो प्राकृतिक चीज़ों का इस्तेमाल करके ऐसा ही एक प्यारा सा घर बना सकते हैं, जो न केवल आपको बल्कि प्रकृति को भी सुकून देगा। यदि आप पहले ही ऐसा घर बना चुके हैं, तो इसके बारे में हमें hindi@thebetterindia.com पर मेल करके ज़रूर बताएं। 

तस्वीरें साभार -सनी नेल्सन

मूल लेखROSHINI MUTHUKUMAR

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Written by कुमार देवांशु देव

राजनीतिक और सामाजिक मामलों में गहरी रुचि रखनेवाले देवांशु, शोध और हिन्दी लेखन में दक्ष हैं। इसके अलावा, उन्हें घूमने-फिरने का भी काफी शौक है।

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