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मेरे टेरेस गार्डन से मुझे हर दिन 5 किलो ऑर्गेनिक सब्ज़ियाँ मिलतीं हैं! जानना चाहेंगे कैसे?

मेरे टेरेस गार्डन से मुझे हर दिन 5 किलो ऑर्गेनिक सब्ज़ियाँ मिलतीं हैं! जानना चाहेंगे कैसे?

केवल 4-5 पौधों के साथ शुरू  की गई बागवानी अब सैकड़ों पौधों के साथ एक  खूबसूरत बगीचे में तब्दील हो गई है। यह बगीचा पूरे परिवार को जैविक भोजन और शुद्ध हवा तो देता ही है, साथ ही ये दिल्ली की बढ़ती गर्मी में ठंडा तापमान देकर राहत भी प्रदान करता है।

दिल्ली के मोती बाग इलाके के एक टैरेस गार्डन के बारे में सुनते ही मेरे दिमाग में पहली जो चीज़ें आती है वह है हरियाली, खुशी औऱ प्रेरणा। इस टैरेस गार्डन को 2014 में एक, गृहिणी सुमति चेलिया ने शुरु किया था। सुमति का मकसद अपने परिवार को शुद्ध खाना खिलाना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना था।

3,000 वर्ग फुट में फैले इस बगीचे में करीब 100 किस्म के जैविक फल, औषधीय पौधे, फूल और सब्जियाँ उगाई जा रही हैं। हरा-भरा ये बगीचा सुंदर तो लगता ही है, साथ ही इस खूबसूरत बगीचे ने एक ऐसे शहर में अपनी जैव विविधता का निर्माण किया है जो वायु प्रदूषण के लिए पूरे विश्व में बदनाम है।

सुमति तमिलनाडु से हैं और 2004 में अपने पति चेलायाह सेलामुथु के साथ दिल्ली आईं थीं। चेलायाह नई दिल्ली नगर निगम के बागवानी विभाग के सहायक निदेशक हैं।

शहर में, विशेष रुप से सर्दियों के मौसम में फैलने वाला प्रदूषण सुमति को सूट नहीं करता था। प्रदूषण के कारण उन्हें साँस लेने में परेशानी और धूल से एलर्जी जैसी समस्याएँ होने लगीं।

सुमति ने द बेटर इंडिया को बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें घर के भीतर रहने या ऐसे जगह पर रहने की सलाह दी जहाँ ताज़ी हवा और हरियाली हो। वह बताती हैं, “डॉक्टरों ने मुझे जैविक सब्जियों का सेवन करने के लिए भी कहा। मैंने दवा लेना शुरु किया और साथ ही एक स्वस्थ जीवन शैली पर ध्यान देना शुरु किया लेकिन 2014 में चेन्नई की यात्रा मेरे लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।”

Delhi Terrace garden
चेलायाह परिवार अपने टेरेस गार्डन में

चेन्नई में, अपने पति के माध्यम से सुमति ने बागवानी विशेषज्ञों से मुलाकात की। विशेषज्ञों ने उन्हें छत पर खेती में हाथ आजमाने का सुझाव दिया। टैरेस गार्डन ने सुमति को काफी आकर्षित किया और इसके बारे में और जानने के लिए उन्होंने कुछ टैरेस गार्डन का दौरा किया।

विशेषज्ञों ने सुमति को आसानी से उगने वाली सब्जियों के जैविक बीज दिए जैसे कि टमाटर, बैंगन और पालक आदि। सुमति ने अपने छत पर यह उगाना शुरु किया।

पहली कोशिश में ही वह सफल रहीं और उन्होंने महसूस किया कि किसी को अपने भोजन को उगाने के लिए किसी डिग्री, कोर्स या वर्कशॉप की ज़रुरत नहीं होती है। वह कहती हैं, ”आपको आगे बढ़ने के लिए इच्छा और प्रेरणा की ज़रुरत है।”

