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दो वक़्त के खाने से लेकर राशन तक, बिहार की यह युवा टोली सुनती है ज़रूरतमंदों की बोली

फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई कर रहीं बिहार के छपरा जिले की मनस्वी ने इस नेक काम का बीड़ा उठाया है और उनका परिवार भी उनके इस काम में सहयोग दे रहा है।

आज देश कोरोना संकटकाल से गुजर रहा है। इस भयावह बीमारी के साथ-साथ भुखमरी भी देखने को मिल रही है। दरअसल ऐसे लोग जिनका रोजगार प्रभावित हुआ है, उन्हें सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इस कठिन वक्त में देश भर में ऐसे कई लोग और संगठन सामने आए हैं, जिन्होंने दिल खोलकर जरूरमंदों की सेवा की।

ऐसी ही एक कहानी बिहार की है। बिहार इन दिनों जहाँ एक ओर कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है, वहीं दूसरी और बाढ़ ने भी राज्य के अलग-अलग इलाकों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।

ऐसे कठिन वक्त में युवाओं की एक टीम बिहार में अपने स्तर पर जरूरतमंदों को पिछले 13 अप्रैल से दो वक्त भोजन उपलब्ध करवा रही है। राज्य के छपरा जिले की मनस्वी ने इस नेक काम का बीड़ा उठाया है। मनस्वी के घर वाले घर में भोजन बनाते हैं तो वहीं उनके दोस्त इस मदद को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

जरुरतमंदो को फ़ूड पैकेट्स वितरण करती मनस्वी


कैसे आया मदद करने का ख्याल ?

छपरा के सलेमपुर निवासी और नोएडा में फैशन डिजाइनिंग की छात्रा मनस्‍वी छुट्टियों में अपने घर वापस आई हुई थीं। लॉकडाउन की वजह से मनस्वी अपने घर पर थी और मीडिया में दिन-रात इन मजदूरों की व्यथा को देखती सुनती थी।

मनस्वी ने द बेटर इंडिया को बताया, “मैंने सबसे पहले 13 अप्रैल को घर वालों के साथ मिलकर छपरा के राजेंद्र स्टेडियम के पास बस्ती में भोजन का वितरण किया था। जरूरमंदों को भोजन करवाते वक़्त लगा कि कोरोना महज बीमारी नहीं बल्कि यह मानव समाज के सामने सबसे बड़ी आपदा है। इसके बाद ही हम सबने तय किया कि अब नियमित रूप से जरुरतमंदों को भोजन करवाएंगे और हर संभव कोशिश करेंगे कि कोई भी भूखा न सोए।”

परिवार और दोस्तों का मिला सहयोग

youngsters from bihar
मनस्वी के घर के सदस्य खाना बनाते हुए 01

मनस्वी कहती है कि इस मुहिम को अनवरत रूप से जारी रखने में उनके परिवार वालों का सबसे अधिक योगदान है। उन्होंने कहा, “मेरे परिवार के सभी सदस्य और दोस्तों ने हर संभव मदद की है। एक दिन भोजन करवाना आसान था लेकिन इस मुहिम को अनवरत रूप से जारी रखने के लिए दोस्तों ने प्लानिंग, फंडिंग और हर एक काम में भरपूर सहयोग किया और मनोबल भी बढ़ाया। सब एक दूसरे के साथ मिलकर रोज़ काम करते थे जिसका परिणाम यह हुआ कि हम जरूरतमंदों तक पहुंच पाए। मेरे दोस्त  शिब्बू, आर्यन सिंह ,पार्थ सिंह, रोहित गुहा, प्रफुल्‍ल सिंह आदि ने छोटे से लेकर बड़े काम में सहयोग किया वही परिवार में माँ, चाची और घर। इस पूरी मुहीम का नाम हमने उद्भव उपक्रम रखा है।”

उद्भव उपक्रम के माध्यम से अब तक 4000 से ज़्यादा जरुरतमंदों तक राहत पहुंचाई गई है। सभी फ़ूड पैकेट्स और राशन पैकेट्स को छपरा के बस स्टैंड, राजेंद्र सरोवर,गायत्री मंदिर, राजेंद्र स्टेडियम आदि स्थानों में बांटा गया है।

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दुबई से पहुंची मदद

आर्यन (दायें) व पार्थ(बायें )

समस्तीपुर के पार्थ दुबई में पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब इस मुहिम के बारे में पता चला तो उन्होंने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। पार्थ ने द बेटर इंडिया को बताया “एक दिन मनस्वी से कोरोना के विषय पर फ़ोन पर चर्चा हो रही थी। इसी बीच उसने जरुरतमंदों को भोजन करवाने की बात कही। हम सभी ने मिलकर तैयारी शुरू कर दी। ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक मदद पहुंचा सके इसके लिए मैंने और मित्र रोहित गुहा ने फेसबुक और इंस्टाग्राम में भी पेज बना लिया ताकि हम फण्ड जुटा सकें और अपने अच्छे कामों से लोगों को प्रेरित भी कर सकें। सोशल मीडिया के माध्यम से कई नेक दिल लोगों ने हमारी मदद की।”


जारी रहेगी सेवा

youngsters from bihar
जरुरतमंदो को वितरण हेतु राशन सामग्री

उद्भव उपक्रम टीम के सदस्यों ने बताया की कोरोना के कारण रोज एक नई समस्या और चुनौती देखने को मिल रही है। इस विषम परिस्थिति को देखते हुए टीम ने तय किया है कि आगे भी जरुरतमंदों की मदद करते रहेंगे।

मनस्वी कहती हैं कि आगे भी जरूरमंदों के लिए काम करती रहेंगी। उन्होंने कहा, “हमारी टीम नियमति रूप से प्लानिंग कर रही है और सही स्थान चयन कर जरुरतमंदों तक पहुंच रही है। इसके लिए हमने एक व्हाट्सएप नंबर 9631882524 भी जारी किया है। हम युवा साथी अपने सामर्थ्य अनुसार हर संभव मदद कर रहे हैं।”

द बेटर इंडिया बिहार के इन युवाओं के जज्बे को सलाम करता है।

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Written by जिनेन्द्र पारख

जिनेन्द्र पारख ने हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, रायपुर से वकालत की पढ़ाई की है। जिनेन्द्र, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव शहर से आते है। इनकी रुचियों में शुमार हैं- समकालीन विषयों को पढ़ना, विश्लेषण लिखना, इतिहास पढ़ना और जीवन के हर हिस्से को सकारात्मक रूप से देखना।

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