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TCS की जॉब छोड़ महिला ने शुरू किया ऑर्गनिक सब्जियों का बिज़नेस, 20 करोड़ पहुँचा टर्नओवर

पिता की आकस्मिक मृत्यु के बाद गीतांजलि के घर में आर्थिक तंगी तो हमेशा ही रही, लेकिन गीतांजलि की मेहनत ने आज उन्हें करोड़पति बना दिया।

यह कहानी है 39 वर्षीया गीतांजलि राजामणि की, जिन्होंने TCS की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर अपना खुद का आर्गेनिक सब्ज़ियों का बिज़नेस (Organic Veggies Business) शुरू किया और सफल भी हुईं।

पिता की आकस्मिक मृत्यु के बाद गीतांजलि की माँ ने उन्हें और उनके बड़े भाई को अकेले ही संभाला। आर्थिक तंगी तो हमेशा ही रही, लेकिन उनकी माँ ने उनकी ज़रूरतों को पूरा करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी, वह हमेशा ही अपनी क्षमता से अधिक उनके लिए करने की कोशिश करतीं। 

गीतांजलि राजामणि

गीतांजलि अपने बचपन को याद करते हुए बताती हैं, “वैसे तो हमारा परिवार केरल से है, लेकिन मेरा जन्म हैदराबाद में हुआ था। मेरा बचपन बाकी दक्षिण भारतीय परिवारों जैसा ही था, शिक्षा और अनुशासन को बहुत महत्त्व देने वाला। गर्मियों की छुट्टियों में हम अक्सर केरल में स्थित अपने पैतृक घर जाते थे, जहाँ खेतों और पहाड़ियों में घूमते हुए मैंने अपना आधा बचपन बिताया। पौधों के बारे में सीखना भी मैंने वहीं से शुरू कर दिया था।” 

गीतांजलि ने विज्ञान में स्नातक और अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन में एमबीए किया जिसके बाद क्लिनिकल रिसर्च इंडस्ट्री में 12 सालों तक उन्होंने काम किया। 

गीतांजलि ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के साथ काम किया था, जहाँ वह बतौर ग्लोबल बिज़नेस रिलेशनशिप मैनेजर के रूप में नियुक्त थीं। वहाँ वह एक प्रमुख फार्मा कंपनी का बड़े पैमाने पर हो रहे संचालन का प्रबंधन कर रही थीं। गीतांजलि अपने कॉरपोरेट जॉब को छोड़ने और स्टार्टअप को शुरू करने के सफ़र के बारे में बताती हैं, “टीसीएस में मेरी नौकरी ने मुझे इंटरप्रेन्योरशिप और उससे जुड़ी काफ़ी चीज़ें जैसे कि लाभ-हानि, सेल्स, हायरिंग, संचालन आदि सिखाया। मुझे लगा कि मुझे अपनी कंपनी शुरू करने के ख़्याल के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और चूँकि ऑर्गनिक फार्मिंग/ गार्डनिंग में मेरी रूचि काफ़ी थी, मुझे इससे बेहतर और कोई विकल्प नहीं लगा। मेरे पति और मेरा परिवार काफ़ी सपोर्टिव थे जिसके कारण मुझे जॉब से बिज़नेस में आने में काफ़ी मदद मिली। 

फार्मिज़न शुरू करने का सफ़र 

किसानों द्वारा उगाई गयी सब्जियों के साथ गीतांजलि

वक़्त के साथ हम सभी का भोजन करने का तरीका हो या फिर दिनचर्या सबकुछ बदल रहा है। जंक के नाम पर आधी से ज़्यादा खाने की चीज़ें दरअसल हमारे शरीर के लिए किसी ज़हर से कम नहीं। ऑर्गनिक के नाम पर भी हम जो खाते हैं, उनमे से ज़्यादातर चीज़ें या तो पूर्ण रूप से आर्गेनिक नहीं होती या फिर बाज़ार में उनके सही मोल का अंदाज़ा नहीं लग पाता और हममें से अधिकांश लोग जानते हैं कि इसका प्रत्यक्ष परिणाम कैंसर जैसी कई बीमारियों की बढ़त है। 

