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शौक को बनाया व्यवसाय, लोगों को स्वादिष्ट चटनियाँ खिला रहीं हैं ‘चटनी चाची’!

“अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी है कि जिस पल आपके दिल में व्यवसाय का ख्याल आए उसी पल से काम पर लग जाओ।”

भी भारतीय घरों में स्वादिष्ट पकवान, साग-सब्जियों के बीच भी तरह-तरह की चटनियों की अपनी ही अलग पहचान है। किसी घर में सब्ज़ी की जगह चटनी चटखारे लेकर खाई जाती है तो कहीं सब्ज़ी के साथ थाली में परोसी जाती है। हमारी माँ, ताई-चाची, हर कोई यह चटनियां बनाने में पारंगत हैं। लेकिन अगर कोई इस चटनी के स्वाद को ही अपनी पहचान बना ले तो? जी हां, सुनने में शायद अटपटा लगे लेकिन मुंबई की अनिंदिता सेंगर ने यही किया।

बचपन से ही खाना बनाने की, या फिर यूं कहें कि खाने के साथ एक्सपेरिमेंट करने की शौक़ीन रहीं अनिंदिता ने पिछले साल अपना छोटा-सा स्टार्टअप शुरू किया- चटनी चाची। घर से चल रहे अपने इस स्टार्टअप से ज़रिए वह लोगों को अलग-अलग जैविक सब्जियों से बनाई गईं चटनियां खिलातीं हैं। भले ही अभी उनके स्टार्टअप की सिर्फ शुरूआत है लेकिन उन्हें उनके उत्पादों के लिए लोगों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और अनिंदिता, अपने इस व्यवसाय को एक ब्रांड नाम बनाने का संकल्प कर चुकीं हैं।

द बेटर इंडिया से उनसे उनके सफ़र के बारे में बात की।

Anindita Sanger with her Daughter

साइकोलॉजी की पढ़ाई करने वाली अनिंदिता सेंगर ने कुछ वक़्त तक साइकोलोजिस्ट के तौर पर काम किया और फिर एक कॉर्पोरेट कंपनी में एचआर की पोस्ट पर। शादी के बाद, उनके पति की पोस्टिंग चीन के शंघाई शहर में हो गई और अनिंदिता भी उनके साथ वहीं शिफ्ट हो गईं। वह बताती हैं, “हम चार साल चीन में रहे। वहां बाहर काम करने के लिए मेरे पास कोई वर्क परमिट नहीं था और इसलिए मैंने अपना खुद का एक छोटा-सा किचन, ‘रोटी’ वहां शुरू किया। यहां मैं ग्राहकों को भारतीय सब्ज़ी, चटनी, और अचार वगैरह परोसती थी। साल 2017 में हम भारत वापस आ गए।”

भारत लौटकर अनिंदिता ने कोशिश की कि वह अपने ‘रोटी’ किचन को चलायें लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली। इसलिए उन्होंने एक कंपनी में साइकोलोजिस्ट की नौकरी ले ली। लेकिन इस नौकरी में उनका मन बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि उन्हें लग रहा था कि कुछ तो है जो उनकी ज़िंदगी में नहीं है। जॉब की और घर की जिम्मेदारियों के बीच वह खाने के साथ एक्सपेरिमेंट करने के अपने शौक को नहीं जी पा रहीं थीं। हालांकि, कुछ महीनों तक जॉब करने के बाद उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी। इसकी वजह थी उनकी प्रेगनेंसी।

उन्होंने बताया, “मैं 4 माह की प्रेग्नेंट थी जब मैंने वह जॉब छोड़ी। इसके बाद मैं घर पर कुछ न कुछ करती रहती। मुझे अलग-अलग कुछ खाने का मन होता तो खुद किचन में पहुंचकर तरह-तरह की चीजें बनातीं। डिलीवरी के बाद भी मैं हर रोज़ कुछ नया बनाती और साथ में अपने दोस्तों के यहां भी भिजवाती। एक दिन, अचानक से मेरी एक दोस्त ने मुझसे कहा, ‘तू इतनी अच्छी चटनी, सॉस, अचार-जैम बनाती है, तो तू खुद का अपना बिज़नेस क्यों नहीं शुरू कर लेती।’ उसी ने मुझे पहला ऑर्डर भी दिया।”

