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खेती शुरू करने पर लोगों ने उड़ाया मजाक, नहीं हारी हिम्मत, अब पुरुषों को भी दे रहीं ट्रेनिंग!

नीलिमा के लिए कभी एक वक़्त की रोटी मिलना भी मुश्किल था, पर आज वह हजारों ज़िंदगियाँ बदल रही हैं।

झारखंड के लोहरदगा की महिला किसान नीलिमा ने समाज की रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है। महज दसवीं पास होने के बावजूद नीलिमा ने जिस तरीके से समाज को एक नई दिशा दिखाई है, वह हमारे लिए एक उदाहरण है।

पिछले कुछ वर्षों में देश के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर महिलाओं की भागीदारी में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं, लेकिन बात जब कृषि कार्यों में महिलाओं की भागीदारी की होती है, तो ज्यादातर महिलाओं को मज़दूर ही समझा जाता है।

महिलाओं को कृषि आधारित कार्यों में न तो कोई प्रशिक्षण दिया जाता है और न ही कोई पहचान, लेकिन झारखंड की एक आदिवासी महिला किसान नीलिमा टिग्गा ने इन मिथकों को तोड़ते हुए कृषि के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। आलम यह है कि नीलिमा सिर्फ क्षेत्र की  महिला किसानों को ही नहीं, बल्कि पुरुषों को भी खेती की बारीकियाँ सिखा रही हैं।

Nilima Tigga
नीलिमा टिग्गा

नीलिमा झारखंड के लोहरदगा ज़िले के कुड़ू की रहनेवाली हैं और वह पिछले 16 वर्षों से कृषि कार्यों से जुड़ी हुई हैं। दसवीं पास नीलिमा को कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। 

वर्तमान समय में वह लोहरदगा के 65 गाँवों के 10 हजार से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दे रही हैं। इसके साथ ही, उनकी संस्था शंख धारा महिला विकास मंडलभी हजारों महिलाओं की जिंदगी को एक नया ध्येय देने में सार्थक भूमिका अदा कर रही है।

सफर नहीं था आसान

नीलिमा को इस मुकाम को हासिल करने के लिए कई पारिवारिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, क्योंकि साल 2004 में नीलिमा के सास-सुसर ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था। जिसके बाद उनकी स्थिति काफी दयनीय हो गई थी।

नीलिमा ने द बेटर इंडिया को बताया, “मेरे सास-ससुर ने मुझे अपने पति और बच्चे के साथ घर से बाहर निकाल दिया था। जिसके बाद हमें एक वक्त के खाने के लिए भी कड़ा संघर्ष करना पड़ा, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और इसी क्रम में प्रदान एनजीओ से जुड़ गई। यहाँ मैंने आधुनिक विधि से खेती करने की ट्रेनिंग ली।

नीलिमा और उनके पति के पास एक एकड़ जमीन थी, इस पर जो उपज होती थी, उससे मुश्किल से साल के तीन-चार महीने तक खाने का इंतज़ाम हो पाता था। लेकिन, आधुनिक तरीके से खेती करने के कारण जो उपज हुई, वह लगभग डेढ़ वर्षों तक चली। 

इस बारे में वह कहती हैं, “पारंपरिक तरीके  से खेती करने पर पहले महज 4-5 क्विंटल धान होता था, लेकिन श्रीविधि जैसी उन्नत किस्म की धान की खेती करने के बाद 35 क्विंटल उपज हुई, यानी पहले से सात गुना अधिक। इसके साथ ही, मैंने आधुनिक तरीके से तिलहन और सब्जियों की भी खेती की और उपज इतनी अच्छी थी कि इससे प्रभावित होकर गाँव के अन्य किसानों ने भी मुझसे ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी।”

बता दें कि नीलिमा ने खेती की ट्रेनिंग के लिए जब घर से बाहर निकलना शुरू किया तो गाँव वालों ने उनका काफी मज़ाक उड़ाया था। लेकिन, नीलिमा को पूरा यकीन था कि जो लोग उनका मज़ाक उड़ा रहे हैं, वही एक दिन उनकी तारीफ भी करेंगे। वह इसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ीं और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

महिलाओं को सशक्त बनाने की छेड़ी मुहिम

Nilima Tigga
लोहरदगा में स्वयंसेविकाओं को प्रशिक्षण देती नीलिमा टिग्गा

नीलिमा ने क्षेत्र की महिलाओं को हर स्तर पर सशक्त कर समाज के विकास को गति देने के लिए वर्ष 2008 में शंख धारा महिला विकास मंडल, कुड़ूकी स्थापना की। यह संस्था गाँव-गाँव जाकर लोगों की समस्याओं का निदान करती है। इसके तहत ग्रामीण स्तर पर एक ग्रामीण अधिकारी (वीओ) को नियुक्त किया गया है, जबकि इसके अधीन चार उपसमितियां हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • अधिकार एवं न्याय समिति 
  • आर्थिक लेन-देन समिति 
  • खेतीबाड़ी सहयोग समिति
  • महिला मंडल सुधार समिति

ये उपसमितियां किसी भी समस्या के संबंध में अपने वीओ को बताती हैं और आगे की प्रक्रिया के लिए वीओ ही जिम्मेदार होता है। यदि वीओ मामले को सुलझाने में असमर्थ है, तो इसकी जानकारी दो-तीन पंचायतों को मिलाकर बनाए गए कलस्टर या प्रखंड संचालक को दी जाती है।

इसके विषय में नीलिमा कहती हैं, “शंख धारा महिला विकास मंडल का उद्देश्य जिले की सभी महिलाओं को एकजुट कर क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देना है। जब मैंने महज 150 स्वयंसेवी दीदियों के साथ इस फेडरेशन की स्थापना की थी, तो कभी सोचा नहीं था कि आगे चलकर इसका इतना विस्तार होगा।

