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पिछले 18 साल से कटक की बस्तियों में शिक्षा का प्रकाश फैला रहा है यह चायवाला!

यूट्यूब/HT

“क्या आप प्रकाश राव जी बोल रहे हैं कटक से, जो बच्चों के लिए स्कूल चलाते हैं? मोदी जी आपसे मिलना चाहते हैं तो 26 मई को आप अपने स्कूल के बच्चों के साथ बाजी जात्रा मैदान पहुंच जाएँ।” 25 अप्रैल, 2018 को पीएमओ ऑफिस से आयी इस एक कॉल ने प्रकाश राव की ज़िन्दगी बदल दी।

उड़ीसा के कटक से ताल्लुक रखने वाले प्रकाश राव पिछले 5 दशकों से बक्सी बाजार में एक चाय की दूकान चला रहें हैं।

प्रकाश राव

पर इसके साथ ही समाज सेवी प्रकाश गरीब बच्चों के लिए “आशा आश्वासन” नाम से स्कूल चलाते हैं। साल 2000 से चल रहे प्रकाश राव के इस स्कूल में लगभग 70 बच्चों को शिक्षा और खाना मिल रहा है।

“मेरे पिता द्वितीय विश्वयुद्ध में एक सैनिक के रूप में सेवारत थे। जब सेवानिवृत्त हो वे कटक आये तो उन्हें कमाई का कोई खास साधन नहीं मिला। मैं पढ़ना चाहता था पर साधन नहीं था तो पिताजी ने चाय की दूकान खुलवा दी।”

पर प्रकाश में सीखने का जज्बा कभी भी कम नहीं हुआ। “जब भी मैं अपनी दुकान के आस-पास की बस्ती में इन बच्चों के जीवन को साधनों और इनके माता- पिता की लापरवाही के चलते बर्बाद होते देखता तो मुझे लगता कि जैसे मेरा बचपन मेरी आँखों के सामने हो। इसलिए मैने इनके लिए कुछ करने का प्रण किया,” प्रकाश राव ने बताया।

साल 2000 में प्रकाश राव ने अपने दो कमरे के घर में ही, एक कमरे में 10-15 बच्चों को इकट्ठा कर पढ़ाना शुरू किया। धीरे-धीरे और भी बच्चे बढ़ने लगे।

picture source – India Today

उनके काम को देखते हुए आशा और आश्वासन महिला क्लब ने उनकी मदद करने की इच्छा जताई। उसी क्लब ने इन बच्चों के लिए दो कमरों का एक स्कूल बनवाया। जिसे क्लब के नाम पर ही “आशा आश्वासन” नाम दिया गया। आज इस स्कूल में 4 साल से 9 साल तक की उम्र के 70 बच्चे पढ़ रहें हैं। बच्चों की प्राथमिक शिक्षा के साथ-साथ उनके भोजन और स्वास्थ्य का ध्यान भी प्रकाश राव रखते हैं।

उन्होंने बताया,

“बच्चों का स्वास्थ्य होना बहुत आवश्यक है तभी तो वे पढ़ाई या फिर और कोई गतिविधि कर पाएंगे। इसलिए मेरा पूरा ध्यान रहता है कि बच्चों को पौष्टिक भोजन मिले। और दूसरा मुख्य कारण है कि भोजन के लालच में ये गरीब परिवारों के बच्चे स्कूल भी आ जाते हैं। वरना इनके माता-पिता को तो मजदूरी में ध्यान भी नहीं होता कि बच्चे ने खाना खाया की नहीं।”

इसके साथ ही बच्चों को नियमित रूप से स्वास्थ्य संबंधित जाँच के लिए भी वे सरकारी अस्पताल ले जाते हैं। प्रकाश राव के स्कूल में अभी 5 अध्यापिकाएं और 1 रसोइया हैं। इन सभी को वे बड़े ही प्यार से ‘गुरु माँ’ कहकर पुकारते हैं। इस स्कूल में बच्चों को तीसरी कक्षा तक का कोर्स करवाया जाता है। उसके बाद बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में चौथी कक्षा में करवा दिया जाता है।

“पिछले कुछ दिनों में मेरी ज़िन्दगी में अलग-सा बदलाव आ गया है। लोग मिलने आ रहे हैं हर रोज। जगह-जगह से लोग फ़ोन करके बधाई दे रहे हैं। देश के प्रधानमंत्री ने जब मेरी इस कोशिश की सराहना की तो बेहद ख़ुशी मिली। बाकी मेरा उद्देश्य तो केवल इन बच्चों के भविष्य को संवारना है,” ये बताते हुए प्रकाश राव की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था।

हाल ही में, 26 मई को कटक में अपनी एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रकाश राव और उनके स्कूल के बच्चों से मुलाकात की। साथ ही, ‘मन की बात’ रेडियो प्रोग्राम में भी प्रकाश राव और उनकी पहल के बारे में बताया।

द फाइनेंसियल एक्सप्रेस

अपनी चाय की दूकान से प्रकाश राव की जो भी कमाई होती है उसका आधा हिस्सा वे इस स्कूल के बच्चों की पढ़ाई- लिखाई पर खर्च करते हैं। उनके अपने परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं। उन्होंने अपनी बेटियों की भी अच्छी शिक्षा दिलवाई है। बड़ी बेटी की शादी भी कुछ साल पहले हुई और छोटी बेटी अभी पढ़ रही है।

प्रकाश राव जी साल 2017 में TedX जैसे मंच पर भी अपने सफर और इस स्कूल के बारे में साँझा किया। आप वीडियो देख सकते हैं।

प्रकाश राव ने बताया, “साल 1976 में मुझे लकवा मार गया था, जिसके चलते सरकारी अस्पताल में मेरा ऑपरेशन होना था। ऑपरेशन के लिए मुझे खून की जरूरत थी, पर कोई साधन नहीं था मेरे पास कि कैसे खून मिले। फिर भी ऑपरेशन तो हुआ और उसके बाद मुझे पता चला कि किसी भले इंसान ने मेरे ऑपरेशन के लिए अपना खून दिया था।”

उसके बाद से ही उन्होंने ठान लिया कि वे नियमित रूप से रक्तदान करेंगें। आज की तारीख़ में शिक्षा की अलख जगा रहे प्रकाश राव 214 बार से भी ज्यादा रक्तदान और 17 बार प्लेटलेट्स दान कर चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने लगभग 30 साल पहले ही अपने शरीर को कटक के श्रीराम चंद्र भंज मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को दान कर दिया है ताकि मृत्यु के पश्चात् उनके शरीर का क्रियाक्रम करने की बजाय मेडिकल स्टूडेंट्स की पढ़ाई के लिए सौंप दिया जाये।

“मुझे अपने लिए कुछ भी नहीं चाहिए। मैं केवल इन बस्ती के बच्चों को बेहतर जीवन देना चाहता हूँ। हमारे पास स्कूल  तो जगह है पर ये जगह उन बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं है जिन्हें खेल-कूद में दिलचस्पी है। तो अभी हमारी जरूरत केवल एक छोटा सा खेल का मैदान है जहां ये बच्चे स्कूल के बाद अपना कुछ वक़्त खेल-कूद की गतिविधियों में बिता सकें,” प्रकाश राव ने बताया।

उनकी इस पहल पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनी है जिसका नाम है  ‘Brewing Minds’!

प्रकाश राव जी से जुड़ने के लिए 9861235550 डायल करें।


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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