गीतांजलि आगे कहती हैं, “2017 में दो को-फाउंडर्स, शमीक चक्रवर्ती (सीईओ) और सुदाकरन बालसुब्रमियन (सीटीओ) के साथ मिल कर, मैंने बतौर सीओओ फार्मिज़न की स्थापना की थी। जब हम ख़ुद के उपयोग के लिए जैविक सब्जियों को उगाने के तरीके पर रिसर्च कर रहे थे तो हमें यह ख़्याल आया कि यह बिज़नेस मॉडल बहुत से लोगों को पसंद आएगा और उपभोक्ताओं और किसानों दोनों की मदद करेगा। इसलिए आख़िरकार हमने इस पर काम करने का सोचा। 

फ़ार्मिज़न के साथ एक बदलाव लाने की कोशिश

Organic Veggies Business
फार्मिजन के प्रोडक्ट

फ़ार्मिज़न ने मिनी फ़ार्म रेंटलमॉडल के साथ शुरुआत की जहाँ ऐप के ज़रिए कोई भी व्यक्ति अपने नज़दीकी खेत में 600 स्क्वायर फुट का एक मिनी फ़ार्म हर माह मात्र 2500 रूपये में किराए पर ले सकता है। ग्राहक ऐप के माध्यम से यह भी चुन सकते हैं कि वे कौन सी सब्ज़ियाँ उगाना चाहते हैं। फ़ार्मिज़न के साथ ही जुड़ा कोई किसान उनके लिए सब्ज़ियाँ उगाता है और साथ ही ऐप पर उनकी स्थिति, चित्र आदि को अपडेट करता है। किसानों द्वारा उगायी सब्ज़ियाँ ग्राहकों को साप्ताहिक तौर पर डिलीवर कर दी जाती हैं। इसके अलावा ग्राहक और उनका परिवार किसी भी समय अपने मिनी फार्म को देखने और उस पर काम करने जा सकते हैं। 

इस मॉडल में फ़ार्मिज़न किसानों के साथ पार्टनरशिप करके रेवेन्यू की हिस्सेदारी करता है। उनकी ज़मीनों को रेंट या लीज पर ना लेकर उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने की आज़ादी देता है और साथ ही उन्हें बीज, पौधे, जैविक उर्वरक आदि जैसे कृषि इनपुट प्रदान करता है। इसके अलावा फ़ार्मिज़न ऐप के प्रबंधन, ग्राहकों की संख्या बढ़ाने और उनके घरों तक उपज की होम डिलीवरी करने का भी ध्यान रखता हैं। 

इन्हीं खेतों में लोग मासिक किराये पर खेती करवा सकते हैं

अब हम अपने किसान नेटवर्क के माध्यम से जैविक और प्राकृतिक उपज (फल, सब्ज़ियाँ और स्टेपल) भी तैयार करते हैं और अपने ऐप में बने एक कैटलॉग आधारित ऑर्डरिंग सिस्टम के माध्यम से उन्हें बेचते और होम डिलीवरी भी करते हैं। इसके साथ ही हम ग्राहकों के साथ पूरी पारदर्शिता भी रखते हैं, यानी वे जानते हैं कि उनके द्वारा ऑर्डर किए उत्पाद किस किसान से आ रहे हैं और उनके खेत का जीपीएस लोकेशन क्या हैं। साथ ही उनके पास फार्म के दौरे लगाने के भी ऑप्शन होते हैं,” गीतांजलि फ़ार्मिज़न के बिज़नेस मॉडल को समझाते हुए कहती हैं। 

किसानों की वर्तमान स्थिति को लेकर वह आगे कहती हैं, “हमारे किसान संकट में हैं। उत्पादन, वितरण, वित्तपोषण की अक्षमतायें और कम आय ने किसानों के लिए अनुमानित रूप से मजदूरी अर्जित करना असंभव सा बना दिया है। नतीजतन, उन्हें अधिक से अधिक रसायनों के उपयोग करने का सहारा लेना पड़ रहा हैं।” 

ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग करने वालों के लिए मुख्य चुनौती यह है कि उनके ग्राहक अक्सर सब्जियों के आकार, रूप-रंग को उनके पोषक तत्व और गुण से ज़्यादा महत्त्व देते हैं। एक उपभोक्ता के रूप में हम किसानों को यह एहसास कराते हैं कि जो दिखता हैं, वह बिकता हैं।उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण कारक किसानों की उपज का दिखना होता है फिर भले ही वह सेहत के लिए लाभकारी हो या न हो। नतीजतन, यह किसानों के लिए ग़लत प्रोत्साहन स्थापित करता है और वे तेज़ उत्पादन करने के लिए उर्वरकों के ओवरडोज का उपयोग करना शुरू कर देते हैं। 

जब मैंने गीतांजलि से उनके अतीत के किसी पछतावे के बारे में पूछा तो वह कहती हैं, “बेशक, जब मैं पीछे देखती हूँ तो मुझे लगता हैं कि ऐसी कई चीजें हैं जो मुझे कर लेनी चाहिए थी या कुछ जो शायद नहीं करना सही होता। कुछ निर्णय जो मैंने लिए और कुछ जो नहीं लेने थे। मैं ऐसे कई बातों का विश्लेषण करती हूँ और मुझे लगता हैं कि यह केवल आपके वर्तमान और भविष्य के फैसले को बेहतर बनाता है। मेरा मानना हैं कि अतीत को केवल भविष्य बेहतर बनाने के लिए देखना चाहिए और न कि अफ़सोस जताने के लिए।” 

Organic Veggies Business
कंपनी के लिए काम करते किसान

अपनी ज़िंदगी की एक यादगार घटना बताती हैं जब वह हिमालय के एक शिखर पर चढ़ाई के लिए गई थीं। रात के 2 बजे घने अंधेरे के बीच उनकी टीम ने 15,000 फीट की चढ़ाई शुरू की। एक छोर पर काले घने बादलों का ढेर था तो दूसरी तरफ़ तापमान शून्य से 15 डिग्री नीचे और ज़मीन पर 18 फीट से भी अधिक ऊँची बर्फ थी।

गातांजलि बताती हैं, “हम 20+ ट्रेकर्स की एक छोटी-सी टीम थी और हम हमारे हेडलैम्प्स के साथ हिमालय की ओर बढ़ रहे थे। गर्म कपड़ों, भारी जूतों और बैगपैक के साथ उस ऊँचाई पर चलना काफ़ी मुश्किल था। अंदर से बार-बार हार मान लेने की आवाज़ आ रही थी लेकिन हम सब फिर भी चलते रहे। हमारे ट्रैक लीडर कहते हैं, एक समय में सिर्फ़ एक क़दम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए न कि पूरी चढ़ाई पर। इससे चढ़ाई थोड़ी आसान लगने लगती है और इससे पहले कि आपको एहसास हो, आप पहाड़ के टॉप पर होते हो,” गीतांजलि बताती हैं। 

बिज़नेस शुरू करना भी कुछ ऐसी ही फीलिंग देता है। अंतिम लक्ष्य लगभग असंभव लगता है और मन हार मान लेने को राज़ी हो जाता है। लेकिन आपको रुकना नहीं है। हर एक दिन थोड़ा काम करें। छोटी जीत का जश्न मनाएं और असफलताओं से निराश न हो जाएं। जिस दिन आप अपनी पहली सफलता को गले लगाएंगे, उस दिन से आपको यह पूरा सफ़र बेहद ही सुंदर लगने लगेगा,” वह आगे कहती हैं। 

वैसे बात तो सही है! हमारे जीवन के गहरे सबक ज़्यादातर हमें दिन-प्रतिदिन के कामकाज या यात्राओं के दौरान ही मिलते हैं। स्कूल-कॉलेज में तो बस डिग्री और ऑफिस में प्रोमोशन मिल जाते हैं। 

