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‘फ्लोटिंग’ टेरेस फार्म में 20 से ज़्यादा तरह की फल और सब्जियां उगा रहा है मदुरई का यह शख्स!

राजेश्वरन कहते हैं, “एक बार जब आपको खेती करने में मन लग जाता है तो आप कुछ भी उगा सकते हैं।  इसलिए हमने पत्तेदार सब्जी और टमाटर के साथ शुरुआत की।”

मदुरई में रहने वाले डीडी राजेश्वरन ने 2016 में पहली बार किसानी के क्षेत्र में कदम रखा था। राजेश्वरन शहर के उन पहले लोगों में से थे जिन्होंने हाइड्रोपोनिक्स के माध्यम से किसानी की। हाइड्रोपोनिक्स एक ऐसी तकनीक है जिसमें मिट्टी के बिना फसल उगाई जाती है। राजेश्वरन कहते हैं, “कुछ चीज़ें बेहद संतोषजनक होती हैं, जैसे कि अपने बगीचे से सब्जियाँ तोड़ना और उससे अपना खाना तैयार करना।”

वह कहते हैं, “हाइड्रोपोनिक्स वास्तव में उन क्षेत्रों के लिए एक वरदान है, जहाँ खेती के लिए पर्याप्त पानी या फिर उपजाऊ मिट्टी नहीं है।” 

चार साल पहले 70 वर्षीय राजेश्वरन ने, अपनी पत्नी, ग्रेस राजेश की मदद से, विश्व शांति नगर में अपने घर की छत (जो 800 वर्ग फीट का है) पर एक हाइड्रोपोनिक्स ग्रीनहाउस स्थापित किया था। आज वह अपने बगीचे में 20 से ज़्यादा तरह के फल और सब्जियां उगाते हैं, वह भी बिना पानी के।

 

ड्रीम प्रोजेक्ट की स्थापना

राजेश्वरन का इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर-ऊर्जा उपकरणों से जुड़ा बिजनेस था। 2010 में, उन्होंने फूड बिजनेस में विस्तार करने का फैसला किया और शहर में कुछ रेस्तरां की शुरूआत की। वह चाहते थे कि रेस्तरां के लिए सब्जी वह खुद उगाएं। इसके बाद ही उनकी दिलचस्पी शहरी बागवानी की ओर बढ़ी।

वह कहते हैं, “मैं जो कुछ भी करता हूं उसमें हमेशा अपना सौ प्रतिशत देता हूं। बागवानी हमेशा मेरे दिल के बहुत करीब थी। फूड बिजनेस ने उस रुचि को बढ़ावा दिया और मैंने इस क्षेत्र में अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए खेती के बेहतर तकनीक के बारे में पढ़ना शुरू किया और बढ़िया बीज मंगवाने शुरू किए।”

Madurai man terrace garden

हालांकि, हाइड्रोपोनिक्स का प्रयोग एक संयोग की बात थी। राजेश्वरन ने छत में हाइड्रोपोनिक्स सिस्टम स्थापित करने का विचार किया और अपने प्रोजेक्ट का नाम साउदर्न स्प्रिंग्स हाइड्रोपोनिक्स रखा। वह बताते हैं, “घर में एक बोरवेल प्रोजेक्ट के दौरान, मुझे एहसास हुआ कि यहाँ पानी की गुणवत्ता काफी खराब है और इसके अलावा पानी की कमी भी थी। इस स्थिति ने मुझे पानी के सीमित उपयोग के साथ फसलों की खेती का एक तरीका खोजने के लिए प्रेरित किया औऱ तब मैंनें स्वचालित बिना मिट्टी के फसल उगाने वाली कई तकनीक, जैसे हाइड्रोपोनिक्स, एक्वापोनिक्स और एरोपोनिक्स के बारे में जानकारी प्राप्त की। मैंने हाइड्रोपोनिक्स प्रयोग करना तय किया। यह पहले से ही अमेरिका और इज़राइल में काफी आम तकनीक है। भारत में सकारात्मक ट्रेंड में योगदान करने के लिए मैंने शोध शुरू किया।”

