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‘हाथी मेरे साथी’: 6 वाकये जहाँ हाथी ने इंसानों से निभायी दोस्ती!

“ये सभी हाथी प्यार और करुणा चाहते हैं। वे अपने और दूसरों के बच्चों के लिए बहुत सुरक्षात्मक हैं। वे मनुष्यों की तरह घनिष्ठ बंधन, मित्रता बनाते हैं और दूसरों की तुलना में अपने साथियों को प्राथमिकता देते हैं। वे जन्म और मृत्यु का शोक मनाते हैं। हाथी संघर्ष नहीं करना चाहते। वे अपना जीवन जीना चाहते हैं।”

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27 मई 2020
केरल में एक दर्दनाक हादसे में हाथी की मौत हो गई। हाथी ने पटाखों से भरा अनानास खा लिया था। वह गर्भवती थी। पीड़ा को शांत करने के लिए वह नदी में गई और वहीं तड़प-तड़प कर उसके प्राण निकल गए। 

( किसान इन अनानास का इस्तेमाल अपने खेतों से सूअर को डराने और दूर रखने के लिए करते हैं। लेकिन गाँव से गुज़र रहे इस बेक़सूर हाथी ने इसे खा लिया। )

रैपिड रिस्पांस टीम का हिस्सा रहे, एक सेक्शन फॉरेस्ट ऑफिसर, मोहन कृष्णन ने हाथी के बचा लेने की उम्मीद की थी। उन्होंने इस घटना के बारे में एक पोस्ट साझा किया। जल्द ही, इस घटना ने हर जगह पशु प्रेमियों, मीडिया और आम लोगों का भी ध्यान आकर्षित किया। लोगों ने इसकी कड़ी निंदा की। 

इस घटना को पढ़कर मैं अपनी जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की यात्रा के बारे में सोचने पर मजबूर हो गयी, जहाँ स्थानीय लोगों ने हमें सिर्फ एक ही चेतावनी दी थी, कि अगर हमें कोई हाथी नज़र आये, तो किसी भी तरह से हम उसे उत्तेजित न करें।

वहां इस बात पर बहुत ज़ोर दिया जाता है कि, “वे आमतौर पर दयालु और सहानुभूति से भरे होते हैं और आपको नुकसान नहीं पहुंचाते। हाथी केवल दो स्थितियों में खतरनाक हो सकते हैं- यदि एक नर हाथी मस्त है (प्रजनन हार्मोन में वृद्धि के कारण आक्रामक व्यवहार) या जब उन्हें खतरा महसूस होता है। अन्यथा, यह तो एक कोमल प्राणी है।”

Image Source: Mohan Krishnan/ Facebook

केवल 75 वर्षों में, दुनिया भर में एशियाई हाथी की आबादी लगभग आधी हो गयी है। आज, अनुमानित 20,000-40,000 हाथी जंगल में रहते हैं। इस बात में कोई शक नहीं कि वे हमारे साझा पारिस्थितिकी तंत्र का एक अभिन्न अंग हैं। हाथी अपनी बुद्धि, अपनी अद्भुत स्मृति और अपनी सज्जनता के लिए जाने जाते हैं।

फिर भी, हम उनके प्रति निर्दयी बने हुए हैं – उनके घर उजाड़े जाते हैं, उन्हें पिंजरों तक सीमित किया जाता है, उन्हें हाथी दांत के लिए मारा जाता है और परेड और शो के लिए उनकी सवारी करते हैं।

ऐसी कई घटनाएं हैं, जब हाथियों ने मनुष्यों की मदद की है। कैमरे में कई बार हाथियों को लोगों को बचाते, उनकी रक्षा करते या उनकी मदद करते हुए कैद किया गया है। यहां छह घटनाओं का उल्लेख किया गया है, जिनमें हाथियों ने इंसानों के प्रति अपनी संवेदना का परिचय दिया है।

1. जब डूबते हुए व्यक्ति को बचाने के लिए एक छोटे हाथी ने दौड़ लगाई!