Chutney Chachi

बस वहीं से अनिंदिता का सफ़र शुरू हो गया। एक दोस्त के बाद, दूसरे जानने वाले ने फिर तीसरे- ऐसा करते-करते उन्हें ऑर्डर्स मिलने लगे। अनिंदिता के पति ने उनके इस सफर में उनका पूरा साथ दिया। यहाँ तक कि ‘चटनी चाची’ नाम भी उन्होंने ही सुझाया। उनकी एक दोस्त ने लोगो डिज़ाइन किया और धीरे-धीरे उनका स्टार्टअप अपने सोशल सर्किल से निकलकर प्रोफेशनल ब्रांड्स तक पहुंचा। अनिंदिता की शुरूआत बहुत ही बेसिक, पुदीने की चटनी से हुई। जिसे वह पहले प्लास्टिक के डिब्बे में पैक करके देती थीं।

अनिंदिता बताती हैं, “उस डिब्बे पर शुरू-शुरू में मैंने अपने लोगो के प्रिंटआउट लेकर सेलो टेप से चिपकाए। लोगों को मेरे प्रोडक्ट्स अच्छे लगते और वे दूसरों को ट्राई करने के लिए कहते। इस तरह से मुझे काफी ऑर्डर्स मिले। फिर मैंने और भी विकल्प तलाशना शुरू किया जैसे कि अगर मैं कहीं स्टॉल लगा सकती हूं। इसके लिए मैंने सबसे पहले जुहू के फार्मर्स मार्किट में पता किया लेकिन वहां मुझसे कहा गया कि आप सिर्फ अपने जैविक उत्पाद ला सकती हैं।”

तब तक अनिंदिता ‘फार्म फ्रेश’ सब्जियों से चटनी बना रहीं थीं उन्होंने जैविक के बारे में इतना नहीं सोचा था। लेकिन इसके बाद उन्होंने जैविक खेती, सब्ज़ी-फल आदि पर पढ़ना शुरू किया। उन्होंने फैसला किया कि अब वह सिर्फ जैविक सब्ज़ी और फल ही अपने उत्पादों के लिए उपयोग करेंगी। इसी तरह उन्होंने अपनी पैकेजिंग पर काम किया और प्लास्टिक को छोड़कर उन्होंने कांच के जार खरीदे। अनिंदिता कहतीं हैं कि उन्होंने एक दम से कुछ भी नहीं किया, ना कोई बड़ी इन्वेस्टमेंट की और न ही अचानक से ढेर सारे प्रोडक्ट्स बना लिए। जैसे-जैसे वह सीखतीं गईं, वैसे-वैसे उन्होंने अपने व्यवसाय में बदलाव किए।

Her Products

फ़िलहाल, अनिंदिता चार तरह की मुख्य चटनी देती हैं- पुदीना, टमाटर-लहसुन, धनिया और हरी मिर्च। इसके अलावा, वह सीजन स्पेशल बनाती हैं जैसे आम की चटनी, सेब की लौंजी, सेब और मिर्च का जैम आदि। 8-9 महीने में उन्होंने लगभग 450 ऑर्डर पूरे किए। निजी ऑर्डर्स के अलावा उनके बड़े ग्राहकों की सूची भी बढ़ी है जैसे वाइट आर्गेनिक, वी वर्क, और शरण मार्किट में भी स्पेशल ऑर्डर्स पर उनके प्रोडक्ट्स गए हैं। वह बताती हैं कि उनके सभी उत्पाद जैविक हैं और सस्टेनेबल पैकेजिंग के साथ मिलते हैं।

साथ ही, वह पहले से कुछ भी नहीं बनाकर रखतीं, जैसे ही उन्हें ऑर्डर मिलता है, वह ताजा जैविक सब्ज़ी खरीदती हैं और चटनी बनातीं हैं। यही उनके व्यवसाय की यूएसपी है- गुणवत्ता और स्वाद। अनिंदिता ने कहा, “मुझे अगर कभी जैविक सब्ज़ी नहीं मिली हैं तो मैं दूसरी जगह से सब्ज़ी नहीं लेती हूं। बल्कि मैं अपने ग्राहक को एक-दो दिन रुकने का कहतीं हूं ताकि मैं उन्हें वही उत्पाद दे सकूं जिसका मैं दावा कर रही हूं। भले ही उन्हें पता न चले कि मैंने कौन-सी सब्ज़ी इस्तेमाल की लेकिन यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं अपने ग्राहकों के साथ ईमानदार रहूं तभी मैं आगे बढ़ सकती हूं।”

