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छत पर उगाये फूल, सब्ज़ी, फल और मसालों के 300 पेड़-पौधे, ताकि पड़ोसियों को मिले ताज़ा स्वाद

24 वर्षीय अनुभव ने अब अपने गार्डन में शहतूत, कमरख, और बेर जैसे फल भी लगाए हैं जो आजकल स्थानीय बाज़ारों में नहीं मिलते हैं!

पिछले कुछ सालों में जैसे-जैसे शहरों की आबादी बढ़ी है, वैसे ही पेड़-पौधे कम होने लगे हैं। इसके साथ ही घटने लगी हैं हमारी खाद्य प्रजातियाँ, मतलब कि न जाने कितनी सब्ज़ियाँ और फल वक़्त के साथ जैसे खोते जा रहे हैं। पहले के जमाने में मोहल्ले में यदि शहतूत या जामुन का पेड़ होता था तो पूरा मोहल्ला फल खाता था। लेकिन अब इन सबके लिए हमें बाजार जाना पड़ता है।

बहुत से तो ऐसे फल हैं जिन्हें आज के बच्चे जानते ही नहीं और जिन्होंने कभी बचपन में ऐसे फल-सब्जी आदि को देखा और खाया था, उनके लिए ये सब अब सुनहरी यादों में ही हैं। पर इन सुनहरी यादों को आज की हकीकत बनाने की ठानी है उत्तर प्रदेश के एक 24 वर्षीय युवा ने।

रायबरेली में रहने वाले अनुभव वर्मा ग्रैजुएशन करके बैंक की नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और साथ ही, वह अपनी छत पर गार्डनिंग करते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही पेड़-पौधों से काफी ज्यादा लगाव है। अलग-अलग चीजें बोना, उन्हें बड़ा करना और फिर हार्वेस्टिंग करना, यह सब उन्हें बहुत अच्छा लगता है।

Anubhav Verma in his Terrace Garden

साल 2015 से उन्होंने अपना टेरेस गार्डन बनाना शुरू किया, जिसमें आज 300 से ज्यादा पेड़-पौधे हैं। फूलों के पौधे से अपनी गार्डनिंग की शुरुआत करने वाले अनुभव ने धीरे-धीरे सब्जी, हर्ब्स, फल और अब मसाले उगाना शुरू किया है। उनका उद्देश्य एक मिश्रित गार्डन बनाने का है।

अनुभव कहते हैं कि जब उन्हें फूल की बागवानी में सफलता मिली तो उन्हें लगा कि उन्हें कुछ नया करना चाहिए और उन्होंने सब्जी और फल में हाथ आजमाया। वह कहते हैं, “जैसे-जैसे गार्डनिंग और पेड़-पौधों के बारे में मेरी जानकारी बढ़ने लगी मुझे समझ में आया कि अगर हर घर में फल और सब्जी उगाई जाए तो हमारे यहाँ खाद्यान्न संकट होगा ही नहीं।”

A look of his garden

वह कहते हैं कि लोगों को अक्सर लगता है कि इस मौसम में पेड़-पौधे नहीं होंगे या वह मौसम अच्छा है, तब करेंगे। लेकिन पेड़-पौधे लगाने के लिए हर मौसम अच्छा होता है। जिस दिन आपको लगे कि पौधे लगाते हैं, तुरंत इस पर काम शुरू कर दें। दूसरी बार सोचने की ज़रूरत नहीं है। घर में उपलब्ध बीज जैसे धनिया, मेथी आदि से शुरूआत कर सकते हैं। वैसे सबसे अच्छा तरीका है कलम के द्वारा पौधा लगाना। अपने आस-पास पड़ोसियों से या फिर किसी बगीचे से आप कलम ले सकते हैं।

पौधों की इन कटिंग्स को आप किसी भी पुराने डिब्बे या बोतल आदि में मिट्टी भरकर लगा सकते हैं। मिट्टी तैयार करने के लिए आप 50% मिट्टी, 30% खाद और 20% रेत या कोकोपीट मिलाएं। कोकोपीट मिलाने से मिट्टी खुली-खुली रहती है और इसमें ड्रेनेज आसानी से होता है।

Vegetables

अनुभव कहते हैं कि वह सुबह-शाम अपने गार्डन में वक़्त बिताते हैं और बाकी समय परीक्षा की तैयारी पर ध्यान देते हैं। “अक्सर लोगों को लगता है कि तैयारी पर फोकस करने का मतलब है आप बाकी किसी गतिविधि में हिस्सा न लें। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। आपको पढ़ाई के साथ-साथ ब्रेक की ज़रूरत होती है। मेरे लिए तनाव को दूर करने की राह है गार्डनिंग। पेड़-पौधों के साथ वक़्त बिता कर शांति मिलती है,” उन्होंने कहा।

