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वह आईएएस अफसर जो एक दिन के लिए बना दादरा और नगर हवेली का प्रधानमंत्री

हाराष्ट्र और गुजरात के बीच बसे हुए 500 स्क्वायर किलोमीटर से भी कम क्षेत्रफल वाला दादरा और नगर हवेली,गहरे जंगल, शांत झील और ऐतिहासिक भवनों से घिरा हुआ बेहद ख़ूबसूरत प्रदेश है।

पर बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि यह छोटा सा प्रदेश हमारे इतिहास का एक बहुत ही अनोखा किस्सा अपने में सहेजे हुए है। दरअसल, साल 1961 में पुरे एक दिन के लिए दादरा और नगर हवेली को भारत के नहीं बल्कि इस प्रदेश के अपने प्रधानमंत्री ने चलाया था।

आप सोच रहे होंगे कि भारत का प्रधानमंत्री होते हुए दादरा और नगर हवेली में अलग प्रधानमंत्री की क्या ज़रूरत पड़ी? तो जनाब, अगर भारतीय राजनीती के इस अनोखे किस्से को जानना तो आगे की कहानी पढ़िए।

अब हुआ यूँ कि अठारवीं सदी में मराठा राज का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा दादरा और नगर हवेली पुर्तगाल के अधिकार में आ गया।

सन 1783 में मराठा नौसेना ने पुर्तगाली फ्रिगेट सैंटाना को बर्बाद कर दिया था और उसी के मुआवज़े के रूप में उन्होंने नगर हवेली को पुर्तगालियों को सौंप दिया।

फोटो सोर्स

दो साल बाद पुर्तगालियों ने दादरा पर भी अधिकार कर लिया और इसे अपनी मिल्कीयत में तब्दील कर दिया ताकि पुर्तगालियों का शासन बना रहे। साल 1818 में जब मराठा, एंग्लो-मराठा युद्ध में अंग्रेजों से हार गए तो दोनों प्रदेशों पर पुर्तगालियों का राज हो गया।

इसके बाद के दशकों में पुरे देश में विरोधी औपनिवेशिक (कोलोनियल) भावना और राष्ट्रवादी आंदोलन होने के बावजूद इन दोनों प्रदेशों पर पुर्तगालियों का शासन बना रहा।

15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के पश्चात् भी गोवा, दादरा और नगर हवेली पर विदेशी शासन बना रहा। फ्रांस ने पांडिचेरी पर अपना शासन छोड़ दिया पर पुर्तगाल तब भी लगातार भारत को इन तीन क्षेत्रो पर राज के लिए चुनौती देते रहे।

जब अंतर्राष्ट्रीय सम्मति भी पुर्तगाली सरकार को नहीं डिगा पायी तो गोवा में राष्ट्रवादियों ने पुर्तगाल के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया। अपनी आज़ादी के लिए वे मिलकर दलों में काम करने लगे।

विख्यात गायिका लता मंगेशकर ने भी इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए पुणे में कॉन्सर्ट कर चंदा इकट्ठा किया ताकि क्रांतिकारी जंग के लिए हथियार खरीद सकें।

क्रांतिकारियों के प्रयासों को पहली सफलता 21 जुलाई 1954 में तब मिली जब दादरा को पुर्तगाली राज से आज़ाद कर लिया गया। इसके दो हफ्ते बाद ही नगर हवेली को भी स्वंत्रता मिल गयी।

फोटो सोर्स

तिरंगा फहराते हुए और राष्ट्रगान गाते हुए दादरा और नगर हवेली की आज़ादी का जश्न मनाया गया। इसके तुरंत बाद ही भारतीय प्रशासन समर्थक आज़ाद दादरा और हवेली की ‘वरिस्ता पंचायत’ बनाई गयी। इस पंचायत ने 1 जून 1961 तक राज किया और बाद में औपचारिक तरीके से भारतीय संघ में प्रवेश के लिए निवेदन किया।

पर इन दोनों क्षेत्रों को भारत में एक संघीय क्षेत्र के रूप में आधिकारिक विलय होना बाकी था। इसी उद्देशय के साथ भारतीय सरकार ने एक दूत वहां के प्रशासन पर नियंत्रण रखने के लिए भेजा। और जिस आदमी को यह जिम्मेदारी सौंपी गयी, वो थे गुजरात कैडर के आईएएस अफ़सर के. जी. बदलानी।

11 अगस्त 1961 को श्री के. जी. बदलानी को उस समय के स्वतंत्र राज्य दादरा और नगर हवेली का प्रधानमंत्री बनाया गया।

राज्य के प्रधान के रूप में उन्होंने प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के साथ हुए अनुबंध पर हस्ताक्षर किये और आधिकारिक रूप से दादरा और नगर हवेली का विलय भारत में हो गया। भारत के इतिहास में इस तरह का केवल यही एक दृष्टांत है।

कुछ महीनों पश्चात् गोवा को भी पुर्तगाली राज से आजादी मिल गयी। नवम्बर 1961 में पुर्तगाली फौजों ने गोवा के तटीय जहाज़ों और मछली पकड़ने की नावों पर गोलीबारी शुरू कर दी। एक महीने बाद दिसंबर 1961 में भारत ने भारी मात्रा में थल, जल और वायु सेना के साथ पुर्तगालियों पर धावा बोल दिया।

48 घंटों से भी कम समय में गोवा के पुर्तगाली गवर्नर जनरल मैनुएल अंटोनिओ वस्सलो ऐ सिल्वा ने आत्मसमर्पण कर गोवा को भारत को सौंप दिया।

खैर, दिलचस्प बात यह है कि भारत में आने वाले सबसे पहले विदेशी, पुर्तगाली थे और भारत से जाने वाले सबसे आखिरी भी!

( संपादन – मानबी कटोच )


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Written by निशा डागर

Nisha Dagar has done her Masters in Communication from the University of Hyderabad. She has a specialization in Communication Research. Along with her academics, she has interned with web portals like Your DOST, MaStyle Care and NGOs like Indus Action and Literacy India.
She is working as a staff writer with The Better India. She loves to write feature stories and poetry. She writes poems with the pen name Kahakasha. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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