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लोगों से भरे कमरे में आखिर आप ही को क्यों काटते हैं मच्छर?

क्या आप भी चाहते हैं कि दुनिया से मच्छरों का नामों निशान मिट जाए? तो यह लेख आपको ज़रूर पढ़ना चाहिए।

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हम सबके ग्रुप में कोई न कोई ऐसा दोस्त जरूर होता है जो हमेशा मच्छरों के काटने की शिकायत करता है। क्या आपके किसी दोस्त की भी यही शिकायत है? दरअसल, कुछ रिसर्च में यह बात स्पष्ट हुई है कि कुछ लोगों को मच्छर अधिक काटते हैं और इसके पीछे कुछ वजह भी हैं। आइए हम आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं।

जर्नल ऑफ़ मेडिकल एंटोमोलोजी की एक रिसर्च के मुताबिक, मच्छर सेलेक्टिव जीव होते हैं और A ब्लड ग्रुप वाले लोगों की बजाय O ब्लड ग्रुप वाले लोगों को ज्यादा काटते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि मच्छर O ब्लड ग्रुप में बनने वाली कुछ सेक्रेशंस के प्रति ज्यादा आकर्षित होते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ्लोरिडा में एंटोमोलोजी के प्रोफेसर, जोंथान एफ डे इस बारे में सहमति जताते हुए और भी कई चीजों के बारे में बताते हैं, जिस वजह से मच्छर खासतौर पर कुछ लोगों को ही ज्यादा काटते हैं। वह कहते हैं, “शायद CO2 सबसे महत्वपूर्ण है। जितनी ज्यादा मात्रा में आप CO2 उत्पादित करते हैं, जैसे जिनकी पाचन क्रिया बहुत अच्छी होती है – आनुवंशिक और कुछ अन्य कारक, जो आपके शरीर से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को बढ़ाते हैं। जितना अधिक आप CO2 छोड़ते हैं उतना ही ये मच्छर आपकी ओर आकर्षित होते हैं।”

दुनिया को मच्छरों की 3,500 प्रजातियों का दंश झेलना पड़ा है और ये जीव कई बीमारियों को फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं, जिनमें कुछ घातक बीमारी भी शामिल हैं। सभी प्रजातियों में, एडीज एजिप्टी मच्छर जीका, डेंगू, चिकनगुनिया और पीले बुखार के लिए अकेले जिम्मेदार है। अधिक खतरनाक बात यह है कि दुनिया की आधी आबादी उन क्षेत्रों में रहती है जहां यह प्रजाति मौजूद है। वहीं एनोफेलीज मच्छरों की वजह से मलेरिया फैलता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, “मनुष्यों में बीमारी को ले जाने और फैलाने की उनकी क्षमता हर साल लाखों लोगों की मृत्यु का कारण बनती है। डेंगू के मामले पिछले 30 वर्षों में 30 गुना बढ़ गए हैं, और बहुत से देश अपने यहाँ इस बीमारी के पहले प्रकोप के बारे रिपोर्ट कर रहे हैं।”

मच्छर काटने से होने वाली बीमारी से दुनिया भर में हर साल 7,00,000 लोगों की मौत होती है।

भारत में मच्छर की 400 प्रजातियाँ हैं और ये सभी बीमारियों को फैलाती हैं। चूंकि जनसंख्या और स्वच्छता, मच्छरों द्वारा फैलने वाले रोगों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि पिछले साल 67,000 लोगों को देश भर में इन रोगों से ग्रस्त पाया गया।

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ये आंकड़े बिल्कुल चिंतनीय हैं लेकिन हमें यह भी जानना चाहिए कि मच्छरों की ज़्यादातर प्रजातियाँ अपने जीवन के लिए फूल और फलों के रस पर निर्भर करती हैं। सिर्फ 6% मादा प्रजातियाँ ही अपने अंडों के लिए इंसान का खून पीती है।

ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि यदि मच्छरों का केवल एक छोटा समूह ही हानिकारक है, तो हम उनसे छुटकारा क्यों नहीं पा सकते हैं? या शायद पूरी प्रजाति को मिटा दें?

हमारी नैतिकता के साथ-साथ कुछ वैध तर्क हैं जो मच्छरों के संरक्षण का समर्थन करते हैं।

मच्छर, लाखों अन्य जीवों जैसे मेढक, ड्रैगनफली, चमगादड़ और पक्षियों के लिए मुख्य भोजन हैं। इसलिए इनके उन्मूलन से खाद्य श्रृंखला बाधित हो सकती है। साथ ही, नर मच्छर रसपान करते हुए सभी पौधों में पॉलीनेशन करते हैं।

ऐस में हम यह भी कह सकते हैं कि मच्छरों को मारना बिल्कुल भी प्रभावी उपाय नहीं है। भले ही इनका काटना कुछ लोगों के लिए बीमारी और मौत का कारण बन जाता है लेकिन इन्हें संरक्षित करना भी ज़रूरी है!

मूल लेख: गोपी करेलिया


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