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वह आगे कहती हैं, “हम न सिर्फ लोगों को सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करते हैं, बल्कि किसानों को उन्नत बीज, मिश्रित खेती और मिट्टी के अनुसार खेती, आदि जैसे महत्वपूर्ण विषयों में जानकारी भी देते हैं, ताकि कम जमीन पर भी अच्छी उपज हो। इसके साथ ही, रोजगार को बढ़ावा देने के लिए उत्पादों के मार्केटिंग की व्यवस्था भी जाती है।

इस कड़ी में उनकी सहकर्मी संगीता चौहान कहती हैं, “हमारा उद्देश्य महिलाओं को जागरूक करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोज़गार पैदा करना है। यह एक ऐसा इलाका है, जहाँ शिक्षा का व्यापक अभाव है। इसके बावजूद, नीलिमा दीदी के निरंतर प्रयासों का फायदा पूरे समाज को मिल रहा है।

Nilima Tigga
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर एक समारोह में हिस्सा लेती नीलिमा टिग्गा

वर्ष 2013 में शंख धारा महिला विकास मंडल, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रोमोशन सोसाइटी से जुड़ गई और संस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए लोहरदगा के 14 प्रखंडों को तीन भागों में बाँटते हुए, इसके हर ब्लॉक में एक संचालक को नियुक्त किया गया है। वर्तमान समय में इस संस्था से 18 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं और नीलिमा का लक्ष्य अगले दो वर्षों में इससे 50 हजार से अधिक महिलाओं को जोड़ने का है।

बच्चों की शिक्षा पर भी दिया ज़ोर

नीलिमा को बच्चों की शिक्षा को लेकर भी एक विशेष लगाव है और उनकी फेडरेशन की अधिकार एवं न्याय समितिके तहत स्कूलों के क्रियाकलापों की भी निगरानी की जाती है, जैसे कि स्कूल में शिक्षक नियमित समय पर आ रहे हैं या नहीं, बच्चों को मध्यान भोजन का लाभ मिल रहा है या नहीं, आदि। इसके अलावा, नीलिमा अपने गाँव के शिक्षा का अधिकार समिति के अध्यक्ष भी हैं।

इस विषय में नीलिमा कहती हैं, “मेरा लक्ष्य है कि गाँव में कोई भी अशिक्षित न रहे। कमजोर वर्ग के लोगों के लिए शिक्षा सबसे अहम हथियार है, क्योंकि सक्षम वर्ग के लोगों के लिए नौकरी और व्यवसाय में कोई दिक्कत नहीं आती है। जबकि, गरीब लोगों के लिए अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना आसान नहीं है। इसलिए, हमें सरकारी स्कूलों की हालात सुधारनी होगी। यही वजह है कि मैं शिक्षा संबंधी कार्यों से जुड़ी हूँ।

उन्होंने बताया, “कोरोना महामारी को लेकर जारी देशव्यापी लॉकडाउन के कारण आज बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है, लेकिन ग्रामीण तबके में संसाधनों के व्यापक अभाव की वजह से शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है, इससे निपटने के लिए हम एक फेलोशिप की शुरुआत कर रहे हैं, जिसके तहत गाँव में बच्चों को छोटे-छोटे समुदायों में बाँट कर ऑनलाइन शिक्षा दी जाएगी।”

पैसा कमाना नहीं रहा उद्देश्य

समाज के प्रति अपने इस समर्पण को लेकर नीलिमा कहती हैं, “जरूरतमंदों की मदद कर पैसा कमाना कभी मेरा उद्देश्य नहीं रहा है। लोगों की मदद करने से मुझे एक सुकून मिलता है। क्योंकि पहले जिन लोगों की दैनिक आय एक रुपये भी नहीं थी, वे हमसे जुड़कर आज अच्छी जिंदगी जी रहे हैं, मुझे इससे ज्यादा और क्या चाहिए।

इस कड़ी में स्वयंसेवी आलूमनी टिप्पो बताती हैं कि वह एक विधवा हैं और एक समय उनके घर की स्थिति इतनी नाजुक हो गई थी कि मजबूरी में उन्हें दाई का काम करना पड़ा था। 2008 में जब शंख धारा महिला विकास मंडल की स्थापना हुई तो वह भी इससे जुड़ गई। इस संस्था ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। आज स्थिति यह है कि वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के साथ ही बेहतर जीवनयापन भी कर रही हैं। ये सब नीलिमा दीदी के प्रयासों से ही संभव हुआ है।

Nilima Tigga
लोहरदगा में स्वयंसेविकाओं के साथ बैठक में जाती नीलिमा टिग्गा

बेशक, समाज के विकास में बाधा बनने वाली चीजों को हल करना काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है, इसलिए नीलिमा हर दिन कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहती हैं, क्योंकि नए कौशल और तकनीक को सीखे बिना इतने बड़े पैमाने पर लोगों की जिंदगी को बदलना आसान नहीं है।

नीलिमा टिग्गा जैसी महिलाओं की सोच ही हमारे समाज की दशा और दिशा को बदलने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। क्योंकि, हर क्षेत्र में, हर स्तर पर, महिलाओं की बराबर की भागीदारी के बिना कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता है और निश्चित तौर पर, नीलिमा जैसी महिलाओं का प्रयास इस दिशा में एक बड़े बदलाव की बुनियाद है।

नीलिमा टिग्गा से 9199465112 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।

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Written by कुमार देवांशु देव

राजनीतिक और सामाजिक मामलों में गहरी रुचि रखनेवाले देवांशु, शोध और हिन्दी लेखन में दक्ष हैं। इसके अलावा, उन्हें घूमने-फिरने का भी काफी शौक है।

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