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RO के बेकार पानी को बहने देते हैं? इन महिलाओं से सीखें प्रतिदिन 80 लीटर पानी बचाना!

ये तीनों महिलाएँ आरओ से निकले बेकार पानी को फर्श की सफाई, फ्लश करने, कार धोने और पौधों को पानी देने में प्रयोग करती हैं। 

wasting RO water

हर साल गर्मियों में पानी की कमी से देश के कई लोग जूझते हैं। पानी की अनियमित आपूर्ति के कारण कहीं पानी जमा करना पड़ता है तो कहीं टैंकरों पर निर्भर होना पड़ता है। कई लोग किचन में लगे आरओ से निकलने वाले पानी का प्रयोग पोछा लगाने में करते हैं तो कोई एसी के पानी को पौधों में डाल कर उसे बर्बाद नहीं होने देते।

पानी को संरक्षित करने के कई तरीके हो सकते हैं। अपने घरेलू जीवन में हम ये कैसे कर सकते हैं इसका उदाहरण दे रही हैं ये तीन महिलाएं – दिल्ली की रूपाली बाजपई शेरयारी, गुरुग्राम की विद्या वेंकट और मुंबई की भैरवी मणि मांगोंकर।

ये तीनों अपने घर में प्रतिदिन औसतन 80 लीटर पानी बचा लेती हैं! दिलचस्प बात है कि ये तीनों एक ही तरीके से ये काम कर रही हैं।

भैरवी के घर में लगाए हुए पौधे

बाथरूम से की शुरुआत, जहाँ सबसे ज़्यादा पानी बर्बाद होता है!

दिल्ली में रहने वाली रूपाली हमें बताती हैं कि किस तरह अपनी दिनचर्या में मामूली बदलाव ला कर वह हर दिन के करीब 100 लीटर तक पानी की बचत करने में सफल हुई हैं।

रूपाली बताती हैं,“ हम दिन में तीन बार फ्लश का प्रयोग करते हैं। मेरे कहने का मतलब है कि टॉयलेट का फ्लश हम तीन ही बार प्रयोग करते हैं और बाकी समय किचन या एसी के पानी को बाल्टी में जमा कर इस पानी को फ्लश के लिए प्रयोग करते हैं।”

रूपाली आगे कहती हैं, “अगर संभव होता तो बाथरूम में बच्चों के लिए एक छोटा सा स्विमिंग पूल बना देती और हमारे शावर लेने के बाद का पानी भी इकट्ठा करके घर के बाकी कामों में इस्तेमाल करती। पर ये मेरे लिए संभव नहीं था।”

मुंबई की भैरवी भी अपनी दिनचर्या में लाए बदलावों से पानी का संरक्षण कर रही हैं, जिसे वह अपने घर में लगे 70 पौधों को सींचने के काम में ला रही हैं। नहाने के लिए बाल्टी का प्रयोग करना इनके लिए सबसे उपयोगी साबित हुआ।

भैरवी बताती हैं, “एक वयस्क करीब 10 मग पानी का प्रयोग कर लेता है जबकि मेरे 6 साल के बेटे को नहाने के लिए 4 मग काफी हैं। कभी कभी उसे 10 मग मिल जाते हैं- जो उसके लिए बड़ी बात हो जाती है।”

भैरवी ने बताया कि नहाने से बचा हुआ पानी फ्लश के लिए प्रयोग किया जाता है।

किचन में पानी की बर्बादी पर लगाई रोक

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रूपाली बताती हैं, “घर पर पानी के प्रयोग के प्रति जागरूक हो कर मैंने शुरुआत की और मेरा पहला कदम था अपने सिंक में एक बड़ा सा कटोरा रखना। हाथ,सब्जी और बर्तन धोने के काम आए पानी को इस कटोरे में जमा कर लिया जाता है। इस पानी को फिर पौधों के लिए और बालकनी का फर्श धोने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।”

इस तरह रूपाली करीब 2 बाल्टी पानी बचा लेती हैं जो कि लगभग 40 लीटर के बराबर हो जाता है।

गुरुग्राम की विद्या ऐसी ही जागरूक महिलाओं में से एक है जो प्रयोग किए हुए पानी को जमा कर उसे दुबारा प्रयोग करने में विश्वास रखती हैं। पूरे घर में बाल्टी व ड्रम के जरिये ये एसी के पानी को जमा करती है।

विद्या बताती हैं, “ इस पानी को हम पोछा लगाने, पौधों को पानी देने और बाथरूम साफ करने के काम में लाते हैं।”

आरओ से निकले पानी का प्रयोग

आरओ का पानी जमा करने के लिए लगाया हुआ ड्रम

अधिकतर घरों में पीने के पानी के लिए आरओ लगाया जाता है। यह एक तरफ पीने के लिए शुद्ध पानी की समस्या को समाप्त करता है तो दूसरी ओर इस प्रक्रिया में तीन गुना पानी बर्बाद भी होता है। क्या कोई तरीका है जिससे इस अशुद्ध पानी को प्रयोग में लाया जा सके?

विद्या बताती हैं, “ जैसे ही आरओ में हरी बत्ती जलती है, मैं इसे बंद कर देती हूँ। इसके बाद मैं तब ही पानी भरती हूँ जब पानी की कमी होती है। इससे हम पानी की बर्बादी को कम कर सकते हैं।”

ये तीनों महिलाएं आरओ से निकले बेकार पानी को फर्श की सफाई, फ्लश करने, कार धोने और पौधों को पानी देने में प्रयोग करती हैं।

विद्या कहती हैं, “हमें बस अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी में बदलाव लाना है। शुरू में यह मुश्किल ज़रूर लगा था, खास कर हमारे घर के सहायकों को समझाना कि हमें क्यों पानी को समझदारी से खर्च करना है और इसे क्यों बचाना है। धीरे- धीरे वे अब उन दूसरे घरों में भी बदलाव ला रहे हैं जहां वे काम करते हैं।”

इन सरल उपायों से जहां रूपाली हर दिन करीब 100 लीटर पानी की बचत करती हैं वहीं भैरवी और विद्या 80 लीटर तक पानी हर दिन बचा लेती हैं। इन तीनों महिलाओं ने बड़ी ही सरलता से हमें दिखा दिया कि किस तरह हम घर बैठे खुद में बदलाव लाकर, पानी की किल्लत जैसी जटिल समस्या का समाधान भी निकाल सकते हैं। तो आप किस बात का इंतज़ार कर रहे हैं? बड़े बदलावों की शुरुआत छोटी कोशिशों से ही तो होती है।

मूल लेख – विद्या राजा

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Written by निधि निहार दत्ता

निधि निहार दत्ता राँची के एक कोचिंग सेंटर, 'स्टडी लाइन' की संचालिका रह चुकी है. हिन्दी साहित्य मे उनकी ख़ास रूचि रही है. एक बेहतरीन लेखिका होने के साथ साथ वे एक कुशल गृहिणी भी है तथा पाक कला मे भी परिपक्व है.

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