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गाँव के खाली खेतों को देख छोड़ी IT की नौकरी, हल्दी की खेती कर लाखों में हुई कमाई!

गाँव के खाली खेतों को देख छोड़ी IT की नौकरी, हल्दी की खेती कर लाखों में हुई कमाई!

अपने साथ के दो दर्जन से अधिक किसानों के प्रोडक्ट को बाजार मुहैया करवाने के लिए एक ब्रांड की शुरूआत भी की है।

यह कहानी हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-नालागढ़ में लोगों को फैक्टरियों में मजदूरी से मुक्ति दिलाकर किसानी की तरफ मोड़ने का काम कर रहे एक युवा की है। इस युवा ने स्थानीय लोगों को कम लागत में अधिक मुनाफे वाले खेती और रसायनमुक्त स्वस्थ भोजन मुहैया करवाने की ठानी है।

हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ तहसील की रड़याली पंचायत के दत्तोवाल गाँव के युवा अनुभव बंसल गाँव लौटने से पहले चंडीगढ़ में आईटी सेक्टर में नौकरी करते थे। बंसल ने इलैक्ट्रोनिक्स एंड कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। लेकिन अपने क्षेत्र में खाली पड़े खेतों और किसानों की हालत को देखकर बंसल ने खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए न सिर्फ खुद खेती-बाड़ी शुरू की है बल्कि क्षेत्र के किसानों को खेती की तरफ मोड़कर उनके उत्पादों को मार्केट तक पहुंचाने के लिए प्योरा फॉर्म  नाम से एक प्रोडक्ट भी शुरू किया है।

IT Guy farmer
अनुभव बंसल

बंसल ने द बेटर इंडिया को बताया, “जब मैं हायर सेकंड्री में पढ़ाई कर रहा था उस वक्त इस इलाके में बड़ी-बड़ी कंपनियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया था। लोग बाग, खेती छोड़ कंपनियों में काम करने लग गए थे। इससे खेत खाली रहने लगे और जो कुछ किसान खेती कर रहे थे वे गेहूं और मक्के से बाहर नहीं निकल रहे थे, ऐसे में इसमें उचित मुनाफा न होने के चलते लोगों का खेती से मोह भंग हो रहा था। इसलिए मैंने खुद खेती करने का फैसला लिया और लीज पर 17 बीघा जमीन लेकर खेती शुरू कर दी। खेती में लागत को कम करने के लिए मैंने सुभाष पालेकर की प्राकृतिक खेती मॉडल को अपनाया है। मेरे खेती मॉडल को देखने के लिए अब क्षेत्र के कई किसान आ रहे हैं और इसे अपने खेतों में भी अपना रहे हैं।”


पिता का मिला साथ
अनुभव बंसल के पिता बद्दी में एक इलेक्ट्रोनिक्स की नामी कंपनी चलाते हैं। इसके बावजूद अनुभव ने पिता की कंपनी को चलाने के बजाए खेती करने का फैसला लिया। अनुभव बताते हैं कि वह किसानों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना चाहते हैं। जो लोग खेती को घाटे का सौदा मानते हैं, उनकी सोच में बदलाव लाना चाहते हैं।

बंसल ने कहा, “अपने हाथों से उगाए अनाज को खाने और इसे अन्य लोगों को देने में अलग ही खुशी मिलती है। मेरे खेतों से सब्जियां और अनाज ले जाने वाले लोग बार-बार हमारे पास आते हैं और वे मुफ्त में हमारी मार्केटिंग कर रहे हैं। इससे हर बार नए-नए ग्राहक देखने को मिलते हैं।”

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अपने खेत के एक हिस्से में अनुभव

ढाई बीघा खेत में हल्दी से कमाए लाख रूपये

अनुभव बताते हैं कि उनके पास अपनी जमीन न होने के चलते पड़ोसी से लीज पर 17 बीघा जमीन ली है। उन्होंने बताया कि इसमें से ढाई बीघा में केवल हल्दी उगा रहे हैं और पिछले साल उन्होंने प्रगति वैरायटी की हल्दी का 1000 किलोग्राम बीज लगाया था। जिसमें उन्हें तीन गुना उपज मिली है और उन्होंने इससे 5 लाख रूपये कमाए हैं। इसके अलावा मिश्रित खेती भी कर रहे हैं। जिससे उन्हें साल भर आय होती रहती है।

