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कॉल सेंटर की नौकरी छोड़ उगाये वॉटर लिली और लोटस, शौक पूरा होने के साथ शुरू हुई कमाई!

वाटर लिली और लोटस प्राकृतिक रूप से तालाब में खिलते हैं और इन्हें घर की छत पर उगाने के लिए अभिषेक ने छोटे-छोटे टब में पानी भर कर लगाया हुआ है।

“हर सुबह आप एक उम्मीद के साथ उठते हो, उसमें आये नए बदलाव को देखने के लिए”, अभिषेक यादव जब यह बात कहते हैं तो लगता है जैसे अपने किसी ख़ास की बात कर रहे हैं। लेकिन वह यहाँ जिक्र कर रहे हैं अपने पौधों के बारे में, जिन्हें उन्होंने हाल ही में अपनी घर की छत पर लगाया है। हैदराबाद में रहने वाले इस शख्स से आप बागवानी के वो सारे गुण सीख सकते हैं जो आपको यक़ीनन एक अच्छा बागवान बनाएंगे।

अभिषेक की कहानी काफी दिलचस्प है। 37 वर्षीय अभिषेक के लिए 15 साल पहले तक हैदराबाद में कॉल सेंटर की जॉब सबसे आसान जॉब थी और यहां काम करने का सिलसिला तकरीबन दस साल तक चला। अपनी नाईट शिफ्ट की जॉब से अभिषेक की अच्छी कमाई तो हो जाती थी पर फिर उन्हें कुछ सालों बाद इस जॉब को अलविदा कहना सही लगा। इसके बाद अभिषेक ने फ्रीलान्स बिज़नेस डेवलपमेंट की जॉब शुरू की। यहां नाईट शिफ्ट की तुलना में कमाई तो कम हो रही थी पर अभिषेक को अपने लिए वक्त मिल जाता था। इसी दौरान वह अपने खाली वक्त में बागवानी की ओर मुड़े। अभिषेक मानते हैं कि उन्हें बागवानी की सीख अपनी मां से मिली है।

वाटर लिली और लोटस

gardener
अभिषेक की छत पर टेरेस गार्डनिंग

गार्डनिंग से अभिषेक अपना शौक तो पूरा कर ही रहे हैं साथ ही अब यह उनकी कमाई का भी अच्छा जरिया बन चुकी है। शुरुआत में छोटे-छोटे कॉन्ट्रैक्ट मिले जिसमें घर के आस पास गार्डन सेट करने या डोमेस्टिक गार्डन का काम मिला। अभिषेक सोशल मीडिया पर भी गार्डनिंग से जुड़े नए-नए टिप्स ढूंढते रहते हैं, और यहीं से उन्हें वाटर लिली और लोटस का आइडिया मिला। अभिषेक को अपने नए घर की छत पर काफी खाली जगह मिली, जिसका इस्तेमाल उन्होंने अपने पौधों को लगाने के लिए किया। इसमें शुरुआत वाटर लिली की दो वैरायटी से हुई और आगे छह और वैरायटी बढीं। जब इनमें खूबसूरत फूल आने लगे तब अभिषेक ने इन्हें बेचने का बिज़नेस शुरू किया। लोगों में इन हेल्दी प्लांट्स की बहुत मांग रहती है जिससे अभिषेक का ये अनुभव अच्छा रहा।

वाटर लिली और लोटस प्राकृतिक रूप से तालाब में खिलते हैं और इन्हें घर की छत पर उगाने के लिए अभिषेक ने छोटे-छोटे टब में पानी भर कर लगाया हुआ है। अगर कोई इन पौधों को घर पर उगाना चाहता है तो इसके लिए जरुरी है पहले उसे पूरी तरह से इस बारे में जानकारी होनी चाहिए। इन्हें लगाने के दौरान जो आम गलतियाँ लोग कर बैठते हैं वह यह है  कि जब पौधों में फूल समय से नहीं आते और जमे हुए पानी से बदबू आने लगती है साथ ही उसमें कीड़े लगना शुरू हो जाते हैं तो कई लोग इन्हें बेकार समझकर फ़ेंक देते हैं। अगर सही ढंग से इन्हें लगाया जाए तो फूल दो महीने में उग आते हैं, वहीं अगर इसे लगाने के ढंग में कुछ गड़बड़ी हो गई तो फूल आने में दो साल का भी वक़्त लग सकता है। गार्डनिंग से जुड़े अपने आठ महीने के इस सफर में अभिषेक ने वाटर लिली की अस्सी और लोटस की बीस वैराईटी को अब तक अपने गार्डन में लगाया है।

 