हाथियों का एक झुंड एक नदी के किनारे चल रहा था। तभी एक छोटे हाथी ने एक युवक को नदी में देखा। वीडियो को अंत तक देखें और आप देखेंगे कि पानी के भीतर जानेवाला युवक तैरना जानता है। हालांकि, छोटे हाथी को लगा कि शायद आदमी खतरे में है और वह उसकी रक्षा के लिए दौड़ कर उसकी तरफ भागा। हाथी खुद एक बच्चा था, लेकिन मानव के प्रति उसकी दया साफ दिखाई देती है।

2. जब हाथी ने एक छोटी बच्ची की जान बचाई

Elephants Help Humans
Representative image.

2019 में पश्चिम बंगाल की इस घटना में, एक हाथी ने 4 साल की बच्ची को बाकी झुंड से बचाया। यह बच्ची अपने माता-पिता के साथ दुपहिया वाहन से जा रही थी कि तभी पास के घने जंगल से हाथियों का एक झुंड सड़क पर आ गया। अचानक हाथियों को देखकर वाहन का संतुलन बिगड़ गया और वे सड़क पर गिर गए। 

झुंड में से एक हाथी बच्ची के पास आया और उसे घेर कर ढाल बनकर तब तक खड़ा रहा जब तक कि झुंड के अन्य हाथियों ने सड़क पार नहीं कर ली।

इस बारे में आईएफएस अधिकारी परवीन कासवान ने द बेटर इंडिया (TBI) को बताया, “हाथी सामाजिक प्राणी हैं, जो परिवारों में रहते हैं। वे कई भावनाओं को दिखाने में सक्षम हैं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण है करुणा।”

3. जब हाथी ने गुस्से में एक घर तोड़ा, पर 10 महीने की बच्ची की रक्षा की

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Image Courtesy: Parveen Kaswan

मस्त (Musth) हाथी में टेस्टोस्टेरोन का स्तर लगभग 60 प्रतिशत तक बढ़ सकता है और उन्हें अत्यधिक आक्रामक बनाता है। ऐसे मामलों में, हाथी बिना उकसावे के अन्य जानवरों, मादा हाथी और यहां तक कि पेड़ और रिहायशी इलाकों में घुसकर इमारतों पर भी हमला करते हैं।

2014 में, एक मस्त हाथी ने पश्चिम बंगाल के एक गाँव के घर पर हमला किया। घर की  दीवारें तोड़ दी और संपत्ति को नष्ट कर दिया। दुर्भाग्य से, उस समय एक 10 महीने की एक बच्ची घर के अंदर थी। वह रोने लगी।

बच्चे के पिता दीपक महतो ने बाद में टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बताया, “हम वहां से भाग गए। हमनें दीवार को टुकड़ों में टूटते हुए देखा। हमारी बच्ची घर के अंदर ही रह गई थी। वह रो रही थी। उसके चारों तरफ मलबा फैला हुआ था। हमने देखा कि हाथी दूर जा रहा था, लेकिन जब हमारी बच्ची फिर रोने लगी तो वह लौट आया और अपनी सूंड से मलबा हटाने लगा।”

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यह बात अविश्वसनीय जरूर है, लेकिन सच है।

4. एक हाथी ने 8 साल के बच्चे को सुनामी से बचाया

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Representative image.

अंबर ब्रिटेन की रहने वाली थी और 2004 में छुट्टी मनाने फुकेत गई थी। वह हर सुबह हाथी की सवारी के लिए जाती थी और निंग-नॉन्ग नाम के हाथी से उसकी विशेष दोस्ती हो गई थी। एक दिन वह समुद्र तट पर अपने पसंदीदा हाथी के साथ थी। लेकिन निंग-नॉन्ग समुद्र के भीतर जाने पर बहुत बेचैन दिख रहा था। 

अंबर और महावत दोनों को निंग-नॉन्ग का व्यवहार अजीब लग रहा था। लेकिन जब एक ऊंची लहर हाथी के कंधे पर लगी, तो वे सतर्क हो गए। अब, निंग-नॉन्ग ने कमांड लेना बंद कर दिया। निंग-नॉग के पीठ पर अंबर बैठी थी। वह उसे लेकर ज़मीन की ओर भागा। और तब तक भागता रहा जब तक कि उसे एक दीवार नहीं मिली, जिस पर अम्बर सुरक्षित कूद सकती थी। थोड़ी ही देर में पूरा इलाका पानी में बह गया। 

