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खेती छोड़ पाँच साल तक चलाया ट्रक, वापस लौटकर उन्नत खेती से कमाए लाखों रूपए

बिहार के मुख्यमंत्री भी उनके काम की सराहना कर चुके हैं और किसानों को उनसे प्रेरणा लेने के बारे में कह चुके हैं।

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बिहार की धरती पर बहुत कम ही ऐसे किसान होंगे, जो रामसेवक का नाम नहीं जानते होंगे। रामसेवक,बिहार के गया जिले में डोभी ब्लॉक स्थित केशापी गांव के रहने वाले हैं. 65 साल के रामसेवक के अनुसार, उनका एक संयुक्त परिवार था और शुरुआत से ही उनके पास पांच एकड़ जमीन थी। उन्होंने इस जमीन से मुनाफा कमाने की बहुत कोशिश की, लेकिन बहुत मेहनत करने के बावजूद उन्हें बहुत फायदा नहीं हुआ। वह हताश थे।

आजीविका के लिए क्या क्या करना पड़ता है ये शायद उनसे अच्छा कोई नहीं जानता है। आज वो एक सफल किसान हैं और उनके क्षेत्र में हर कोई उन्हें जानता है। लेकिन सफलता का ये सफ़र इतना भी आसान नहीं था।

Truck driver returned home for farming
बिहार के किसान रामसेवक

जब खेती छोड़ चलाना पड़ा ट्रक

रामसेवक बताते हैं कि हालात को देखते हुए आखिर पैसे के लिए उन्होंने 1985 में ट्रक चलाना शुरू कर दिया था। ट्रक चलाने के पाँच साल के दौरान वह पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के कई शहरों में गए। यहां उन्होंने देखा कि उन्नत खेती, वैज्ञानिक विधि के बल पर किसान बहुत संपन्न जिंदगी जी रहे हैं। बस यहाँ से उन्होंने तय कर लिया कि वह परदेस में ट्रक चलाने की जगह अपने गाँव लौटेंगे। और यह निश्चय उन्होंने पूरा भी किया। ठीक पांच साल बाद यानी 1990 में वह अपने गाँव केशापी लौट आए। अपने परिजनों को अपने निर्णय से अवगत कराया। उन्हें अपनी बात से सहमत किया। और नए सिरे से खेती की तैयारी शुरू कर दी।

काम शुरू करने से पहले ट्रेनिंग ली

रामसेवक के मुताबिक उन्होंने सीधे खेती शुरू करने से पहले विशेषज्ञों की राय जरूरी समझी। उन्होंने जान लिया था कि उन्नत तरीके से खेती के लिए नई विधियों का सहारा लेना होगा और इसके लिए ट्रेनिंग बेहद जरूरी है। इस कार्य में उन्होंने अपने जिले के कृषि विभाग का सहयोग लिया। विभागीय अधिकारियों ने भी उन्हें बढ़-चढ़कर सहयोग किया। उनकी आवश्यकताओं देखते हुए उन्हें झाँसी, पूसा आदि स्थानों पर ट्रेनिंग के लिए भेजा गया।

और फिर आये अच्छे दिन

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्होंने अपनी पांच एकड़ जमीन में से एक एकड़ में आम के पौधे लगा दिए। कुछ ही साल बाद फसल तैयार हो गई। बागवान के काम में उनको फायदा रहा। इसके बाद उन्होंने बागवानी के साथ ही सब्जी उत्पादन भी शुरू कर दिया। इस बार तस्वीर पहले के मुकाबले बिल्कुल उलट थी। लोगों ने उनके आर्गेनिक उत्पादों को हाथों हाथ लिया। और रामसेवक और उनके परिवार पर फायदे की बारिश होने लगी।

Truck driver returned home for farming
आम की फसल दिखाते रामसेवक

रामसेवक खेती में उन्नत तरीके अपना रहे हैं। जैसे वह ड्रिप सिंचाई विधि से खेती कर रहे हैं। इसके जरिये कम लागत में अधिक उत्पादन संभव हो चुका है। इसके साथ ही वह ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने गोबर गैस प्लांट के साथ ही वर्मी कंपोस्ट इकाई भी स्थापित की है। वह इसे बेचने के साथ ही लोगों को इसके इस्तेमाल के प्रति जागरूक भी करते हैं।

वह कई स्थानों पर किसानों को भी प्रशिक्षित कर चुके हैं। वहीं, कृषि विभाग भी उन्हें अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित करता है, ताकि उनके उन्नत तरीके से खेती करने के अनुभव का लाभ युवा भी हासिल कर सकें।

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रामसेवक की मानें तो संयुक्त परिवार सबसे बेहतर है जहाँ सभी लोग साथ काम करते हैं. उनके अपने पांच भाई हैं, बेटा और बहू, भतीजे-भतीजी, पोता-पोती सब साथ में रहते हैं। खेती के कार्य में भी यूं भी जितने हाथ होते हैं उतना फायदा है।

मुख्यमंत्री तक सराह चुके हैं काम को

रामसेवक के आर्गेनिक सब्जी और फल की बिक्री पूरे बिहार में है। उनके सब्जी उत्पादों जैसे बैंगन, तोरई, मशरूम, खीरा, मिर्च, गोभी और फल जैसे आम, आदि की खपत राज्य के भीतर ही हो जाती है। उनको अपने काम में सफलता मिल रही है। आज साढ़े पांच एकड़ जमीन में उन्हें साल का साढ़े तीन लाख से अधिक का मुनाफा है। यहां तक कि खुद बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार उनके प्लांट का निरीक्षण कर चुके हैं। उनके काम को सराह चुके हैं और अन्य किसानों को भी उनसे प्रेरणा लेने की बात कह चुके हैं।

Truck driver returned home for farming
बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार रामसेवक के खेतों का मुआयना करते हुए।

अधिक से अधिक युवाओं को है खेती से जोड़ने की इच्छा

अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में रामसेवक बताते हैं कि वह खेती में और बेहतर करना चाहते हैं। इतना कि गांव में रहने वाला युवा कम से कम पैसे कमाने के लिए शहर का रुख करने की न सोचे। इसके लिए वह प्रदेश के युवाओं को प्रशिक्षण देकर लाभदायक खेती से जोड़ने की इच्छा रखते हैं। उनके मुताबिक खेती मुनाफे का सौदा इसलिए नहीं बन पाती, क्योंकि ज्यादातर लोग परंपरागत अंदाज में खेती करते हैं। एक ही तरह जोत में फसल उगाते रहते हैं और अधिक फसल उत्पादन के लिए केमिकल का सहारा लेते हैं। इससे उत्पादन भले बढ़े, लेकिन यह खेती नुकसानदायक है और इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी नष्ट होती है। इससे बैहतर है कि मिट्टी को बढ़िया, खाद पानी दिया जाए। यह सौदा थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन इसके नतीजे बहुत बेहतर हैं। लोगों की प्रतिक्रिया भी अच्छी है, उम्मीद है कि बड़ी संख्या में युवा खेती अपनाएंगे।

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(अगर आप भी रामसेवक से खेती को लेकर सलाह मशवरा लेना चाहते हैं तो उनके मोबाइल नंबर 90972 23518 पर संपर्क किया जा सकता है)

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