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वरिष्ठ कवि के. डी शर्मा और प्रमोद तिवारी को विनम्र श्रधांजलि!

जो आया है उसे जाना तो है ही! पर जिस तरह वरिष्ठ पत्रकार और कवि प्रमोद शर्मा और हाहाकारी के नाम से मशहूर हास्य कवि के. डी शर्मा हमे अलविदा कह गए, ऐसे भी तो कोई नहीं जाता…

12 मार्च 2018 की भोर को एक सड़क दुर्घटना में लोकप्रिय कवि प्रमोद तिवारी और के डी शर्मा हाहाकारी की मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ जब दोनों कवि रायबरेली के लालगंज से कवि सम्मेलन में शरीक होकर कानपुर लौट रहे थे।

कानपुर के ठेठ कनपुरिया वरिष्ठ कवि, पत्रकार, कविसम्मेलनों की जान, मंच पर स्तरीय कविता और मनोरंजक कविता की दूरी घटाने वाले प्रमोद तिवारी!

मैं आवारा बादल प्रमोद जी का पहला गीत संग्रह है। इस गीत संग्रह में उन्होंने गीत से जुड़े अपने कुछ ‘आग्रहों’ को पाठको के साथ साझा किया है।

इसी का एक गीत ” मैं आवारा बादल” प्रस्तुत है –

मैं आवारा बादल
कोई रोके
तो मैं बरसूँ
वरना दुनिया
मुझको तरसे
मैं दुनिया को तरसूँ

मुझसे हवा मिली
तो बोली
देखो! हम-तुम
हैं हमजोली
आओ! झूमें, नाचंे, गायें
पर्वत की
चोटी तक जायें
मैं उसकी बातों में आया
पर्वत से जाकर टकराया
बूंद-बूंद बन
बिखर रहा हूँ
फिर धरती पर
उतर रहा हूँ
छोड़ो अब तो
बंजरपन अपना
मैं हरियाली परसूँ …

पर्वत से क्यों
टकराया था
उस पर अहंकार
छाया था
बोला, रुको!
कहीं मत जाओ
केवल मुझको
ही नहलाओ
मैंने उसकी
एक न मानी
काया कर ली
पानी-पानी
पानी, नदियों में
तालों में
पानी, आँखों में
प्यालों में
फिर भी प्यास
नहीं बुझ पाई
तुम तरसो
मैं तरसूँ…

धरती ने
आरोप लगाया
मेरे घर तू
कभी न आया
केवल सर पर ही
मंडराया
ऊपर से गरजा-गुर्राया
सच है
रूप-रंग जब-तक है
सारा मौसम
नत् मस्तक है
पर जो प्यार
किया करते हैं
तानें नहीं दिया करते हैं
इसीलिए मैं-
गरजूँ तुझ पर
तुझ-पर ही
मैं बरसूँ…

– प्रमोद तिवारी

अवध के सबसे लोकप्रिय हास्य सम्राट कवि श्री. के. डी शर्मा हाहाकारी

साहित्य जगत में इन दोनों महारथियों के चले जाने से एक गहरा खालीपन छा गया हैं, जिसे भरना मुश्किल हैं. पर साहित्य में इनके योगदान को कोई नहीं भुला सकेगा!

 

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Written by मानबी कटोच

मानबी बच्चर कटोच एक पूर्व अभियंता है तथा विप्रो और फ्रांकफिंन जैसी कंपनियो के साथ काम कर चुकी है. मानबी को बचपन से ही लिखने का शौक था और अब ये शौक ही उनका जीवन बन गया है. मानबी के निजी ब्लॉग्स पढ़ने के लिए उन्हे ट्विटर पर फॉलो करे @manabi5

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