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केरल के इस शख्स ने छत पर उगाई 50 से अधिक आमों की किस्में, एक को दिया पत्नी का नाम!

जोसेफ ने आम की एक नई किस्म का ईजाद करते हुए, इसे अपनी पत्नी के नाम पर ‘पेट्रीसिया’ नाम दिया। इसके बारे में वह कहते हैं कि यह सबसे मीठा किस्म का आम है।

र्नाकुलम के रहने वाले जोसेफ फ्रांसिस को बागवानी का इतना शौक है कि वह लगभग 40 किस्मों के पेड़ उगाने के साथ-साथ अपने परिसर में मछली पालन भी करते हैं। क्या यह अपने आप में एक बड़ी बात नहीं है?

महज 5 सेंट की ज़मीन (2178 वर्ग फुट), जिसमें कि 1800 वर्ग फुट में जोसेफ का भी घर है, वह यह सबकुछ अपनी छत और बाकी जमीन पर करते हैं!

यह कैसे शुरू हुआ?

63 वर्षीय जोसेफ, पेशे से एक एसी तकनीशियन हैं और वह किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनपर खेती का ऐसा जुनून सवार है कि अपनी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद वह पिछले 20 वर्षों से लगातार खेती के कार्यों के लिए अपना समय निकाल रहे हैं।

उन्होंने इसकी शुरूआत गुलाब के साथ की, और रंग-बिरंगे फूलों और मशरूम की खेती करने के बाद जोसेफ को अहसास हुआ कि आम उनके लिए भाग्यशाली फल है।

Joseph Francis on his terrace

जोसेफ बताते हैं ,“फोर्ट कोच्चि में मेरे नाना के घर, मेरे मामा ने पूरे भारत से गुलाब के पौधे लाए थे। यहां तक कि उस समय ग्राफ्टिंग वाले गुलाब केवल बेंगलुरु में देखे जा सकते थे और केरल में यह ना के बराबर पाया जाता था, तो ऐसे वक्त में भी हमारे कोच्चि के घर में इसका एक बड़ा संग्रह था। मुझे वास्तव में इसी से प्रेरणा मिली। इसलिए जब मैं अपनी पत्नी के साथ अपने घर में रहने लगा, तो हमने गुलाबों की खेती करनी शुरू की।”

कई नकदी फसलों और यहां तक ​​कि मशरूम की खेती में अपना हाथ आजमाने के बाद, जोसेफ ने एक एक्सपो में देखा कि वहां थैलियों में आम उगाए जा रहे हैं, इसके बाद उन्होंने आम की खेती करने का फैसला किया।

इस विषय में जोसेफ कहते हैं, “मैंने सोचा कि यदि वे थैलियों में आम उगा सकते हैं, तो मैं भी अपनी छत पर आम की कुछ किस्मों को उगाने के लिए कुछ जगह का उपयोग कर सकता हूं।”

लेकिन, जोसेफ ने अपनी छत पर आम उगाने के लिए थैलियों का इस्तेमाल ना कर, आधे कटे हुए पीवीसी ड्रम का उपयोग करने का फैसला किया। उन्होंने पानी के अतिरिक्त प्रवाह के लिए तल पर बने चीरों के साथ, इन ड्रमों को एक स्टैंड पर खड़ा कर दिया, ताकि इसे आसानी से इधर-उधर ले जाया जा सके।

जोसेफ का बाग

यह जोसेफ के फैसले का ही नतीजा है कि आज उनका छत पूरे भारत के आमों की 50 से अधिक किस्मों का घर है – इसमें कुछ में साल में दो बार फल लगते हैं, तो कुछ में हर मौसम में।

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इसके साथ ही, जोसेफ ने ग्राफ्टिंग तकनीक के तहत अपनी खुद की भी एक आम की किस्म को ईजाद किया है। उन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर इसे ‘पेट्रीसिया’ नाम दिया है. जोसेफ का दावा है कि आम की यह किस्म सबसे ज्यादा मीठी है। अल्फोंसो, चंद्राकरन, नीलम, मालगोवा जैसी कई अन्य लोकप्रिय किस्में हैं, जो उनके छत पर पाई जाती है।

छत पर आमों की इतनी किस्मों की खेती करने के कारण, जोसेफ की छत अब दर्शनीय स्थल बन गई है। यहाँ हर रविवार को कम से कम 20 लोग इसे देखने के लिए आते हैं। वहीं, जो आम के इन पौधों को खरीदना चाहते हैं, वे 2500 रुपये से लेकर 10,000 रुपये की लागत तक इसे खरीद भी सकते हैं।

जोसेफ आगे कहते हैं “इन पौधों का रखरखाव सबसे चुनौतीपूर्ण और सबसे जरूरी पहलू है. इसके लिए मैंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली का तरीका अपनाया है, ताकि पौधों की सिंचाई के लिए समुचित व्यवस्था हो सके। पेड़ों की लंबाई अब 9 फीट के आस-पास हो गई है, इसलिए जड़ें बहुत मजबूत हो चुकी हैं। यही कारण है कि ड्रम में चारों ओर मिट्टी को स्थानांतरित करने के लिए, मैं इसमें एक बिंदु बनाता हूँ, ताकि नमी और पोषण के लिए जगह हो।”

How to Grow Mango

आम के अलावा, छत पर कटहल, रामबूटन, पपीता, सापोटा और सब्जियां जैसे करेला, गोभी, टमाटर आदि भी उगाए जाते हैं। जोसेफ इसका उपयोग घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए करते हैं। उन्होंने एक्वापोनिक्स का उपयोग करके ऑर्किड की 50 से अधिक किस्मों के खेती करने के लिए भी एक क्षेत्र निर्धारित किया है और उन्होंने साथ में मछली पालन में भी निवेश किया है।

इस कड़ी में वह बताते हैं, “मैंने शुरुआत में लगभग 250 किस्मों के गुलाबों की खेती की और आज मैं आम की खेती कर रहा हूं। इससे मेरा मकसद कभी लाभ कमाना नहीं रहा. आज भी मैं अपने उत्पादों को दोस्तों, रिश्तेदारों और आगंतुकों को मुफ्त में दे देता हूं, क्योंकि, खेती का वास्तविक आनंद अपने उत्पादों का आनंद किसी दूसरे को देने में है।”

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ऐसे में, अपने घरों में सीमित स्थान को लेकर अक्सर शिकायत वाले लोगों के समक्ष एक नजीर पेश करते हुए, जोसेफ ने साबित किया है कि खेती किसी के लिए भी और कहीं भी संभव है!

मूल लेख: सेरेन सारा ज़कारिया


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Written by कुमार देवांशु देव

राजनीतिक और सामाजिक मामलों में गहरी रुचि रखनेवाले देवांशु, शोध और हिन्दी लेखन में दक्ष हैं। इसके अलावा, उन्हें घूमने-फिरने का भी काफी शौक है।

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