हालाँकि, वह बाटो बकेट या डच बकेट सिस्टम, या यहां तक ​​कि सिंगल बकेट डीप वाटर सिस्टम जैसी हाइड्रोपोनिक्स तकनीकों को चुन सकते थे लेकिन राजेशवरन ने एक अधिक जटिल तकनीक का प्रयोग करने का फैसला किया, जिसे पोषक फिल्म तकनीक (NFT) कहा जाता है। इसमें, विभिन्न उपायों में पानी के पोषक तत्वों पर काम होता है। माइक्रो और मैक्रो स्तर पर पानी के सभी 16 पोषक तत्वों को इसमें शामिल किया जाता है। 

इस तकनीक के बारे में जानकारी हासिल करने वाले राजेश्वरन कहते हैं, “यह माना जाता है कि हाइड्रोपोनिक्स के माध्यम से हरी चीज़ें उगाना सबसे आसान है, लेकिन एक बार जब आपको इसका चस्का लग जाता है तो आप कुछ भी उगा सकते हैं। इसलिए हमने पत्तेदार सब्जियों, शाक और टमाटर से शुरुआत की।”

हालाँकि, राजेश्वरन और उनकी पत्नी, पहली पैदावार के बारे में अनिश्चित थे लेकिन उन्होंने अगले कुछ महीने के लिए पौधों की पूरी देखभाल की। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। चार महीने में उनके बगीचे में हरे और लाल रंग के फल दिखाई देने लगे। 

सफलता से प्रसन्न होकर, राजेश्वरन ने स्थानीय और विदेशी किस्मों जैसे पालक, पुदीना, शतावरी, अजवाइन, लाल और हरे लेट्यूस, कई तरह के शाक, भींडी, बैंगन, टमाटर, बीन्स, तरबूज और खीरे उगाने शुरू कर दिए। वह टमाटर की चार से अधिक किस्में उगाते हैं, जिसमें चेरी टमाटर और इटली से सैन मार्ज़ानो जैसी विदेशी नस्लों और यूके से बिग बॉय भी शामिल हैं।

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फिलहाल वह एक ऐसे खीरे की प्रजाति का इंतजार कर रहे हैं जिसका संबंध नीदरलैंड से है। खीरे की अन्य किस्मों की तुलना में इसकी उपज अधिक होती है। 

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बायें से दायें- खीरे, बैगन और ब्रोकली

राजेश्वरन हाइड्रोपोनिक्स विधि के बारे में विस्तार से बताते हैं, “यह विधि सामान्य से 90% कम पानी का उपयोग करती है, लेकिन यह केवल पानी की कमी या भूमि की कमी से निपटने के बारे में नहीं है। हाइड्रोपोनिक्स पौधों को बहुत तेज़ी से बढ़ने में मदद करता है, क्योंकि जड़ों को अब मिट्टी में पोषक तत्वों की खोज करने की आवश्यकता नहीं है और न ही उन्हें मिट्टी में कीड़े से लड़ना पड़ता है। साथ ही इस विधि से छटाई करने की समस्या खत्म हो जाती है । पौधे किसी भी ऊंचाई तक बढ़ सकते हैं और अधिकतम उपज दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, मेरे टमाटर के पौधे लगभग 10 फीट लंबे हो जाते हैं और अधिक उपज भी देते हैं। अगर सावधानीपूर्वक योजना बनाई जाए, तो इस प्रणाली का उपयोग करते हुए, 500 वर्ग फीट के सीमित स्थान में करीब एक हजार पौधे उगाए जा सकते हैं।”

राजेश्वरन की चुनौती

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टेरेस गार्डन की एक तस्वीर

राजेश्वरन की साउदर्न स्प्रिंग्स हाइड्रोपोनिक्स प्रोजेक्ट एक शौक के रूप में शुरू हुई थी और जल्द ही यह एक प्रयोगशाला में बदल गई ताकि हाइड्रोपोनिक्स के माध्यम से भोजन उगाने की पेचीदगियों को समझा जा सके। हालाँकि, इस यात्रा में कई तरह की चुनौतियाँ थीं। 

