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बांस की खेती के लिए सरकार ने शुरू की सब्सिडी, किसानों को मुफ्त में मिलेंगे बांस के पौधे

ये पौधे कहाँ और कैसे मिलेंगे इसकी पूरी जानकारी पढ़िए इस लेख में।

कुछ दिनों पहले त्रिपुरा प्रशासन द्वारा बनाई गईं बांस की बोतलों की पोस्ट काफी वायरल हुई थी और मणिपुर के एक उद्यमी द्वारा बनाया गया बांस का टिफ़िन बॉक्स तो सोशल मीडिया पर आजतक छाया हुआ है। हमारी दैनिक ज़िंदगी में इस्तेमाल होने वाली बहुत-सी चीजें हैं जिन्हें बांस से बनाया जा सकता है।

बांस प्रकृति का ऐसा वरदान है जिसका उपयोग छोटी से छोटी चीज़ से लेकर घरों के निर्माण तक में भी हो सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से इको-फ्रेंडली है और इसकी खेती करना भी आसान और किफायती है। हालांकि, पहले बांस की खेती सिर्फ जंगलों तक सीमित थी। किसान इसे अपने खेतों में नहीं उगा सकते थे। लेकिन दूसरे देशों में बढ़ते बांस के अच्छे उपयोग को देखते हुए सरकार ने यह प्रतिबंध हटा दिया और बांस को सामान्य घास की केटेगरी में कर दिया। अब कोई भी बांस उगा सकता है।

Bamboo Farming (Source)

बांस का उपयोग बल्ली, सीढ़ी, टोकरी,चटाई टोकरी, बांस से बनी बोतल, फर्नीचर, खिलौने, कृषि यंत्र बनाने सहित अन्य साज-सज्जा का समान बनने के लिए किया जाता है। इसके अलावा कागज बनाने में इसका उपयोग होता है। अब तो घरों को आधुनिक लुक देने में भी बांस का प्रयोग किया जाने लगा है। इसके अलावा कहीं-कहीं इससे अचार भी बनाया जाता है।

बांस की 100 से भी ज्यादा प्रजातियाँ हैं। सबकी अपनी विशेषताएं हैं, जैसे किसी से फर्नीचर आदि बनता है तो किसी का उपयोग भवन निर्माण में होता है। इसलिए खेती करने से पहले आप तय कर लें कि आप किस उद्यम में आगे बढ़ना चाहते हैं और उसी हिसाब से बांस की प्रजाति का चयन करें।

किसान अपनी दूसरी फसलों के साथ भी बांस की मिश्रित खेती कर सकते हैं या फिर आप अपने खेत के चारों ओर मेढ़ों पर इसे लगा सकते हैं। एक बांस का पेड़ आपको 30-40 वर्षों तक बांस देगा।

बांस के इन सभी गुणों को देखते हुए ही सरकार ने देश में इसे बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय बांस मिशन की शुरुआत की है। सरकार किसानों को बांस की खेती और इससे संबंधित उद्यम शुरू करने के लिए सब्सिडी दे रही है।

मिशन के अंतर्गत हर राज्य में मिशन डायरेक्टर बनाए गए हैं और हर जिले में नोडल अधिकारी तैनात हुए हैं। इनका काम किसानों को योजना की पूरी जानकारी देना है। बांस की खेती और इसके उद्यम को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एग्रीकल्चर, फॉरेस्ट और इंडस्ट्री तीनों विभागों को शामिल किया है।

बांस की खेती के लिए क्या-क्या मिलेगी सहायता:

*बांस की खेती के लिए सरकार की ओर से सरकारी नर्सरी से फ्री में पौधा उपलब्ध कराया जाएगा।

*तीन साल में औसतन 240 रुपए प्रति प्लांट की लागत आएगी। इसमें से 120 रुपए प्रति प्लांट सरकार की ओर से दिए जाएंगे।

*उत्तरी-पूर्वी राज्यों को छोडक़र अन्य क्षेत्रों में इसकी खेती के लिए 50 फीसदी सरकार और 50 फीसदी किसान लगाएगा। 50 फीसदी सरकारी शेयर में 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य की हिस्सेदारी होगी।

*उत्तरी-पूर्वी राज्यों में 60 फीसदी सरकार और 40 फीसदी किसान लगाएगा। 60 फीसदी सरकारी पैसे में 90 फीसदी केंद्र और 10 फीसदी राज्य सरकार का शेयर होगा।

अगर आप भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत अपना रजिस्ट्रेशन करना चाहते हैं तो फॉलो करें यह प्रक्रिया:

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1. सबसे पहले आप मिशन की आधिकारिक वेबसाइट https://nbm.nic.in/ पर जाएं।

2. जैसे ही आप वेबसाइट पर जाएंगे आपको सबसे ऊपर में Farmer Registration का एक लिंक दिखेगा- https://nmsa.gov.in/frmNBMFarmerRegistration.aspx

3. आपको Farmer Registration के लिंक पर क्लिक करना है जैसे ही आप क्लिक करेंगे आपके सामने रजिस्ट्रेशन पेज खुल कर आ जाएगा जैसा नीचे दिखाया गया है।

4. रजिस्ट्रेशन फॉर्म में आपको अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी सबसे पहले अपने राज्य का चयन, उसके बाद अपने जिला का चयन, और तहसील का चयन करने के बाद आपको अपने गाँव का चयन करना होगा। अब आपको फाइनेंसियल ईयर की जानकारी दर्ज करनी होगी। फिर किसान का नाम दर्ज कर बाकी जानकारी भरनी है।

5. नीचे की तरफ साइड में आप देखंगे कि एक कॉलम के सामने पूछा गया है कि क्या आपका आधार कार्ड बैंक अकाउंट से लिंक है, यदि हाँ तो इस कॉलम पर टिक करें।

6. सभी जानकारी अच्छे से भरने के बाद आप फॉर्म सबमिट कर दें और आपका इस मिशन के तहत रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।

इस बारे में अधिक जानकारी आप अपने राज्य के नोडल अधिकारी से हासिल कर सकते हैं। अपने राज्य के अधिकारियों के नाम और संपर्क सूत्र देखने के लिए यहाँ क्लिक करें- https://www.nbm.nic.in/StateContacts.aspx

आज ही राष्ट्रीय बांस मिशन की वेबसाइट पर जाकर सभी जानकारी प्राप्त करें और अप्लाई करें!


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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