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Kamala Harris: भारतीय नाना की सीख को आज तक नहीं भुला पाईं अमरीकी उप राष्ट्रपति उम्मीदवार

Kamala Harris: भारतीय नाना की सीख को आज तक नहीं भुला पाईं अमरीकी उप राष्ट्रपति उम्मीदवार

प्रगतिशील विचारों वाले पी.वी. गोपालन ने कमला की माँ को महज 19 साल की उम्र में अमेरिका पढ़ने के लिए भेज दिया था।

कमला हैरिस का नाम इन दिनों खूब चर्चा में है। अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन ने कैलिफोर्निया की सीनेटर कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार चुना है। अपने पहले चुनावी कैंपेन में कमला हैरिस ने भारत और जमैका की विरासत पर काफी खुलकर बात की।

अपने भाषण में उन्होंने कहा, “मेरी माँ और पिता दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों से अमेरिका आए थे। विश्वस्तरीय शिक्षा की तलाश में माँ भारत से आई थीं और पिता जमैका से थे। 1960 के दशक का नागरिक अधिकार आंदोलन उन्हें एक-साथ लेकर आया और इस तरह वे ओकलैंड [कैलिफोर्निया] की गलियों में छात्र के रुप में मिले। उन्होंने न्याय के लिए आवाज़ उठाई थी और यह आज तक जारी है।”

हालाँकि, उनके भाषण में एक व्यक्ति का ज़िक्र नहीं किया गया था और वह व्यक्ति हैं उनकी माँ के पिता यानी कमला हैरिस (Kamala Harris) के नाना। हैरिस के नाना, पीवी गोपालन, भारतीय सिविल सेवक थे। कमला हैरिस ने एक बार उनके बारे में बात करते हुए उन्हें “दुनिया के पसंदीदा लोगों में से एक” बताया था। कमला के जीवन पर गोपालन का काफी प्रभाव रहा है। नागरिक भावना, सार्वजनिक सेवा और मानवाधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वह उनका मार्गदर्शन करते थे। 1998 में  गोपालन दुनिया को अलविदा कह गए थे।

kamala harris
कमला के भारतीय नाना पी.वी. गोपालन source

पत्रकार अजीज हनीफा के साथ 2009 के एक साक्षात्कार में कमला ने अपने जीवन पर गोपालन के प्रभाव के बारे में बात की।

उन्होंने कहा कि उनकी माँ के अलावा उनके जीवन में सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक उनके नाना पीवी गोपालन थे। उन्होंने बताया, “नाना भारत में एक ऐसे पद पर थे जो इस देश में सचिव के पद के समान था। मेरे बचपन की सबसे खूबसूरत यादों में से एक मद्रास के बेसेंट नगर में रहना और नाना के रिटायर होने के बाद उनके साथ बीच पर घूमना था। वह अपने दोस्तों के साथ हर सुबह समुद्र तट पर टहला करते थे। उनके सभी दोस्त रिटायर्ड सरकारी अधिकारी थे और वे राजनीति के बारे में बात करते थे। वे बात करते थे कि भ्रष्टाचार से कैसे लड़ा जाना चाहिए। वे न्याय पर भी चर्चा करते थे। वे हंसी-मजाक करते थे, राय-विचार और तर्क देते थे। उनके काम से भी ज़्यादा, उनकी बातों का मुझ पर काफी प्रभाव पड़ा।”

वैसे तो पीवी गोपालन के बारे में बहुत ज़्यादा विवरण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन आइये हम आपको बता देते हैं उनके बारे में वह पांच बातें, जो हम उनके बारे में जानते हैं:

जीवन की शुरुआत :

पीवी गोपालन का जन्म 1911 में तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले के एक गाँव पिंगानडू में हुआ था। पड़ोस के जिले में रहने वाली राजम से उनकी शादी हुई। 1930 के दशक में सरकारी नौकरी के साथ उन्होंने अपना करियर शुरू किया और भारतीय सिविल सेवा में करियर आगे बढ़ने के साथ वह और उनका परिवार नई दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में रहे। अपनी नौकरी के दौरान उन्होंने विभिन्न पदों पर काम किया जिसमें परिवहन मंत्रालय (रोड्स विंग) में भारत सरकार के उपसचिव और श्रम, रोजगार और पुनर्वास मंत्रालय में भारत सरकार के संयुक्त सचिव जैसे पद शामिल हैं।

मेहनती सिविल सेवक:

हालाँकि 2019 के अपने एक वृतांत, द ट्रुथ्स वी होल्ड, में कमला ने बताया कि गोपालन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा रहे हैं, लेकिन यह दावा उनके परिवार में ही विवाद का मसला है क्योंकि गोपालन की भागीदारी का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। लेकिन उनके परिवार के कई सदस्य मानते हैं कि वह एक मेहनती सिविल सेवक थे। परिवार वालों का कहना है कि यदि उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के संबंध में कोई सार्वजनिक दावा किया होता, तो शायद उनकी नौकरी नहीं रहती।

भ्रष्टाचार विरोधी रुख:

उन्हें भारत के सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्रों में से एक, मुंबई में एक सीनियर कमर्शिअल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। एक कमर्शिअल अधिकारी के रूप में, बिजनेसमैन को रिश्वत देने से रोकने के लिए उन्होंने घर पर सख्त नियम बनाए थे। पेडर रोड पर स्थित निवास पर, किसी भी अजनबी को प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। केवल बच्चों को मिठाई या फल जैसे पार्सल खोलने की अनुमति थी जो घर तक पहुंचते थे। इसके अलावा कोई और पार्सल खोलने का सवाल ही नहीं था।

ज़ाम्बिया और मानवाधिकार:

1964 में ज़ाम्बिया को आज़ादी मिलने के बाद, पीवी गोपालन को लुसाका में रोडेशिया (अब जिम्बाब्वे) से आने वाले शरणार्थियों की मदद करने के लिए भेजा गया था। कमला बताती हैं, “मेरे नाना नागरिक अधिकारों के बचाव, समानता और अखंडता के लिए लड़ने के महत्व को समझते थे।”

प्रगतिशील दृष्टिकोण:

1958 में, गोपालन की बेटी श्यामला (कमला की माँ), ने संयुक्त राज्य अमेरिका में यूसी बर्कले में एक मास्टर कार्यक्रम के लिए आवेदन किया था। उस समय श्यामला की उम्र 19 साल थी। उस वक्त महिलाओं से आगे काम करने या पढ़ाई करने की उम्मीद नहीं की जाती थी। लेकिन इसके विपरीत गोपालन ने न केवल अपने बेटी को पढ़ने के लिए बाहर भेजने का निर्णय लिया बल्कि उनके ट्यूशन और उनके पहले साल के फीस के लिए अपनी रिटायर्मेंट सेविंग से भुगतान दिया।

एल ए टाइम्स से बात करते हुए कमला के मामा बालचंद्रन ने बताया, “उस समय, ग्रैजुएशन की पढ़ाई करने के लिए अमेरिका जाने वाली अविवाहित भारतीय महिलाओं की संख्या काफी कम थी। लेकिन मेरे पिता खुले विचारों वाले थे। उन्होंने कहा कि अगर एडमिशन मिले तो ज़रूर जाना चाहिए।”

बाद में, श्यामला ने जमैका के डोनाल्ड हैरिस से शादी की। हालाँकि, शुरुआत में गोपालन और राजम इस शादी से नाखुश थे लेकिन उन्होंने इसे जल्द ही स्वीकार कर लिया।

श्यामला के सभी भाई-बहनों को अपनी पसंद से ज़िंदगी जीने की आज़ादी थी। अर्थशास्त्र और कंप्यूटर विज्ञान में पीएचडी बालचंद्रन ने एक मैक्सिकन महिला से शादी की और उनकी एक बेटी है। उनकी छोटी बहन सरला, एक रिटायर्ड आब्स्टट्रिशन हैं जिन्होंने शादी नहीं की। सबसे छोटी बहन महालक्ष्मी हैं जो इंफॉर्मेशन साइंटिस्ट हैं जिन्होंने शादी की लेकिन उनके बच्चे नहीं हैं। परिवार के बारे में बात करते हुए एक बार कमला ने कहा था, “मुझे लगता है कि जब आप एक ऐसे परिवार में बड़े होते हैं, तो जीवन में बाद में आपको एहसास होता है कि आपका परिवार किस तरह से अलग है। यह सब मुझे बहुत सामान्य लगता था। लेकिन एक वयस्क होने के बाद और उम्र बढ़ने के साथ मुझे पता चला कि वे बेहद प्रगतिशील थे।”

सीनेटर कमला हैरिस(kamala Harris) ने इससे पहले भी कई बार अपने भारतीय वंश और अपने जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बात की है। वह संयुक्त राज्य अमेरिका से एक जनप्रतिनिधि हैं और यदि उपराष्ट्रपति चुनी जाती हैं तो वह अमेरिका के हित के लिए काम करेंगी। इसके अलावा, अपने नाना और माँ के मानवाधिकार विचारों का कमला के नीतिगत फैसलों पर कितना प्रभाव होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।

निश्चत तौर पर, यह उन कई भारतीयों के लिए गर्व का दिन है, जो यूएसए जैसे देशों में चले गए हैं। कई लोगों को उम्मीद है कि कमला अमेरिकी राजनीति में ऊंचाई को छुएंगी, जो कि एक दशक पहले नहीं था। कमला के इस ऊंचाई पर जाने का कुछ श्रेय उनके नाना और माँ के नाम भी है।

जानकारी स्त्रोत-LA Times and India Abroad

फीचर फोटो-Twitter/Rohit Bansal/LA Times, Wikimedia Commons

मूल लेख- RINCHEN NORBU WANGCHUK

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पूजा दास

पूजा दास पिछले दस वर्षों से मीडिया से जुड़ी हैं। स्वास्थ्य और फैशन से जुड़े मुद्दों पर नियमित तौर पर लिखती रही हैं। पूजा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है और नेकवर्क 18 के हिंदी चैनल, आईबीएन7, प्रज्ञा टीवी, इंडियास्पेंड.कॉम में सक्रिय योगदान दिया है। लेखन के अलावा पूजा की दिलचस्पी यात्रा करने और खाना बनाने में है।
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