चुनौतियों के बारे में बात करते हुए वह कहते हैं, “हाइड्रोपोनिक्स में तापमान नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है। मदुरई जैसी गर्म जगह के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए थर्मल इन्सुलेशन प्रणाली और ग्रीनहाउस में तापमान नियंत्रण के लिए तकनीक पर काम करना पड़ा। पानी को लेकर भी हमेशा सावधानी बरतनी पड़ती है। वहीं यदि बिजली कट जाती है या अन्य तकनीकी मुद्दों के कारण पंप काम नहीं करता है, तो पूरी फसल घंटों में खत्म हो सकती है। हालाँकि, तकनीक ने काफी उन्नति की है। अब स्मार्टफ़ोन से जुड़े अलार्म सिस्टम मॉनिटर के ज़रिए इस समस्या से बचा जा सकता है। इसके अलावा हम अपनी पूरी प्रणाली ऑफ ग्रिड सोलर पावर से चलाते हैं ।”

राजेश्वरन की प्रणाली 600 वाट के सोलर पावर प्लांट से चलती है, जो ट्यूब में ऑक्सीकरण के लिए मोटर लगातार चलने की अनुमति देता है। वह सिंचाई ट्यूबों का उपयोग करते हैं, जो पौधों की जड़ों को पोषक तत्वों से समृद्ध करता है।

 राजेश्वरन ने 4 लाख रुपये की लागत से एनएफटी हाइड्रोपोनिक्स सिस्टम को तैयार किया है। उन्होंने अब तक इस तकनीक में रूचि रखने वाले 15 अर्बन किसानों को प्रशिक्षित किया है। वह कहते हैं, “लोकप्रिय धारणा के विपरीत, हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली को बनाए रखना आसान है।  एक बार सेट-अप स्थापित होने के बाद, आपको पोषक तत्वों के सही मिश्रण से पानी को संतुलित रखने, सही बीज प्रदान करने और पानी का सही पीएच बनाए रखने की आवश्यकता है। इसके अलावा, प्रत्येक फसल के बाद ट्यूबों को साफ करना महत्वपूर्ण है।”

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राजेश्वरन ने हाइड्रोपोनिक्स के लाभों को प्राप्त करने की उम्मीद करने वाले शुरुआती लोगों के लिए 3800 रुपये की स्टार्टर किट और 10,000 रुपये की एक जूनियर किट बनाई है। जबकि स्टार्टर की किट में एक कवर ट्रे के साथ 20 लीटर की प्लास्टिक की टोकरी, पानी को ऑक्सीकरण करने के लिए एक एयर पंप, पोषक तत्व स्तर की जांच के लिए एक टीडीएस मीटर, मास्टर सॉल्युशन के चार समूहों में विभाजित पानी में घुलनशील पोषक तत्व, बीज बोने के लिए विभिन्न प्रकार के बीज और बर्तन होते हैं। जूनियर किट एक लघु जल-संचार प्रणाली है।

अब तक, वह 60 किट बेच चुके हैं (ज्यादातर दोस्तों और परिवार के लिए) और स्थिति सामान्य होने के बाद इसे बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं।

राजेश्वरन कहते हैं, “चार साल की कड़ी मेहनत के बाद, मुझे अब भी ऐसा लगता है कि मैं रोज नई चीजें सीख रहा हूँ, और उम्मीद है कि चीजें समान्य होने के बाद, मैं अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के चरण 2 को अधिक लोगों तक पहुंचा पाउंगा। आने वाले दिनों इस तकनीक को लोगों के लिए सुलभ बनाने में जुटा हूँ।”

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Written by पूजा दास

पूजा दास पिछले दस वर्षों से मीडिया से जुड़ी हैं। स्वास्थ्य और फैशन से जुड़े मुद्दों पर नियमित तौर पर लिखती रही हैं। पूजा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है और नेकवर्क 18 के हिंदी चैनल, आईबीएन7, प्रज्ञा टीवी, इंडियास्पेंड.कॉम में सक्रिय योगदान दिया है। लेखन के अलावा पूजा की दिलचस्पी यात्रा करने और खाना बनाने में है।

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