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#गार्डनगिरी: छत पर उगाई 7 किलो की पत्तागोभी और टमाटर की 40 देशी किस्में!

उमेद सिंह पिछले 12 सालों से गार्डनिंग कर रहे हैं और उनके यहाँ जो भी उपज होती है, वह उनके परिवार के साथ-साथ उनके पड़ोसियों और रिश्तेदारों के यहाँ भी जाती है!

हरियाणा के भिवानी जिले में रहने वाले उमेद सिंह पिछले 12 सालों से टेरेस गार्डनिंग कर रहे हैं। उमेद सिंह के घर आपको हर मौसम की सब्ज़ी मिल जाएगी। वह अपने टेरेस गार्डन में फूलगोभी, पत्तागोभी, पालक से लेकर शिमला मिर्च, टमाटर, धनिया जैसी हर साग-सब्जी उगा रहे हैं।

उमेद सिंह बताते हैं, “मैं किसान परिवार से संबंध रखता हूँ। साल 1985 में हम शहर शिफ्ट हुए, लेकिन गार्डनिंग का शौक हमेशा रहा। साल 2008 से मैं अपने बिज़नेस के साथ-साथ नियमित तौर पर टेरेस गार्डनिंग भी कर रहा हूँ और पूरी तरह से जैविक तरीकों से सब्ज़ियाँ उगाता हूँ।”

उमेद सिंह देशी किस्म की सब्जियों के बीज भी इकट्ठा करते हैं। इन बीजों को वह अपने दोस्तों और जानने-पहचानने वालों के यहाँ भिजवाते हैं। उन्होंने अपने टेरेस गार्डन में 720 ग्राम का टमाटर और 7 किलो की बंद गोभी उगाकर रिकार्ड कायम किया था। उनके गार्डन में आपको टमाटर की 40 देशी किस्में भी मिल जाएँगी!

Umed Singh Terrace Gardener
Umed Singh, Bhiwani

द बेटर इंडिया ने उमेद सिंह से टेरेस गार्डनिंग पर खास बातचीत की, जिसका एक अंश आप यहाँ पढ़ सकते हैं!

1. अगर कोई अपना गार्डन/बगीचा लगाना चाहता है तो उसे सबसे पहले क्या करना चाहिए?

उमेद सिंह: अगर कोई पहली बार गार्डनिंग कर रहा है तो सबसे पहले तय करें कि छत पर करनी है या फिर कहीं ज़मीन पर। ज़मीन पर करनी है तो कोई खास समस्या नहीं है, उन्हें बस ज़मीन के टुकड़े को खाद मिलाकर और थोड़ी जुताई करके तैयार करें। छोटी-छोटी क्यारियां बनाकर मौसम के हिसाब से पेड़-पौधे लगा लें। छत पर आप गमलों, ड्रम और ग्रो बैग्स में गार्डनिंग कर सकते हैं।

2. अगर कोई पहली बार गार्डनिंग कर रहा है तो उन्हें किस तरह के पेड़-पौधे लगाने चाहिए?

उमेद सिंह: यदि आप पहली बार कुछ उगा रहे हैं तो गर्मियों में पुदीना से शुरू करें। फिर बैंगन, भिंडी, खीरा, ककड़ी, करेला आदि सब आसानी से उगने वाली चीज़ें हैं। आप यह सब लगा सकते हैं। अगर आप सर्दियों में सब्ज़ियां लगा रहे हैं तो सभी पत्तेदार जैसे पालक, धनिया, मेथी, और फिर टमाटर, शिमला मिर्च भी आसानी से लगा सकते हैं। अगर थोड़े और प्रयास करेंगे तो फूलगोभी, पत्ता गोभी और ब्रॉक्ली भी आसानी से लग जायेंगे।

Umed Singh Terrace Gardener

3. गार्डनिंग के लिए मिट्टी कैसे तैयार करें?

उमेद सिंह: पोटिंग मिक्स के लिए आप 60% मिट्टी और 40% खाद का इस्तेमाल करें। यदि आप कोकोपीट भी मिला रहे हैं तो तीनों को बराबर हिस्से में मिलाएं। पोटिंग मिक्स को गमले या ग्रो बैग में भरकर आप बीज लगा सकते हैं। अगर आप नहीं चाहते कि गमलों का वजन ज़्यादा हो तो आप लकड़ी का बुरादा, धान की भूसी जैसी चीज़ें भी पोटिंग मिक्स बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

4. अगर हम छत पर पेड़-पौधे लगा रहे हैं तो क्या इससे हमारी छत में लीकेज हो सकता है या फिर किसी भी तरह से यह खराब हो सकती है?

उमेद सिंह: नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। आप बस ध्यान रखें कि आपकी छत पर बहुत पानी भरा हुआ न रहे। साथ ही, सभी पेड़-पौधे आप गमलों और ग्रो बैग्स में लगाएं। छत पर सीधा मिट्टी न डालें बल्कि आप प्लास्टिक शीट इस्तेमाल कर सकते हैं।

5. गार्डनिंग करने के कुछ आसान और कम लागत के तरीके क्या हैं?