हालांकि, लॉकडाउन के दौरान उनका बिज़नेस रुक गया लेकिन अनिंदिता इस वक़्त को अपने स्टार्टअप को रिडिज़ाइन करने में लगा रही हैं। उनके मुताबिक पिछले 8-9 महीनों में उन्होंने अच्छे से अपने स्टार्टअप को चलाया और इससे उन्हें विश्वास है कि वह इसे बड़े स्तर पर ले जा सकती हैं। इसके साथ ही, उन्होंने तय किया है कि उनका स्टार्टअप सिर्फ उनकी पहचान और पैसे कमाने का ज़रिया नहीं रहेगा बल्कि वह चाहती हैं कि इसके ज़रिए वह समाज के लिए अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं। चटनी चाची का ‘चाची’ शब्द कहीं न कहीं देश की हर महिला को एक पहचान देता है और इसके ज़रिए, अनिंदिता महिलाओं को रोज़गार के अवसर देना चाहती हैं।

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“पहले मेरे घर में जो हेल्पर दीदी थीं, वही मेरी हर काम में मदद करती थीं। उनकी सैलरी के अलावा, मैं उन्हें ‘चटनी चाची’ के काम के लिए अलग से पैसे देती थी। इससे उन्हें काफी मदद हुई और मुझे अहसास हुआ कि अगर इतने छोटे स्तर पर काम करते हुए भी मैं एक महिला को कुछ एक्स्ट्रा मदद कर पा रहीं हूँ। अगर यहीं मैं बड़े स्तर पर इसे लेकर जाऊं तो मैं और भी महिलाओं की मदद कर सकती हूँ,” उन्होंने बताया।

उनका दूसरा उद्देश्य है किसानों से सीधा संपर्क। लॉकडाउन के दौरान अनिंदिता को अहसास हुआ कि किस तरह बिचौलिये किसानों तक उनकी मेहनत का सही दाम नहीं पहुचने देते। इसलिए, अब वह मुंबई के आस-पास जैविक किसानों से बात कर रही हैं ताकि सीधा उनसे जुड़ सकें। इसके अलावा, वह अपनी प्रोडक्ट लाइन बढ़ाने के लिए नई रेसिपीज पर भी काम कर रही हैं।

बेशक, अनिंदिता सेंगर और उनका छोटा-सा स्टार्टअप, चटनी चाची, हर उस गृहिणी के लिए प्रेरणा है जो अपना कुछ करना चाहती है। अपने हुनर को अपनी पहचान और कमाई का ज़रिया बनाना चाहती है। बस ज़रूरत है तो एक दृढ़ संकल्प की कि मुझे यह करना है। अन्य महिलाओं के लिए अनिंदिता यही सन्देश देती हैं, “अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी है कि जिस पल आपके दिल में व्यवसाय का ख्याल आए उसी पल से काम पर लग जाओ। जब तक आप कल पर छोड़ते रहेंगे, तब तक कुछ नहीं होगा। इसलिए, काल करे सो आज कर, आज करे सो अब!”

साथ ही, हम आपके साथ साझा कर रहे हैं ‘चटनी चाची’ की किचन से खास ‘नेपाली काकरो अचार’ यानी कि खीरे के अचार की रेसिपी:

क्या चाहिए: खीरा (स्लाइस), तिल, मेथी के दाने, हल्दी, हरी मिर्च, निम्बू का रस और नमक।

कैसे बनाएं: सबसे पहले तिल को भून लें और अब इसे निम्बू के रस के साथ पीसें। इस पेस्ट को नमक के साथ खीरे के स्लाइसेस पर डालें और अच्छे से मिलाएं। अब एक पैन में तेल लें, और इसमें मेथी के दाने और मिर्च डालें। जब दाने एकदम भून जाएं तो इसमें हल्दी मिलाएं। कुछ सेकंड्स तक पकाने के बाद इसमें खीरे के स्लाइसेस डाल दें। आपका नेपाली काकरो का अचार तैयार है!

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अधिक जानकारी के लिए आप अनिंदिता सेंगर को उनके इंस्टाग्राम पर फॉलो और मैसेज कर सकते हैं!


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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