अपनी पत्नी की बात से चेलिया भी सहमत हैं। वह कहते हैं, “यह सुमति की निष्ठा और दृढ़ संकल्प है कि हमारा फसल चक्र हमें प्रतिदिन कम से कम पांच किलो ताजी सब्जी देता है। हमारी बाजार खरीद में काफी कमी आई है, और निश्चित रूप से, स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है। हालाँकि मैंने बागवानी की पढ़ाई की है, लेकिन कई बार मैं बागवानी में अपनी पत्नी की विशेषज्ञता को देखकर दंग रह जाता हूँ।”

 यह टैरेस गार्डन क्यों है खास

Delhi Terrace garden
टेरेस गार्डन में कई तरह की जैविक सब्जियां लगाई गई हैं

यदि आप दिल्ली में रहते हैं, तो आप शायद यह अच्छी तरह से जानते होंगे कि यहाँ पड़ने वाली भीषण गर्मी के कारण टमाटर जैसी समान्य सब्जी उगाना भी कठिन काम है।

हालाँकि, अधिकांश गार्डनर सब्जी, फल, शाक या फूल उगाना पसंद करते हैं। कई बार जगह और समय की कमी के कारण गार्डनर सब्जियों का एक सेट ही उगाते हैं।

लेकिन मोती बाग के इस बगीचे में ऐसा नहीं होता है।

सुमति ने यहाँ विभिन्न प्रकार के पौधे उगाए हैं जिनमें इंसुलिन प्लांट, काला बासा, लेमनग्रास, पुदीना, केला, संतरा, अमरूद, स्नेक गॉर्ड, लेट्यूस ग्रीन, पालक, सरसों, गाजर, चुकंदर, अजवाइन, ब्रोकोली, लाल गोभी, ज़ूकीनी, कद्दू, मक्का, खरबूज, तरबूज, स्ट्रॉबेरी, अजवाईन, मोरिंगा और चमेली आदि शामिल हैं। उन्होंने अपने बगीचे में दुर्लभ और देसी किस्म जैसे रबर्ब, रोज़मेरी, चीनी गोभी, लेट्यूस लोलो रोसा, गोंगुरा (हिबिस्कस) भी उगाए हैं।

वह बताती हैं, “बीज चयन बहुत महत्वपूर्ण है, और शुक्र है कि मेरे पास घर में बागवानी विशेषज्ञ हैं जो इस काम को आसान बनाते हैं। इस बीच, पिछले कुछ वर्षों में मैंने अपनी गलतियों से काफी कुछ सीखा है। परिणामों को देखने के बाद, मैं उनका सख्ती से पालन करती हूँ।”

सुमति के बागवानी नियम:

  1. मल्टी-लेयर (बहु परत) खेती

जैसा कि पहले बताया गया है, दिल्ली में गर्मी एक बड़ी समस्या है। इसलिए सुमति मल्टी-लेयर कृषि पद्धति से पौधे उगाती हैं, जिसमें दो या दो से अधिक पौधे एक ही गमले में या बहुत नजदीक से उगाए जाते हैं।

सुमति कहती हैं, “इसमें यह ध्यान रखना है कि छोटे पौधे के बगल में बड़े पौधे या बड़े पत्ते वाले पौधे उगाए जाएं ताकि छोटे पौधे को छाया मिले। इसके अलावा, यह तरीका उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिनके पास कम जगह है।”

Delhi Terrace garden

मल्टीलेयर पद्धति ( जिसमें पौधे एक-दूसरे की मदद करते हुए बढ़ते हैं ) का समर्थन करते हुए, नेशनल सीड एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के पॉलिसी एंड आउटरीच की डायरेक्टर और लेखक, इंद्रा सिंह ने द बेटर इंडिया को बताया, “दिल्ली के उच्च तापमान में, अपने पौधों की रक्षा करने का सबसे अच्छा तरीका है कि जंगल की पारिस्थितिक प्रणाली को दोहराया जाए जहाँ भूमिगत फसलें और ऊंचे पौधे एक दूसरे का समर्थन करते हैं। वे न केवल छाया प्रदान करते हैं, बल्कि एक-दूसरे को पोषण भी देते हैं। मिर्च और मकई या सेम और मकई अच्छे उदाहरण हैं।”

