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लॉकडाउन के दौरान कलाकारों को जोड़ा ग्राहकों से, ताकि चल सके उनका घर!

“कला साक्षी के माध्यम से हम कला से जुड़े छात्रों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं कि वे अपने ऊपर भरोसा रखें, अपने टैलेंट को खोने न दें। जिस तरह हमारी बेटी ने गलत कदम उठाकर अपने जीवन को गंवा दिया, कोई और ऐसा न करे।”- कविता नायर

साल 2008 में जब कविता नायर ने अपनी बेटी साक्षी को खोया तो वह सदमे में थीं। वह समझ नहीं पा रही थीं आखिर उनकी बेटी ने जिंदगी से हार क्यों मान ली। कविता नायर देश की जानी-मानी आर्टिस्ट हैं, उनकी पेंटिंग्स को दुनियाभर की मशहूर गैलरी और पोर्टल्स पर जगह मिली है। उन्होंने शांति निकेतन से फाइन आर्ट्स में ग्रैजुएशन और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की।

दिन-रात मेहनत और संघर्ष कर उन्होंने अपने लिए कला की दुनिया में जगह बनाई, जो आज भी बरक़रार है। साक्षी उनकी इकलौती बेटी थी और वह भी अपनी माँ की ही तरह कला से जुडी हुई थी। लेकिन मात्र 23 साल की उम्र में साक्षी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

कविता बतातीं हैं, “पहले तो मैं हैरान थी कि हमारी बेटी कैसे ऐसा कदम उठा सकती है। लेकिन फिर मैंने सोचा कि आखिर क्यों हमारे बच्चों की ज़िंदगी में ऐसे पल आते हैं कि वह ऐसा कदम उठाएं। अगर मेरी बेटी ऐसा कर सकती है तो कला से जुड़े और न जाने कितने बच्चे होंगे जो इस अवसाद से गुजरते होंगे।”

 

 

साक्षी की मृत्यु के चौथे दिन ही कविता ने अपने पति पवन नायर के साथ मिलकर तय किया कि वो अपनी बेटी की याद में हर साल कला से जुड़े हुए छात्रों को स्कॉलरशिप देकर सपोर्ट करेंगे। यहीं से नींव रखी गई ‘कलासाक्षी मेमोरियल ट्रस्ट’ की। इस ट्रस्ट के ज़रिए कविता और उनकी टीम फाइन आर्ट्स के छात्रों को एक प्लेटफार्म देने का काम कर रही हैं।

पिछले 4 सालों से इस ट्रस्ट के साथ जुड़ी मनमीत वालिया बताती हैं कि ट्रस्ट के ज़रिए हर साल देश से लगभग 10 फाइन आर्ट्स के छात्रों को चुना जाता है। इन छात्रों के लिए दिल्ली में 4 दिन का प्रोग्राम आयोजित होता है जिसमें इन्हें मशहूर आर्टिस्ट से सीखने का मौका मिलता है और साथ ही, अपनी कला को प्रदर्शित करने का भी।

इस प्रोग्राम के अंत में कुछ बेहतरीन छात्रों को चुनकर, उन्हें स्कॉलरशिप भी दी जाती है। मनमीत कहती हैं कि इससे पीछे दो उद्देश्य हैं, एक तो कला को बढ़ावा देना और दूसरा, आज की युवा प्रतिभा को एक मंच देना, जिससे कि वह अपने काम को बाज़ार तक पहुंचा पाएं।

 

During one of the Workshops at Kala Sakshi

कला साक्षी के इस प्रोग्राम के लिए फाइन आर्ट्स के ऐसे छात्र अप्लाई कर सकते हैं जो अपनी ग्रैजुएशन के आखिरी साल में हैं या फिर मास्टर्स कर रहे हैं। इस दौरान ही छात्रों को सही मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के लिए एक राह की ज़रूरत होती है, जो उन्हें कलासाक्षी से मिलती है।

हर साल लगभग 300 छात्र अप्लाई करते हैं, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आर्टिस्ट की एक ज्यूरी बेहतरीन 10 छात्रों को चुनती है। इन छात्रों के आने-जाने और रहने-खाने का सभी खर्च कलासाक्षी ट्रस्ट उठाता है। पिछले 10-12 सालों में ट्रस्ट ने सैकड़ों बच्चों की मदद की है। कला साक्षी के बहुत से स्कॉलर आज अच्छी जगहों पर अपना नाम बना रहे हैं।

 

 

महामारी के मुश्किल वक़्त में भी कलासाक्षी ने देशभर से लगभग 140 आर्टिस्ट की मदद की है। इस बारे में मनमीत ने बताया, “कोविड-19 के चलते पूरे देश का बुरा हाल है। हर क्षेत्र में लोग आर्थिक तंगी झेल रहे हैं, ऐसे में जरा आप उन लोगों के बारे में सोचिये जो कला के सहारे अपना जीवन जी रहे हैं।एक तो कोविड और दूसरा, देश के कई इलाकों जैसे बंगाल में तूफ़ान का आना और कहीं पर बाढ़ आदि ने भी लोगों की स्थिति को बदतर कर दिया। हमें बहुत से आर्टिस्ट के बारे में पता चला जिनके पास इतने भी साधन नहीं कि वो अपने परिवार का खर्च चला पाएं। खासतौर पर ये वो छात्र हैं जो अपने फाइनल सेमेस्टर में थे और पढ़ाई पूरी करके प्रोफेशनल करियर शुरू करने वाले थे। लेकिन हालातों ने सबकुछ बदल दिया।”

