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अचार, चटनी और लौंजी बनाने की पारंपरिक विधियों को सहेज रहा है रुचिका का ‘सिलबट्टा’

दादी की रेसिपी से बनातीं हैं 30 तरह के अचार, घर से ही खड़ा किया अपना कारोबार!

50-55 साल की उम्र में जब अपने बच्चों के सेटल होने के बाद कोई माँ या दादी-नानी कुछ करने की सोचती हैं तो अक्सर उन्हें यह कहकर रोक दिया जाता है कि आपके घर में सबकुछ तो है। फिर आपको क्या ज़रूरत पैसे कमाने की? या फिर यह कहा जाता है कि इस उम्र में क्या करोगी?

लेकिन यह कहने वाले अक्सर भूल जाते हैं कि ज़रूरी नहीं कोई महिला सिर्फ पैसों की ज़रूरत में व्यवसाय करे। हो सकता है, उसे अपनी एक पहचान की चाह हो, जो वह कभी अपनी जिम्मेदारियों के चलते नहीं बना पाई।

जिस तरह पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती, वैसे ही व्यवसाय शुरू करने की भी कोई उम्र नहीं होती। ज़रूरत होती है तो बस हुनर और थोड़े से हौसले की, जो गुरुग्राम में रहने वाली रुचिका कोहली ने दिखाया।

55 वर्षीय रुचिका एक समृद्ध परिवार से हैं शायद इसलिए दूसरों को कभी नहीं लगा कि उन्हें काम करने की ज़रूरत है। पर उन्हें अपनी एक अलग पहचान चाहिए थी जो उनके हुनर के दम पर हो।

 

Ruchika kohli and her products

 

बंटवारे से समय उनका परिवार लाहौर से दिल्ली आया था। वह दिल्ली में ही जन्मीं और वहीं पली-बढीं। पर उन्होंने अपनी दादी और बुआ की कहानियों में हमेशा लाहौर को देखा। वह बतातीं हैं कि अपनी दादी और बुआ से अचार बनाने की रेसिपीज सुनते हुए बड़ी हुईं। अपनी दादी और बुआ से उन्होंने न सिर्फ पारंपरिक विधियों से अचार बनाने के तरीके सीखे बल्कि अपने हाथ में वैसा ही स्वाद भी पाया।

रुचिका हमेशा से इन रेसिपीज को सहेजना चाहतीं थीं और उनका सपना था कि लोग यह स्वाद ज़रूर चखें। पर ग्रैजुएशन के दूसरे साल में ही उनकी शादी हो गई और अपने परिवार की जिम्मेदारियों में उन्होंने अपने सपनों को कहीं पीछे रख दिया। लेकिन अपने बच्चों के सेटल होने के बाद, उन्हें लगा कि क्यों न कुछ अपने सपनों के लिए किया जाए।

“मैं दिल्ली में ही पली-बढ़ी हूं। बस दो-तीन साल पहले हम गुरुग्राम शिफ्ट हुए। यहाँ आकर सोसाइटी में मुझे बाकी महिलाओं से काफी प्रेरणा मिली। अगर मैं कभी घर के लिए कुछ बनाती और दूसरों को चखाती तो बहुत ही हौसला मिलता था उनसे। बस वहीं से थोड़ी प्रेरणा मिली आगे बढ़ने की,” उन्होंने कहा।

रुचिका ने साल 2018 में अपने व्यवसाय की शुरूआत की, जिसका नाम उन्होंने रखा, ‘सिलबट्टा।’ इसके ज़रिए वह घर पर अपनी दादी-बुआ की रेसिपी से बनाए अचार, जैम, मुरब्बा, और लौंजी आदि ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने धीरे-धीरे अपनी शुरुआत की। सबसे पहले उन्होंने अपने सबसे पॉपुलर आम के अचार से शुरू किया।

 

Home Made Amla Pickle

 