फ़ार्मिज़न की भविष्य की योजनाएँ सामुदायिक खरीद की अवधारणा को मज़बूत करने, अधिक शहरों में लॉन्च करने और जैविक/ प्राकृतिक खेती की वास्तविक प्रक्रिया को अधिक बढ़ावा देने की हैं। 

अन्य इच्छुक किसानों को सलाह

अन्य किसानों को गीतांजलि का संदेश है कि जैविक और प्राकृतिक खेती के तरीकों पर और अधिक शोध करें, अपनी मिट्टी को रसायन से बचाएं। वह कहती हैं कि हमारी मिट्टी दुनिया की बेहतरीन मिट्टियों में से एक है पर दुर्भाग्यवश यह तेजी से बिगड़ रही है। 

वह कहती हैं, “मैं हमेशा से सुनती आयी हूँ कि पौधों को नहीं बल्कि मिट्टी को पोषण देना चाहिए। यदि मिट्टी समृद्ध, उपजाऊ और जीवन से भरपूर होगी, तो उसमे उगने वाली फसलें भी स्वस्थ और कीटों से मुक्त होंगी। हमें अपनी मिट्टी को पुनर्जीवित करने की ज़रूरत हैं। उसे आर्गेनिक कार्बन, पोषक तत्व, रोगाणु आदि से भरने की ज़रूरत है जो उसकी दशा, उसके स्वास्थ्य को बेहतर बना सके। उनका मानना है कि किसानों को खेती के बेहतर तकनीक, जैसे कि कम्पैनियन प्लांटिंग, मल्टी क्रॉपिंग, क्रॉप रोटेशन आदि, भी अपनाने की ज़रूरत हैं जो मिट्टी के अनुकूल हो। 

अन्य महिला उद्यमियों को संदेश

Organic Veggies Business
Prepare, Persevere, & Prevail के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहीं गीतांजलि

यह संदेश उनका केवल महिला उद्यमी के लिए ही नहीं बल्कि बाकि उद्यमियों के लिए भी हैं। तीन बातें हमेशा याद रखें – तैयारी, दृढ़ता और प्रबलता [Prepare, Persevere, & Prevail

तैयारी: आप जिस व्यवसाय को लॉन्च करना चाहते हैं, उसके लिए अच्छे से ग्राउंडवर्क करें। बाज़ार का अध्ययन, आवश्यक निवेश, 5 साल की व्यवसाय योजना, सब पर ध्यान दें। 

दृढ़ता: अपनी पहली असफलता मिलने पर हार ना माने, दृढ़ता के साथ एक-एक क़दम बढ़ाएं (हिमालय की चोटी ऊँची हैं लेकिन उतनी ही खूबसूरत भी)। 

प्रबलता: एक बार जब आप अपने लक्ष्य तक पहुँच जाएं, तब प्रबल बनें, हर दिन कुछ नया करें, नया सीखें और सिखायें। ख़ुद को लगातार चुनौती देते रहें। 

फ़ार्मिज़न जनवरी 2017 में शुरू हुई थी जो आज 16000+ ग्राहकों की पसंदीदा हैं। सालाना 20 करोड़ के टर्नओवर के साथ लॉकडाउन में भी यह तेज़ी से बढ़ रही हैं। गीतांजलि का मानना हैं कि इस आपदा के बीच लोगों ने महसूस किया कि आर्गेनिक और प्राकृतिक खाने की क्या क़ीमत होती हैं। दरअसल एप के माध्यम से पारदर्शिता और होम डिलीवरी भी उपलब्ध है, लोगों का भरोसा उनपर ख़ुद ही बढ़ता जा रहा हैं। 

गीतांजलि राजामणि एक उदाहरण हैं जो हमें रिस्क लेना और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती हैं। उनके स्टार्टअप फ़ार्मिज़न के बारे में आप उसके फ़ेसबुक, वेबसाइट या एप द्वारा और जान सकते हैं। गीतांजलि से आप उनके फ़ेसबुक या लिंक्डइन पर जुड़ सकते हैं।

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