उनकी मेहनत से आज उनके घर वालों को खूबसूरत फूल, ताज़ी सब्जियां और यहाँ तक कि कुछ फल भी खाने को मिल रहे हैं। अनुभव कहते हैं कि वह अपनी छत पर फूलों के पेड़-पौधों के साथ-साथ 4 तरह के मसाले, 8-10 फलों के पेड़ और लगभग 6-7 मौसमी सब्जी उगा रहे हैं। मसालों में उन्होंने काली मिर्च, लौंग, इलायची और तेजपत्ता लगाएं हैं।

वहीं फलों में पपीता, कमरख (Star Fruit), लीची, बेर, शहतूत, अंजीर, आम, अमरुद, आमला, सीताफल, और चीकू के पेड़ लगाए हुए हैं। वह कहते हैं कि उन्हें अपने कुछ पेड़ों से फल मिलना शुरू हो गए हैं जैसे अंजीर, शहतूत आदि से।

He is growing a variety of flowers, fruits, and vegetables

बाकी वह लौकी, तोरई, करेला, गोभी, हरी मिर्च, बैंगन, और टमाटर आदि उगाते हैं। अनुभव का सपना है कि एक दिन उनका टेरेस गार्डन फलों से भरा हुआ हो और उनके गार्डन का फल पूरा मोहल्ला खाए।

“पहले यही होता था। पर आजकल तो बाज़ारों में भी बहुत से फल नहीं मिलते। मैं ऐसे ही कुछ अलग -अलग तरह के फल उगाना और लोगों को खिलाना चाहता हूँ,” उन्होंने आगे कहा।

अनुभव अपने घर में गीले कचरे से खाद भी बनाते हैं और बाकी गोबर की खाद वह एक डेयरी से लेते हैं। वह कहते हैं कि पेड़-पौधों को अगर सही से देख-रेख में रखा जाए तो ये खराब नहीं होते। इसके लिए वह गर्मियों में हर रोज़ सुबह-शाम और सर्दियों में शाम को अपने पौधों को पानी देते हैं। पौधों को पानी की एक अनोखी तकनीक यह भी है कि आप पानी की एक बोतल भरें और इसके ढक्कन में छेद करके इसे उल्टा करके गमले में रख दें। इससे पानी की बचत भी होती है और मिट्टी में अधिक समय तक नमी भी रहती है।

“इसके अलावा, आप अपने पेड़-पौधों में मल्चिंग भी कर सकते हैं। मल्चिंग करने के लिए आप सूखे पत्तों, घास और राख का उपयोग करें। इस प्रक्रिया से भी नमी अधिक समय तक रहती है और पेड़-पौधे अच्छे से विकसित होते हैं,” उन्होंने आगे बताया।

अपने पेड़-पौधों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ अनुभव अपने गार्डन को अलग और खूबसूरत लुक देने की कोशिश भी करते हैं। उन्होंने अपने गार्डन में कुछ दिनों पहले ही मटकों का उपयोग करके एक वाटर फॉल बनाया था और उससे पहले उन्होंने एक छोटा-सा तालाब भी बनाया हुआ है। इस तालाब में उन्होंने कुछ मछलियाँ भी डाली हुई हैं।

His Fish Pond and Water Fall

अनुभव कहते हैं कि जब भी उन्हें कुछ अलग करने का मन होता है तो वह अपने गार्डन के लिए इस तरह की क्रिएटिव चीजें बनाते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि वह कम से कम खर्च में अपने गार्डन को बेहतर लुक दें।

अपने जैसे प्रकृति प्रमियों के लिए वह कुछ आसान से टिप्स बता रहे हैं:

* हमेशा ऐसी जगह चुनें जहाँ पौधों को अच्छी धूप मिले।
* महीने में कम से कम एक बार पौधों में खाद आदि डालें।
* कीटों से पौधों को बचाने के लिए आप नीम के तेल का छिड़काव कर सकते हैं।
* आप बोनमील भी अपने पेड़-पौधों में डालें, खासकर की फलों के। क्योंकि इससे पौधों को फॉस्फोरस मिलती है।

* कोई भी पेड़-पौधा लगाने से पहले, थोड़ा-बहुत उसके बारे में पढ़ लें या फिर किसी से सलाह लें। इससे आपके लिए आसानी रहेगी।
* याद रखें कि जितने हमारे लिए पेड़-पौधे ज़रूरी हैं, उतने ही पेड़-पौधों के लिए हम। इसलिए हमेशा अपने गार्डन के लिए वक़्त निकालें और पौधों का मुआयना करते रहें!

अगर आपको भी है बागवानी का शौक और आपने भी अपने घर की बालकनी, किचन या फिर छत को बना रखा है पेड़-पौधों का ठिकाना, तो हमारे साथ साझा करें अपनी #गार्डनगिरी की कहानी। तस्वीरों और सम्पर्क सूत्र के साथ हमें लिख भेजिए अपनी कहानी hindi@thebetterindia.com पर!


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