आज वह लगभग 30 तरह के अचार बनातीं हैं, जिनमे आम, मिर्च, कटहल, निम्बू, साबुत लाल मिर्च, चुकन्दर, खजूर आदि शामिल हैं। बाकी कुछ उनके अनोखे अचार भी हैं जैसे बैंगन-कचालू, गोभी-शलजम-गाजर आदि। अचार के अलावा वह मौसम के हिसाब से कभी, जैम, चटनी और शरबत आदि भी बनातीं हैं। उनका आम और हरी मिर्च का अचार सदाबहार है।

हर महीने वह लगभग 25 किलोग्राम अचार बेचतीं हैं और उनके ग्राहक 150 से भी ज्यादा हैं। उनका यह व्यवसाय गुरुग्राम तक ही सीमित है।

“मेरा उद्देश्य कोई बहुत पैसे कमाना नहीं है। मैं लोगों को अच्छी क्वालिटी और पुरानी रेसिपीज का स्वाद देना चाहतीं हूँ। मुझे सबसे ज्यादा ख़ुशी होती है जब मेरे ग्राहक और नए लोगों को जोड़ते हैं,” उन्होंने बताया। रुचिका को कभी भी बहुत ज्यादा मार्केटिंग करने की ज़रूरत नहीं पड़ी। जिसने भी एक बार उनके अचार और चटनी आदि को चखा, वो खुद ही दूसरे लोगों को उनसे जोड़ देते हैं।

 

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अपने उत्पादों में वह कभी भी कोई प्रेजेर्वेटिव नहीं डालतीं हैं। कोई भी चीज़ बनाने के लिए पहले से ही रेडी-मेड कोई मसला नहीं लिया जाता। वह खुद अपने मसाले तैयार करके बनातीं हैं। सभी काम उनके अपने घर की किचन से होता है। सब्ज़ी-फलों को काटने के लिए वह मदद लेतीं हैं और बाकी सभी काम वह खुद करतीं हैं। लोग उन्हें कई बार स्पेशल ऑर्डर देखर भी चीजें बनवाते हैं। इसके बारे में वह कहतीं हैं कि ग्राहकों को क्वालिटी चाहिए, जो मैं उन्हें दे रही हूँ।

 

 

“मेरा पहला उद्देश्य क्वालिटी को बनाए रखना है और दूसरा, अगर कभी कोई फल या सब्ज़ी महंगा हो जाए तो भी मैं अपने अचार के दाम नहीं बढ़ाती। जो मैंने फिक्स किया हुआ है, वही रहेगा। इन सब चीजों से भी ग्राहक जुड़े रहते हैं और कोई दूसरी जगह से नहीं खरीदते,” उन्होंने आगे कहा।

अपने उत्पादों को बनाने के तरीकों के साथ-साथ वह पैकेजिंग का भी पूरा ध्यान रखतीं हैं। रुचिका अचार, जैम और चटनी आदि को पैक करने के लिए कांच की बोतलें इस्तेमाल करतीं हैं। उनका कहना है कि वह कम पैसों के चक्कर में प्लास्टिक इस्तेमाल करके पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहतीं। अगर उन्हें पता है कि उनका एक छोटा-सा कदम पर्यावरण के लिए अच्छा है तो वह दस रुपये एक्स्ट्रा खर्च करने को भी तैयार हैं। फ़िलहाल, उनका पंजाबी आम का अचार खूब बिक रहा है।

 

 

वह कहतीं हैं कि व्यवसाय करने की कोई उम्र नहीं होती। आप भले ही अच्छे-खासे परिवार से हों लेकिन जो ख़ुशी अपनी एक पहचान होने में है वह किसी और अमीरी में नहीं। जब लोग उन्हें ‘सिलबट्टा’ प्रोडक्ट्स के लिए पहचानते हैं तो उन्हें और उनके परिवार को बहुत ख़ुशी होती है।

“मेरा मानना है हर एक औरत को अपनी पहचान बनाने के लिए काम करना चाहिए। आप में जो भी हुनर है, उसे अपने लिए उपयोग करें। आपको बस मेहनत और हौसले की ज़रूरत है इसलिए आगे बढ़े और अपने सपनों को पूरा करने के लिए कोशिश करें,” उन्होंने अंत में कहा।

अगर आप रुचिका कोहली से संपर्क करना चाहते हैं तो उन्हें 098182 93961 पर मैसेज कर सकते हैं!

 


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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