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78 वर्षीय पूर्व सेना अधिकारी का फिटनेस मंत्र, बंजर ज़मीन को बना डाला  400 पेड़ों का बगीचा

78 वर्षीय पूर्व सेना अधिकारी का फिटनेस मंत्र, बंजर ज़मीन को बना डाला 400 पेड़ों का बगीचा

कैप्टन जिंदू राम बिना किसी व्यक्ति की मदद के इस 5 बीघे के बगीचे को अकेले संभाल रहे हैं।

जिंदगी के 78 बसंत पूरा करने के बाद जहाँ ज्यादातर लोग आराम की जिंदगी जी रहे होते हैं, वहीं हिमाचल के कैप्टन जिंदू राम, उम्र के इस पड़ाव में लोगों को फिट और स्वस्थ रहने का संदेश दे रहे हैं। हिमाचल के बिलासपुर जिले के कंदरौर गांव के कैप्टन जिंदू राम ने 78 साल की उम्र में बंजर और बिना पानी वाली भूमि में बागवानी का मॉडल तैयार किया है।

सेना में 27 साल तक सेवा देने के बाद कैप्टन पद से रिटायर होने वाले जिंदू राम ने द बेटर इंडिया को बताया कि वह बुजुर्गों को स्वस्थ रहने और बेकार की घरेलू कलह से दूर रखने के लिए प्रेरित करते रहते थे लेकिन लोग उन्हें खुद कुछ करके दिखाने के ताने मारते रहते थे। उन्होंने कहा कि इसलिए उन्होंने उम्र के इस पड़ाव में अपने परिवार वालों के विरोध के बावजूद अपनी बंजर पड़ी भूमि में मेहनत से एक बगीचा तैयार करने का फैसला लिया और लगातार तीन सालों की मेहनत के बाद अब उनकी मेहनत रंग दिखाने लगी है।

वह कहते हैं, “लोगों को कभी भी अपनी उम्र के बारे में नहीं सोचना चाहिए, जो करना है उसे शुरू कर देना चाहिए, भले ही लोग कुछ भी कहें हमें अपने तन के साथ मन को स्वस्थ रखने के लिए अपने लिए कुछ लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।“

78 year old
कैप्टेन जिन्दू राम

सुबह 5 से शाम 5 बजे तक रहते हैं बगीचे में

कैप्टन जिंदू राम ने बताया कि वह दिन भर बगीचे में ही रहते हैं, जहां वह मक्का, अरबी, खीरा आदि उगाते हैं। उन्होंने अपनी बंजर भूमि को अकेले साफ किया और फिर बागवानी और कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह लेकर पौधे लगाना शुरू किया। वह बताते हैं कि उन्होंने अपने बगीचे में 10 अलग-अलग किस्म के फलों के 400 पौधे लगाए हैं। जिनमें अनार के 150 पौधे, कीवी के 4 पौधे, गलगल के पौधे, नींबू के 35 पौधे, मौसमी के 60 पौधे, सेब, कटहल, आम, अखरोट, बादाम, खुमानी, पलम और आडू के पौधे तैयार किए हैं।

वह कहते हैं, “मैं इन पौधों में किसी भी प्रकार के कीटनाशक या रसायनों को प्रयोग नहीं करता हूँ। पौधों को सही से सभी जरूरी पोषक तत्व मिल सके इसके लिए प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने वाली प्राकृतिक खेती विधि का ही प्रयोग करता हूँ।”

पौधों के आसपास दालें उगाई ताकि उन्हें मिल सके पोषक तत्व

पौधों और फसलों को नाइट्रोजन सहित अन्य पोषक तत्व मिल सके इसके लिए जिंदु राम मिश्रित खेती करते हैं, ताकि एक पौधा दूसरे पौधे को जरूरी पोषक तत्व मिल सके। उन्होंने बताया कि फलों के पौधों के चारों तरफ दलहनी फसलें लगाई हैं ताकि वो पौधे को नाइट्रोजन उपलब्ध करवा सके। इसके अलावा पौधों के चारों तरफ लहसून और गैंदा भी लगाते हैं ताकि पौधों को बीमारियों से बचाया जा सके।

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जिन्दू राम ने अपने बगीचे में कई फलदार पेड़-पौधे लगाये हैं।

किसान के उत्साह के सभी कायल

बिलासपुर जिले के कृषि विभाग के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. रवि कुमार शर्मा बताते हैं, कैप्टन जिंदू राम मेहनती किसान हैं। वह बिना किसी व्यक्ति की मदद के 5 बीघे के बगीचे को अकेले ही संभाल रहे हैं और इस क्षेत्र के बहुत से किसानों को उनसे प्रेरणा मिली है।”

परिवारवालों का विरोध भी नहीं रोक पाया

जिंदू राम बताते हैं कि उनके परिवार में उनकी दो बहुएं और दो बेटे हैं जो उनके काम करने से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि जब घर में सबकुछ मौजूद है तो क्यों खेतों में काम करना। इस पर जिंदू राम का कहना है कि वह अपने घरवालों और गांववालों के सामने एक उदाहरण पेश करना चाहते हैं कि उम्र से कुछ नहीं होता है केवल हौसला पक्का होना चाहिए और हर आदमी को फिट रहना चाहिए।

जिन्दू राम की मेहनत के फल

कैप्टन जिंदू राम लोगों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी वह न सिर्फ खुद बिना रसायनों के प्राकृतिक खेती विधि से बगीचे को संभाल रहे हैं, बल्कि अपने घर में देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से बनी दवाइयों का प्रयोग कर रहे हैं। इसके अलावा अपने साथ आस-पास के 40 अन्य किसानों को भी जहरमुक्त खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

यदि आप भी कैप्टन जिंदू राम के उत्साह और हौसले से प्रेरणा पा रहे हैं तो आप उनसे 9805225533 पर संपर्क कर सकते हैं।

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रोहित पराशर

पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, सक्सेस स्टोरी, यात्रा वृतांत और जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण के बारे में लिखने के शौकिन रोहित पराशर हिमाचल से हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से मास्टर इन मास कम्यूनिकेशन करने के बाद पिछले एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुडे़ हुए हैं। देश के प्रतिष्ठित समाचारपत्र दैनिक भास्कर और पर्यावरण के क्षेत्र की बेहतरिन मैग्जीन डाउन टू अर्थ में सक्रीय रूप से लिखते हैं। लोगों से उनके अनुभवों के बारे में बाते करने का शौक रखते हैं और पहाड़ों से खासा लगाव रखते हैं।
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