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नागेश कुकुनूर की वो फ़िल्में जिन्हें आपको एक बार तो ज़रूर देखनी चाहिए!

आज कल सोशल मीडिया के ज़रियें हमें अपने से कोसों दूर हो रही घटनाओं का झट से पता चल जाता है। पर फिर भी समाज के ऐसे कई पहलु है जिनका ज़िक्र कहीं भी नहीं हो पाता। हमारे कुएं नुमा दुनिया में हम जो देखते है उसी को सच मानते हैं। पर इसके परे भी कई ऐसे मुद्दे है जिन पर तब तक बदलाव नहीं लाया जा सकता जब तक हमें उनकी जानकारी न हो, जब तक हम उन विषयों पर चर्चा करना ज़रूरी न समझे।

नागेश कुकुनूर की फिल्मे हमे ऐसे ही कुछ मुद्दों से रु-ब-रु कराती है! आईये जानते हैं उनकी बनायी ऐसी ही पांच फिल्मों के बारे में –

डोर

2006 में आई डोर में जहाँ एक तरफ एक विधवा है जो अपने पति की प्यार भरी यादों के साथ जीना सीख रही है तो दूसरी तरफ उसे विधवा बनाने वाले शख्स की पत्नी है जो अपने पति को बचाने के लिए कुछ भी कर सकती है!

नागेश कुकुनूर ने इस फिल्म में बतौर निर्देशक हर संभव कोशिश की है कि हम इन दोनों किरदारों से जुड़ी हुई भावनाओं को समझे। नागेश ने दोनो महिलाओं को मजबूर दिखाते हुए भी कही से भी कमज़ोर नहीं बताया हैं। ये दोनो ही अपनी अपनी मुश्किलों को झेलते हुए कही न कही उम्मीद की परिभाषा सी लगती है, एक नए समाज की छबी सी लगती है!

इकबाल

2005 में आई नागेश कुकुनूर द्वारा निर्देशित इस फिल्म का सबसे तगड़ी बात इसकी कहानी और इसके सभी कलाकारों की सशक्त अभिनय क्षमता है। फिर चाहे वो इकबाल के माता-पिता का छोटा सा किरदार ही क्यूँ न हो। नागेश ने हर एक कलाकार को उनके छोटे से छोटे रोल में भी दमदार अभिनय करवाया है।

इसके अलावा एक गूंगे बहरे नौजवान किसान के बेटे की एक खिलाड़ी बनने की तड़प हमे समाज का वो आईना दिखाती है जिसे अक्सर देख कर भी हम अनदेखा कर देते है।

तीन दीवारें

2003 में आई इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, जैकी श्राफ, जूही चावला और खुद नागेश कुकुनूर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई है। फिल्म तीन कैदियों के बारे में है जिन पर जूही चावला का किरदार एक डाक्यूमेंट्री बना रहा है। पर ये सीधी सादी सी कहानी से शुरू हुई फिल्म आगे क्या-क्या मोड़ लेती है इसे जानने के लिए आपको फिल्म एक बार तो ज़रूर देखनी चाहिए!

फिल्म एक बहुत बड़ी सीख दे जाती है कि हर किसी के पीछे कोई न कोई कहानी ज़रूर छिपी होती है। ज़रूरी नहीं कि जो दिखाई देता हो वही सच हो!

लक्ष्मी

नागेश की इस फिल्म को देखने के लिए सचमुच कलेजा चाहिए। या कह लीजिये कि ये हमारे समाज की वो तस्वीर है जिसे देख कर हमे अपने आप पे शर्म आने लगेगी। हमारे देश में मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति का कितना बड़ा बाज़ार है ये हम सभी जानते है पर इस जंजाल में फंसी लड़कियों के साथ कैसे कैसे अमानवीय अत्याचार होते है इसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। लक्ष्मी एक सत्य घटना पर आधारित फिल्म है। आप अंदाज़ा लगा सकते है कि ये सत्य कितना कड़वा होगा! पर इस सत्य से लड़ने के लिए ही आपका इस फिल्म को देखना बेहद ज़रूरी है!

धनक

2016 में नागेश कुकुनूर द्वारा निर्देशित इस भाई बहन की जोड़ी की कहानी से यक़ीनन आपको प्यार हो जायेगा!

धनक कहानी है एक बहन की जो अपने अंधे भाई को आँखे दिलाने के लिए शाहरुख़ खान से मिलने चल देती है। फिल्म अपने कई छोटे-छोटे और खट्टे-मीठे लम्हों के ज़रिये आपको जीवन के कई पाठ पढ़ा जाता हैं! दोनों बच्चो की अदाकारी भी कमाल की है जो दर्शको को शुरू से लेकर अंत तक बांधे रखती है!

आशा है आप इन फिल्मों को एक बार ज़रूर देखेंगे और हमे बताएँगे कि ये आपको क्या सौगात दे गयी!

तस्वीरें साभार – विकिपिडिया
featured image Source: Pandolin

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Written by मानबी कटोच

मानबी बच्चर कटोच एक पूर्व अभियंता है तथा विप्रो और फ्रांकफिंन जैसी कंपनियो के साथ काम कर चुकी है. मानबी को बचपन से ही लिखने का शौक था और अब ये शौक ही उनका जीवन बन गया है. मानबी के निजी ब्लॉग्स पढ़ने के लिए उन्हे ट्विटर पर फॉलो करे @manabi5

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