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कचरे से खाना खाते गरीबों को देख शुरू किया फूड बैंक, मात्र 5 रूपए में खिला रहे लज़ीज़ खाना

कचरे से खाना खाते गरीबों को देख शुरू किया फूड बैंक, मात्र 5 रूपए में खिला रहे लज़ीज़ खाना

गुरुग्राम के सदर बाज़ार में अब कोई कूड़ेदान में फेंके गए अन्न को इकट्ठा कर खाना खाते आपको नहीं मिलेगा। सदर बाजार में कॉस्मेटिक की दुकान चलाने वाले पंकज गुप्ता की वजह से यह सब संभव हो पाया है।

रोटी इंसान की सबसे बड़ी जरुरत है। दो वक़्त की रोटी के लिए इंसान सुबह से उठकर सोचता है। किसी के पास इतना भोजन है कि वह खाने के बाद बचे अन्न को बाहर फेंक देता है तो कोई उस फेंके हुए खाने का इंतजार करता है, जिससे वह अपनी भूख शांत कर सके। ऐसे में यदि कोई भूखे जरूरतमंद को सम्मान के साथ भोजन करा दे तो वह व्यक्ति उस जरूरतमंद के लिए किसी फरिश्ते या देवदूत से कम नहीं है। आज हम आपको एक ऐसे ही व्यक्ति कहानी सुना रहे हैं जो जरूरतमंदों को भोजन करवाते हैं। यह कहानी गुरुग्राम के पंकज गुप्ता की है।

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पंकज गुप्ता

गुरुग्राम के सदर बाज़ार में अब कोई कूड़ेदान में फेंके गए अन्न को इकट्ठा कर खाना खाते आपको नहीं मिलेगा। सदर बाजार में कॉस्मेटिक की दुकान चलाने वाले पंकज गुप्ता की वजह से यह सब संभव हो पाया है।

यदि कोई 5 रुपये में दाल, चावल, रोटी-सब्जी, मिठाई, फल आदि सभी भोजन सम्मान के साथ कराये तो शायद कोई भूखा नहीं रहेगा और न कचरे से खाना खायेगा।

यह है वह 5 रूपए वाली थाली

पंकज गुप्ता ने देवदूत फ़ूड बैंक संस्था की नींव रखी और अब उसी संस्था के जरिए केवल 5 रुपये की भोजन थाली मुहैया करा रहे हैं। एक वक़्त का भरपेट भोजन मात्र 5 रुपये में और यदि 5 रुपये भी नहीं तब भी आप भोजन कर सकते हैं। दिल करे तो 5 रुपये दीजिये और नहीं है तो भी भोजन करिए। देवदूत फ़ूड बैंक के माध्यम से प्रतिदिन 700-800 लोगों को भोजन करवाया जाता है।

पंकज बताते हैं, “मैं हर दिन दुकान जाते समय कचरे के ढ़ेर से बचा खाना खाते लोगों को देखता था। यह सब देखकर मेरा मन दुखी हो जाता था इसलिए मैंने ऐसे भूखे लोगों के लिए कुछ अलग करने की ठानी। परिवार ने भी मेरा  साथ दिया और निश्चय किया कि हम अपनी बचत से कुछ भाग इन लोगों की मदद पर खर्च करेंगे और प्रतिदिन 100 लोगों को भोजन कराने के संकल्प के साथ 14 अप्रैल 2018 को देवदूत फ़ूड बैंक संस्था की शुरूआत की।”

फूड बैंक चलाती टीम

पंकज बताते हैं, “जब मैंने अन्य लोगों को इस काम के बारे में बताया तो सभी ने मेरा मज़ाक बनाया। सभी ने यही कहा कि फंड की दिक्कत आएगी। लेकिन मैंने ठान लिया था कि अब हमेशा यह काम करना है।”  शुरूआत में उन्होंने कैटरिंग से  आर्डर देकर  खाना बनवाकर बाँटना प्रारम्भ किया। खाना लेने में किसी को शर्म या किसी को भीख जैसा न लगे इसके लिए उन्होंने 5 रुपये में भोजन लेने का निश्चय किया और बच्चों के लिए इसे मुफ्त कर दिया।

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लाइन लगाकर खाना लगाते लोग

भोजन की क्वालिटी और सफाई की कमी महसूस होने पर पंकज गुप्ता ने कम्युनिटी किचन की शुरूआत की, जहाँ उनकी निगरानी में भोजन बनता था। धीरे-धीरे इस मुहिम में अन्य लोग भी साथ आने लगे। पंकज गुप्ता का 100 लोगों के लिए लिया गया भोजन का संकल्प आज प्रतिदिन 500 से ज्यादा लोगों तक पहुँच गया है। हर दिन 12 से 1 बजे के बीच देवदूत फ़ूड बैंक टीम निश्चित स्थान पर पहुँचकर लोगों को भोजन कराती है।

लॉकडाउन के दौरान प्रशासन की अनुमति से पंकज गुप्ता ने 800 जरूरमंद परिवारों को गोद लिया और उनके भोजन की व्यवस्था की।

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खाना मिलने के बाद कुछ ऐसे खिल उठते हैं चेहरे

अपने घर के लिए भोजन की व्यवस्था के लिए सभी चिंतित होते हैं लेकिन दूसरे की भूख का दर्द बहुत कम लोगों को समझ में आता है। एक महीने में 2 से 3 लाख रुपये खर्च पर चलने वाली देवदूत फ़ूड बैंक की किचन की सभी व्यवस्था के बारे में पंकज गुप्ता कहते हैं, “सभी व्यवस्था भगवान ही करेंगे, मैं सिर्फ काम कर रहा हूँ। कोई भूखा न रहे , कम से कम भोजन की लिए इतना मजबूर न हो की गंदगी में पड़ा खाना खाना पड़े। मेरी इच्छा है कि देश के हर हिस्से में ऐसा फ़ूड बैंक हो जहाँ लोग सम्मान से भोजन कर सकें।”

देवदूत फूड बैंक चलाने वाले पंकज गुप्ता सही अर्थ में खुद एक देवदूत हैं जो जरूरतमंद लोगों के दर्द को समझकर उनकी मदद करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। बेटर इंडिया उनके जज्बे को सलाम करता है।

यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है तो आप पंकज गुप्ता से 9278885468 पर संपर्क कर सकते हैं।

लेखक- अमित कुमार शर्मा

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