उमेद सिंह: कम लागत के लिए अच्छा तरीका एक तो यह है कि आप अपने सभी गमले पुरानी-बेकार चीज़ों से बनाएं। जैसे बाल्टी, डिब्बे, कांच की बोतलें, टूटे मटके और तो और किचन की टूटी क्रॉकरी और बर्तन भी आप उपयोग में ले सकते हैं। ग्रो बैग भी खरीदने की बजाय आप उन पैकेट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे आटे का, दाल-चावल का। इसके अलावा आप पुराने कपड़ों जैसे जीन्स आदि से भी प्लांटर्स बना सकते हैं।

6. पौधों को पानी देने के कुछ ऐसे तरीके, जिससे कि पानी बर्बाद न हो?

उमेद सिंह: पानी देने का सबसे अच्छा तरीका ड्रिप-इरिगेशन सिस्टम है। इससे एक बूंद पानी भी बर्बाद नहीं होता बल्कि आजकल तो आप टाइम भी सेट कर सकते हैं। अगर आपको बड़े स्तर पर बागवानी करनी है तो आप यह इंस्टॉल करा सकते हैं।

7. गार्डनिंग शुरू करने का सबसे बेहतर समय कौन-सा है?

उमेद सिंह: पेड़-पौधे लगाने के लिए 12 महीने उपयुक्त समय रहता है। बस ध्यान रहे कि आप मौसम के हिसाब से पेड़-पौधे लगाएं। गर्मी वाली सब्ज़ियां आप 15 फरवरी के बाद लगा सकते हैं जैसे सभी बेल वाली सब्ज़ियां- तोरी, खीरा, लौकी, पेठा आदि। सर्दियों वाली फसलें आप सितंबर के अंत से लगा सकते हैं जैसे टमाटर, शिमला मिर्च, धनिया, पालक, मूली, गाजर आदि।

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8. पेड़-पौधों की देखभाल कैसे करें, कब पानी दें और कितनी धूप उनके लिए ज़रूरी है?

उमेद सिंह: देखभाल के लिए आप ध्यान रखें कि आप पेड़ों के पत्ते लगातार देखते रहें। पत्तों में कोई बदलाव जैसे कोई दाग-धब्बे तो नहीं हैं। बहुत बार कीड़े पत्ते के नीचे बैठकर नुकसान करना शुरू कर देते हैं। इसलिए लगातार पेड़ के पत्तों और तने को देखते रहें।

9. कोई घरेलू नुस्खा बताइए जिससे पेड़-पौधों को पोषण दिया जा सकता है?

उमेद सिंह: आप घर पर खाद बना सकते हैं। आप सबसे पहले तो किचन के गीले कचरे और छिलके आदि को इकट्ठा करना शुरू करें। इससे आप लिक्विड खाद और सूखी खाद दोनों बना सकते हैं।

इसके साथ, आप केले के छिलकों से स्प्रे बना सकते हैं। खट्टी लस्सी आप इस्तेमाल कर सकते हैं। आप मटके में एक लीटर दही, एक लीटर पानी, थोड़ा-सा काला नमक डालकर इसे मिट्टी में दबा दें। इसका मुंह किसी कपड़े से बंद कर दें।

एक हफ्ते में जब इसमें फेरमेंटशन होना शुरू हो जाये तो आप इसे निकाल कर चार से पांच गुना अधिक पानी में मिला लें। आप इस लिक्विड को अब हर रोज़ अपने पौधों में दे सकते हैं। यह आप लगातार कर सकते हैं।

पेस्ट रोकने के लिए आप नीम के पत्ते उबालकर, इस पानी को स्प्रे की तरह इस्तेमाल करें। नीम के साथ आक-धतूरे के पत्ते भी आप पानी में उबाल सकते हैं। इसे आप डिब्बे में बहकर छह महीने तक रख सकते हैं। अदरक-लहसुन-हल्दी का पेस्ट बनाकर भी रखें और हल्का-हल्का स्प्रे कर लीजिये।

Umed Singh Terrace Gardener

10. अंत में, हमारे पाठकों के लिए कुछ ज़रूरी टिप्स!

उमेद सिंह: मैं सभी से यही कहना चाहूंगा कि गार्डनिंग करना बिलकुल भी मुश्किल नहीं है। आपको बस उचित समय देना है और सही मेहनत करनी है। हर हफ्ते आप अपने पेड़-पौधों को माइक्रोनुट्रिएंट दें और साथ ही, जैविक खाद और उर्वरक भी। इससे सब्ज़ियों का अच्छा विकास होगा और ये पोषण से भरपूर होंगी।

पेड़-पौधों के शौक़ीन लोग लगातार उमेद सिंह से संपर्क करते रहते हैं। कुछ समय पहले उन्होंने अपने गार्डनिंग के तरीकों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाने के लिए यूट्यूब चैनल भी शुरू किया है। 

उमेद सिंह का यूट्यूब चैनल फॉलो करने के लिए यहाँ क्लिक करें और आप 9728100050 पर उनसे संपर्क कर सकते हैं!

अगर आपको भी है बागवानी का शौक और आपने भी अपने घर की बालकनी, किचन या फिर छत को बना रखा है पेड़-पौधों का ठिकाना, तो हमारे साथ साझा करें अपनी #गार्डनगिरी की कहानी। तस्वीरों और सम्पर्क सूत्र के साथ हमें लिख भेजिए अपनी कहानी hindi@thebetterindia.com पर!

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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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