अबंर अब करीब बीस साल की हैं। द गार्जियन से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं पता कि उस दिन उस हाथी का क्या हुआ, जो दीवार फांदकर दूसरी ओर नहीं जा सका था। लेकिन उस हाथी ने निश्चित रूप से उनकी जान बचाई थी।

5. गुस्सैल हाथी को पकड़वाने में भी मनुष्यों की करते हैं मदद

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत में कई जंगलों में मानव-पशु के बीच संघर्ष में वृद्धि हो रही है। देश में हर साल लगभग 100 लोगों की मृत्यु इस संघर्ष के कारण होती है। कई बार उत्तेजित हाथी मानवीय उपस्थिति को खतरा समझ लेते हैं और कई तरह की अप्रिय घटनाएं होती हैं। ऐसे उत्तेजित हाथियों से निपटने के लिए कई बार घरेलू हाथी हमारी सहायता के लिए आते हैं।

असम की एक महिला महावत पारबती बरुआ से पूछिए, जो अपनी तीनों हथिनियों को अपनी बेटियां मानती हैं और सभी को ऐसे मिशन पर ले जाती हैं। इन मादा हथिनियों के लिए जोखिम अधिक होता है क्योंकि नर हाथी उन पर भी हमला कर सकते हैं।

इस काम को ये हाथी अपनी मर्जी से करते हैं, ऐसा शायद न भी हो। लेकिन फिर भी अगर सोचा जाए तो वे चाहे तो भाग भी सकते हैं या कमांड को अस्वीकार कर सकते हैं। पर वे ईमानदारी से हमारी मदद करते हैं – जिसके लिए हमें उनका आभारी होना चाहिए।

6. जेक डोरोथी के लिए, हाथी थेरेपी की तरह काम करते हैं

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जेक बचपन में उत्पीड़न के शिकार हुए थे और अक्सर खुद को चोट पहुंचाने के बारे में सोचते थे। वर्षों तक इस कटु अनुभव से जूझने के बाद, उन्होंने अपने जीवन में लुक बदलाव करने का फैसला किया और बचाए गए हाथियों के साथ काम करने के लिए थाईलैंड चले गए। 

वहां उनकी दोस्ती 26 वर्षीय बचाए गए हाथी, काबु से हुई जिसने अपने शुरूआती वर्षों में मानसिक पीड़ा से गुज़र चुका था। काबु से लकड़ी उठाने का काम कराया जाता था। एक दुर्घटना में काबू के ऊपर ये लकड़ियां लुढ़क गई और उसका पैर टूट गया।

बचाव केंद्र में, काबु काफी ठहराव भरा, स्नेही जानवर बन गया। वह अपनी पीड़ा भूलकर दूसरों में प्यार बांटता। जेक और काबु एक अनोखी थेरेपी यात्रा पर निकल पड़े जहाँ वे एक दुसरे का सहारा बनें।

ये तो बस चंद उदाहरण हैं। मनुष्यों की मदद करने के अलावा, कई घटनाएं हैं जब हाथियों ने अन्य जानवरों की भी मदद की है।

आईएफएस अधिकारी, विपुल पांडे ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए कहा, “ये सभी हाथी प्यार और करुणा चाहते हैं। वे अपने और दूसरों के बच्चों के लिए बहुत सुरक्षात्मक हैं। वे मनुष्यों की तरह घनिष्ठ बंधन, मित्रता बनाते हैं और  दूसरों की तुलना में अपने साथियों को प्राथमिकता देते हैं। वे जन्म और मृत्यु का शोक मनाते हैं। हाथी संघर्ष नहीं करना चाहते। वे अपना जीवन जीना चाहते हैं।”

हमें यह हमेशा याद रखने की कोशिश करनी चाहिए।

संपादन – मानबी कटोच

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