गार्डनिंग ने सिखाया धैर्य रखना

वाटर लिली

अभिषेक कहते हैं, “गार्डनिंग आपको धैर्य रखना सिखाती है। एक जड़ जो आप मार्केट से खरीद कर लाते हैं, पौधा बनने में भी कई महीने ले लेती है। आपको इस दौरान उसका ख्याल रखना होता है। उसे समय पर जरुरी खाद, पानी देना होता है। पौधे खरीदने से ही आप एक गार्डनर नहीं बन जाते हैं आपको उसे अपना कुछ समय देना होता है। एक छोटा सा पौधा आप में एक उम्मीद भी जगाता है। आप हर दिन सुबह उठ कर सबसे पहले उसे देखते हो इस उम्मीद के साथ की आज उसमें कुछ नया होगा, शायद कलियां निकल रही होंगी।”

गार्डनिंग आपको आपकी निजी ज़िन्दगी में भी एक बेहतर इंसान बनाती है। आप किसी को समय देना सीख जाते हैं, आप समझने लगते हैं कि कई बार कई चीज़ों में वक़्त लग जाता है। अभिषेक बताते हैं, “मेरे पास कितना समय है पौधों की देखभाल करने के लिए, मैं ये भी देख कर पौधे चुनता हूं। जैसे वाटर लिली और लोटस ऐसे पौधे होते हैं जिन्हें आप कहीं लगाने से पहले एक हफ्ते तक टब के पानी में भी छोड़ सकते हो। अगर मुझे कहीं कोई जरुरी काम आ गया है तो मैं एक हफ्ते तक इन पौधों को पानी में ही छोड़ कर जा सकता हूं। इसलिए ध्यान रहे कि आप अपना समय देख कर ही अपने पौधे लगाए।” अभिषेक को उनका ये काम मन की संतुष्टि देता है जो पैसों से बढ़कर है।

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घर लाये पौधे की हो पूरी जानकारी

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अपनी माँ के साथ अभिषेक

गार्डनिंग का सबसे जरुरी पहलू क्या है? अभिषेक बताते हैं सबसे ज्यादा जरुरी है आपको उस पौधे की पूरी जानकारी हो जिसे आप लगाने जा रहे हैं। हर पौधा अलग होता है। आप पहले समझिये आप जिस पौधे को चुन रहे हैं क्या आप उसे वैसा पर्यावरण या देखरेख दे सकते हैं जिसे उसकी जरुरत है। अगर हां, तभी उसे घर लाइए। कई बार ज्यादा पानी देने से भी पौधे मर जाते हैं। एक पौधे को प्यार से लगाना, उसकी देखरेख करना आपको अलग किस्म की रियायत देता है, इस वक़्त आप अपनी निजी ज़िन्दगी में चल रही चीज़ों से पूरी तरह से दूर होते हैं। आप पौधों की देखभाल के साथ अपनी ज़िन्दगी में भी अहम चीज़ों की देखभाल करना सीखने लगते हो। अभिषेक कहते हैं, “मुझे शुरू से ही यह पता था कि कारपोरेट लाइफ को छोड़ कर गार्डनिंग बिज़नेस में मुझे पैसे तो काफी कम मिलेंगे लेकिन मैंने सोच लिया था कि मुझे गार्डनिंग ही करनी है। मेरी मां ने मुझे मेरे कॉलेज के दिनों से ही कभी भी प्लांट खरीदने से नहीं रोका। शुरुआत में मुझे इसमें थोड़ा संघर्ष करना पड़ा लेकिन अब सब ठीक है।”

 

पौधे लगाइये बेहतर भारत बनाइये

ख़ुशमिज़ाजी का राज गार्डनिंग

वैसे लोग जो गार्डनिंग शुरू करना चाहते हैं उनके लिए जरुरी है कि वो पौधों को समझें और धैर्य रखें क्योंकि पौधा खरीदना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन उसकी सही ढंग से देखभाल करना भी हमें सीखना चाहिए। एक छोटा सा बोनसाई भी अपने आकार के लिए कम से कम तीन सालों का वक़्त लेता है। गार्डनिंग एक स्वस्थ शरीर और दिमाग तो देती ही है साथ ही हमारी ज़िन्दगी का भी एक अहम हिस्सा होनी चाहिए। हमारी रोज़ की खाने की थाली भी गार्डेनिंग से ही जुड़ी हुई है। पौधे लगाइये, पर्यावरण बचाइए और एक बेहतर भारत बनाइये।

आप अभिषेक से instagram के माध्यम से जुड़ सकते हैं।

अगर आपको भी है बागवानी का शौक और आपने भी अपने घर की बालकनी, किचन या फिर छत को बना रखा है पेड़-पौधों का ठिकाना, तो हमारे साथ साझा करें अपनी #गार्डनगिरी की कहानी। तस्वीरों और सम्पर्क सूत्र के साथ हमें लिख भेजिए अपनी कहानी hindi@thebetterindia.com पर!

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Written by ईश्वरी शुक्ला

ईश्वरी शुक्ला एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में द बेटर इंडिया के साथ जुड़ी हैं।

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