इन आर्टिस्ट की मदद करने के लिए कलासाक्षी ने एक अनोखी पहल शुरू की। कलासाक्षी ने अपने प्लेटफोर्म के ज़रिए, इन आर्टिस्ट को स्पेस दिया जहाँ वे अपनी पेंटिंग्स डिस्प्ले कर सकते हैं। इन सभी पेंटिंग्स की मार्केटिंग कलासाक्षी ने की ताकि इन कलाकारों की मदद हो सके। हर एक आर्टिस्ट को अपने कोई भी दो बेहतरीन काम डिस्प्ले करने का मौका दिया गया। 140 आर्टिस्ट ने अपनी 197 पेंटिंग्स यहाँ बेचीं और कुल लगभग 8 लाख रुपये की बिक्री हुई।

 

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“लोगों को लगता है कि अगर कोई पेंटिंग वह 5 हज़ार रुपये की खरीद रहे हैं तो आर्टिस्ट को बहुत फायदा हो रहा होगा। लेकिन ऐसा नहीं है, उस पेंटिंग को बनाने की लागत के हिसाब से मूल्य तय होता है। इसके अलावा, जितनी कीमत किसी पेंटिंग की होती है, उसका लगभग 60% कूरियर आदि करने में भी खर्च होता है। अगर यह कूरियर आर्टिस्ट अपनी जेब से करे तो उसे कुछ भी नहीं बचेगा। वह अपने आगे के काम के लिए ज़रूरी मटेरियल भी नहीं खरीद पाएंगे,” कलासाक्षी से जुड़े दीपायन ने बताया, जो खुद एक आर्टिस्ट हैं।

इस बात को ध्यान में रखते हुए कलासाक्षी ने यह भी प्रबंध किया कि कूरियर के पैसे भी आर्टिस्ट को दिए जाएं। इसके लिए उन्होंने अपने दानकर्ताओं से बात की और उन्हें मदद मिली भी। इससे पेंटिंग्स की बिक्री का पूरा पैसा आर्टिस्ट को मिला। एक आर्टिस्ट, देबजीत पॉल कहते हैं कि कलासाक्षी के ज़रिए उन्होंने अपने जो आर्टवर्क बेचे, उस पैसे से उनका तीन महीने का खर्च चला और साथ ही, उन्हें अपनी कला को पूरी दुनिया को दिखाने का मौका मिला। इससे ज्यादा एक आर्टिस्ट को और क्या चाहिए कि एक जानी-मानी जगह पर उसकी कला को सम्मान मिल रहा है।

 

 

कभी सिर्फ कविता और उनके पति से शुरू हुए इस ट्रस्ट को आज बहुत से लोगों का साथ मिल रहा है। कला साक्षी के डोनर दिशा और अनुज बत्रा काफी समय से इस काम में मदद कर रहे हैं। उभरती कलाकार और कला साक्षी की स्कॉलर चेतना भी कई वर्षों से इस अभियान से जुडी हुई हैं और उनका योगदान सराहनीय है। 

ये सभी लोग आज के युवाओं के लिए एक ऐसे दुनिया बनाना चाहते हैं, जहाँ उनके सपनों की, उनके काम की कद्र हो। जहाँ एक बेहतर कल की आशा हो।

कविता का एक ही लक्ष्य है ‘आशा को जीवित रखना।’ उन्होंने शायद अपनी बेटी को इसीलिए खो दिया क्योंकि उनकी बेटी ने आशा का दामन खो दिया था। पर कविता को आज हर एक आर्ट स्टूडेंट में अपनी बेटी दिखाई पड़ती है और वह उनके जीवन को आशा से भरना चाहतीं हैं।

वह कहतीं हैं, “कलासाक्षी के माध्यम से हम दृश्य कला से जुड़े छात्रों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं कि वो अपने ऊपर भरोसा रखें, अपने टैलेंट को खोने न दें। जिस तरह हमारी बेटी ने गलत कदम उठाकर अपने जीवन को गंवा दिया, कोई और ऐसा न करे। हर माँ-बाप अपने बच्चों को प्रोत्साहित करते हैं लेकिन अगर यह प्रोत्साहन और उम्मीद बाहर से भी मिले तो उसका महत्व अलग हो जाता है। हमारी यह कोशिश महासागर में एक बूंद के बराबर है पर बूंद-बूंद से ही सागर भरता है।”

कलासाक्षी ने इस साल के लिए भी अपने प्रोग्राम की एप्लीकेशन शुरू कर दी है। यदि आप फाइन आर्ट्स फाइनल इयर या फिर मास्टर्स के छात्र हैं तो आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

 

Apply For The Workshop

इसके अलावा, इस बार कला साक्षी को इन छात्रों को सपोर्ट करने के लिए हमारी और आपकी मदद की बहुत ज़रूरत है। देश की उभरती कला प्रतिभाओं को एक मौका देना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। अगर मौकों के आभाव में कोई बच्चा निराशा से भर जाता है तो उस बच्चे की नहीं बल्कि हमारे समाज की असफलता होगी।

इसलिए आगे बढ़ें और इन युवा आर्टिस्ट को एक मौका देने में कलासाक्षी की मदद करें। आप आर्थिक तौर पर डोनेशन देकर कलासाक्षी की मदद कर सकते हैं या फिर किसी अन्य तरीके से आप योगदान देना चाहते हैं तो उन्हें 9891259087 पर फोन या फिर info@kalasakshi.org, kalasakshimemorialtrust@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं!

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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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