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7 दिन लगातार जुटकर खुद घर में बनाया सोक पिट, ताकि मोहल्ले में किसीको न हो पानी की कमी

2019 में उन्होंने अपने घर के बाथरूम और किचन को भी इस सोक पिट पाइप के द्वारा जोड़ दिया ताकि इन जगहों पर जो अतिरिक्त पानी बेकार हो जाता है वह पन सोखा में चला जाए जिससे वाटर लेवल बना रहे।

जल संकट आज एक राष्ट्रीय नहीं  बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समस्या हो गई है। जिस तरह पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है, आने वाले कल के लिए एक चेतावनी है। यदि हमने उचित जल प्रबंधन नहीं किया तो भविष्य में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। बिहार के राहुल रोहिताश्व जल संकट से निपटने के लिए अपने घर में बूंद-बूंद पानी का संरक्षण कर रहे हैं।

राहुल भारतीय खाद्य निगम के भागलपुर मंडल कार्यालय में तकनीकि सहायक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होनें आज रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संग्रहण) को एक नए रूप में अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि हर साल बारिश के मौसम में वर्षा जल बेकार ही बर्बाद हो जाता था। ऐसे में,  इसके संरक्षण के लिए उन्होंने अपने घर में सोक पिट (पन सोखा) का निर्माण कराया।

Rain water harvesting
राहुल द्वारा बनाया गया सोकपिट

इसके लिए उन्होंने अपने घर में 6 फीट लंबा, 6 फीट चौड़ा तथा 6 फीट गहरा एक टैंक खुदवाया। इस टैंक को चारों तरफ से ईंट से छिद्रदार सोलिंग करवाई ताकि जल का अवशोषण उचित ढंग से हो सके। फिर इस टैंक को प्लास्टिक की मोटी 6 इंच की पाइप से अपने छत से जोड़ दिया ताकि बारिश के समय अतिरिक्त जल पाइप के द्वारा सीधे टैंक में चला जाए और उसकी बर्बादी न हो सके।

टैंक में उन्होंने एक निकासी द्वार भी बनवाया और उसे पाइप के द्वारा अपने घर के पीछे बगीचे में खुलवाया है ताकि यदि कभी टैंक ओवरफ्लो हो जाए तो भी अतिरिक्त पानी की बर्बादी ना हो सके। इस टैंक को उन्होंने बड़ी गिट्टी, महीन गिट्टी, ईंट की चूर्ण और बजरी से लगभग 6 इंच तक भरवा दिया, ताकि वर्षा जल का अवशोषण उचित ढंग से हो सके। फिर अंत में उन्होंने इस टैंक को सीमेंट से निर्मित स्लैब से ढक दिया ताकि इसमें गंदगी ना जा पाए और इसकी समुचित सुरक्षा भी हो सके।

राहुल के अनुसार इस सोक पिट या पन सोखा को बनवाने में उन्हें लगभग 8 हजार रुपयों की लागत आई और इसे 7 दिनों में सकुशल पूरा कर लिया गया। उनके अनुसार यदि किसी के भी पास अतिरिक्त जगह हो तो वह इस पन सोखा का निर्माण कर जल का उचित प्रबंधन कर सकता है।

Rain water harvesting
सोक पिट में छत से सीधा बारिश का पानी आता है

राहुल ने बताया कि 1994 में उन्हें पानी की समस्या से जूझना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने पानी के संरक्षण के लिए पहल शुरू की। धीरे-धीरे आज ऐसी स्थिति हो गई है कि 120 फीट में ही बोरिंग का पानी मिल रहा है। शहर में आज के दौर में समर्सिबल का कल्चर जोरों पर है, ऐसे समय में उन्हें कभी भी इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई है। 2019 में उन्होंने अपने घर के बाथरूम और किचन को भी इस सोक पिट पाइप के द्वारा जोड़ दिया ताकि इन जगहों पर जो अतिरिक्त पानी बेकार हो जाता है वह पन सोखा में चला जाए जिससे वाटर लेवल बना रहे।

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इस सोक पिट या पन सोखा के निर्माण से न सिर्फ उन्हें फायदा हो रहा है, बल्कि आस पास के लोगों को भी इससे पानी की समस्या से निजात मिल रही है। राहुल की इस पहल की भागलपुर के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. हर्षवर्धन भी तारीफ करते हैं। उन्होंने लोगों से इसे अपनाने की अपील करते हुए कहा कि अगर हमने जल संरक्षण में देरी की तो आने वाले समय में लोगों को काफी किल्लत झेलनी होगी। वहीं, पर्यावरणविद विजय वर्धन और स्थानीय निवासी प्रोफेसर डॉ. देव नारायण चौधरी ने इसका सर्वेक्षण किया और इस नवीन शुरुआत के लिए लोगों से भी अपील की।

अपने सोक पिट के ऊपर खड़े राहुल

राहुल ने भागलपुर में सोक पिट के निर्माण हेतु एक अभियान चलाया हुआ है।  लोगों से बराबर अपील करते रहते हैं कि वर्षा जल को बचाना अति आवश्यक है। यदि हम आज से ही अपने अपने घरों में इसका निर्माण शुरू कर दे तो भविष्य में हमें कभी भी जल की किल्लत नहीं होगी।

यदि आप राहुल से जल संरक्षण की तकनीक को समझना चाहते हैं तो उनसे 8986431476 पर संपर्क कर सकते हैं।

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Written by कुमार हिमांशु

स्वतंत्र पत्रकार

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