अपने बगीचे से एक उदाहरण देते हुए, सुमति कहती है, “मैं एक बर्तन में मक्का और पत्तेदार सब्जियाँ उगाती हूँ। मक्का की ऊंचाई साग को पर्याप्त छाया प्रदान करती है। इस बीच, मैंने बैंगन और धनिया एक साथ बोया है।”

सुमति ने रणनीतिक रूप से औषधीय पौधों और क्लाइंबर जैसे सेम, ककड़ी, लौकी को कम ऊंचाई वाले पौधों के बगल में रखा है।

  1. वेस्ट मैनेजमेंट (अपशिष्ट प्रबंधन)

सुमति, एक कृषि परिवार से हैं और हमेशा अपनी जीवन शैली के प्रति जागरूक रही है। प्रत्येक गृहिणी की तरह, वह घर का कोई भी सामान बाहर फेंकने से पहले उसका पुन: उपयोग करने में विश्वास करती है।

यह सिद्धांत उनकी बागवानी में भी दिखाई देती है। बगीचे में पौधे उगाने के लिए उन्होंने सब्जियों के बक्से, थर्मोकोल प्लांटर्स, प्लास्टिक टेकअवे कंटेनरों जैसे कंटेनरों का पुन: उपयोग किया है।

इतना ही नहीं, यहाँ रसोई के कचरे को जैविक खाद में भी बदला जाता है।

सुमति बताती हैं कि करीब छह सालों से वह रसोई कचरे को उपचारित कर रही हैं। वह बताती हैं, “मैं हर दिन एक कंटेनर में सभी गीले कचरे को जमा करती हूँ और बीच-बीच में मिट्टी डालती हूँ। दो महीने बाद, अपशिष्ट घुल जाता है और हमें पोषक तत्वों से भरपूर खाद देता है।”

  1. प्राकृतिक पेस्ट रिपेलेंट

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कीटों को नियंत्रित या समाप्त करने के लिए केमिकल वाले हानिकारक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करना पौधों के लिए काफी खतरनाक होता है और यह एक ऐसा मुद्दा है जो कृषि विशेषज्ञों द्वारा अक्सर उठाया जाता है।

जब सुमति का सामना इसी तरह की दुविधा के साथ हुआ, तो उन्होंने प्राकृतिक कीट रिपेलेंट्स का इस्तेमाल करने का सोचा। सुमति बताती हैं कि, “कीट को दूर रखने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए, मैं छाछ, फर्मेंटेड दही, नीम का तेल, मछली के काँटे और गोबर का उपयोग करती हूँ। स्टिकी कार्ड (गोंद-आधारित जाल) भी एक विकल्प है।”

उन्होनें चमेली और गेंदे के पौधे भी लगाए जो मधुमक्खी को आकर्षित करते हैं और बेहतर कीट रिपलेंट हैं।

केवल 4-5 पौधों के साथ शुरू की गई बागवानी अब सैकड़ों पौधों के साथ एक खूबसूरत बगीचे के तब्दील हो गई है। यह बगीचा पूरे परिवार को जैविक भोजन, शुद्ध हवा और यहाँ तक कि दिल्ली की बढ़ती गर्मी में राहत भी देता है। और सबसे अच्छी बात यह है कि सुमति को अब साँस लेने में तकलीफ या एलर्जी नहीं है!

मूल लेख- GOPI KARELIA

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पूजा दास

पूजा दास पिछले दस वर्षों से मीडिया से जुड़ी हैं। स्वास्थ्य और फैशन से जुड़े मुद्दों पर नियमित तौर पर लिखती रही हैं। पूजा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है और नेकवर्क 18 के हिंदी चैनल, आईबीएन7, प्रज्ञा टीवी, इंडियास्पेंड.कॉम में सक्रिय योगदान दिया है। लेखन के अलावा पूजा की दिलचस्पी यात्रा करने और खाना बनाने में है।
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