कृषि लागत को कम करके बढाएं मुनाफा
बंसल किसानों को सलाह देते हैं कि वे परम्परागत खेती पद्धतियों को त्यागकर प्राकृतिक खेती पद्धति की ओर बढ़ें। इस खेती पद्धति में किसानों की बाजार पर से निर्भरता घटती है और वे घर पर ही मौजूद सभी संसाधनों से खेती में प्रयोग होने वाली खादों और दवाईयों को न्यूनतम लागत में बना करके खेती लागत को कम कर सकते हैं। बंसल बताते हैं कि प्राकृतिक खेती पद्धति में देसी गाय का होना जरूरी है इसलिए उन्होंने देसी नस्ल की गाय भी पाल रखी है। इससे खेतों के लिए गोबर और गोमूत्र तो मिल ही रहा है साथ ही ए-टू क्वालिटी का दूध भी मिल रहा है।

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अनुभव बंसल के खेत में प्राकृतिक खेती का एक मॉडल

मधुमक्खी पालन
बंसल ने अपने खेतों में मधुमक्खियों के बक्से रखवाए हैं। इसके लिए वह मधुमक्खी पालकों से पैसे लेते हैं। उनका कहना है कि खेतों के कोनों में मधुमक्खियां होने से पॉलीनेशन में आसानी मिलती है और इससे आय का एक और साधन मिल जाता है।

ये फसलें लगाकर रिस्क को किया कम
अनुभव बताते हैं कि वह बाजार को ध्यान में रखकर खेती करते हैं। वह हल्दी, धनिया, अदरक, मक्की, भिंडी व माश, लहसुन, गोभी, ब्रोकली, गेंहू की खेती करते हैं। इनमें से ज्यादातर ऐसी फसलें हैं जिनमें यदि उत्पाद नहीं भी बिके तो उन्हें प्रोसेस करके थोड़े समय के बाद बाजार में सही दामों में बेचा जा सकता है।

प्योरा फॉर्म  की शुरूआत

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प्योरा फ़ार्म ब्रांड के शहद(बायें) व दालें(दायें)


बंसल का मानना है कि किसान खेतों में तो खूब मेहनत करता है, लेकिन अपनी पैदावार को बाजार में सही दाम मिल सके, इसके लिए उनके पास सही गाइडेंस और मार्केटिंग स्ट्रेटजी न होने के चलते वे उचित मुनाफा नहीं कमा पाते हैं। इसलिए उन्होंने अपने और अपने साथ के दो दर्जन से अधिक किसानों के प्रोडक्ट को बाजार मुहैया करवाने के लिए एक फार्म की शुरूआत की है। बंसल ने अपने ब्रांड का नाम प्योरा फार्म रखा है। बंसल के प्रयासों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने 2019 में उन्हें उन्नत किसान के सम्मान से सम्मानित किया था।

यदि आप भी अनुभव बंसल के ब्रांड प्योरा फॉर्म के उत्पादों को खरीदना चाहते हैं या उन्हें किसी तरह की मदद करना चाहते हैं तो उनसे मोबाइल नंबर 94180-93007 पर संपर्क कर सकते हैं।

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रोहित पराशर

पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, सक्सेस स्टोरी, यात्रा वृतांत और जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण के बारे में लिखने के शौकिन रोहित पराशर हिमाचल से हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से मास्टर इन मास कम्यूनिकेशन करने के बाद पिछले एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुडे़ हुए हैं। देश के प्रतिष्ठित समाचारपत्र दैनिक भास्कर और पर्यावरण के क्षेत्र की बेहतरिन मैग्जीन डाउन टू अर्थ में सक्रीय रूप से लिखते हैं। लोगों से उनके अनुभवों के बारे में बाते करने का शौक रखते हैं और पहाड़ों से खासा लगाव रखते हैं।
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