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इंदौर के IAS ने सरस्वती नदी के 2 किमी इलाके को बनाया 100% मैला मुक्त, जानना चाहेंगे कैसे?

सरस्वती नदी का दो किलोमीटर का इलाका पूरी तरह मैला मुक्त और जलीय जीवन से संपन्न हैं। इसका पूरा श्रेय इंदौर नगर आयुक्त, आशीष सिंह को जाता है।

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क समय में, खान नदी और उसकी सहायक नदी, सरस्वती इंदौर की विरासत मानी जाती थी। लेकिन 70 के दशक में तेजी से हुए औद्योगिक उछाल, बढ़ती आबादी और नदी के पास बस्तियों के बसने के साथ नदी में सीधा घरेलू कचरा फेंकना और खुले में शौच आम हो गया जिसके परिणामस्वरूप नदी दूषित होने लगी।

लेकिन इंदौर के नगर आयुक्त, आशीष सिंह और उनकी टीम के प्रयासों के कारण, इंदौर के बीच से बहने वाली सरस्वती नदी के दो किलोमीटर के हिस्से को 100 प्रतिशत मैला मुक्त बनाया गया है। यह 28 सीवेज लाइनों से होने वाले बहाव को कार्यात्मक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के माध्यम से उपचारित कर किया गया है।

आशीष सिंह ने द बेटर इंडिया को बताया, “नदी के लिए यह क्लीनअप मॉडल एक चीज़ के कारण अलग है और वह इसकी आठ एमएलडी (लाखों लीटर प्रति दिन) सीवेज को साफ पानी में रीसायकल करने की क्षमता है। दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले पानी का बेहतर तरके से उपयोग करने के लिए हमने शहर के अंदर एसटीपी का निर्माण किया है। पर्यावरण और स्वास्थ्य लाभ के अलावा, यह परियोजना हमें जल संरक्षण में भी मदद कर रही है। रीसायकल पानी का उपयोग अन्य सूखे जल निकायों को भरने औऱ 250 बगीचों में पानी देने के लिए का जाता है। सरस्वती नदी के अंदर मछली की उपस्थिति हमारी सफलता की मान्यता है।”

Indore IAS Revived River

इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए, आईएएस अधिकारी और इंदौर नगर निगम (IMC) ने कई उपायों को अपनाया जैसे कि सीवेज निकासी के सख्त मैपिंग, अतिक्रमणों, नदी तट पर घरों का पुनर्वास और आसपास की सिविल निर्माण गतिविधि को रोकना।

चुनौतियों की पहचान

आईएमसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीन प्राथमिक सीवेज पाइपलाइन लाइनों की खराब स्थिति थी जो शहर के बाहर स्थित एसटीपी से मिलती है। आशीष सिंह बताते हैं, “पुरानी प्राथमिक लाइनें दस साल पहले स्थापित की गई थीं जो दो साल पहले खराब होने लगी थी। इस कारण, उपचार के लिए एसटीपी में प्रवेश करने के बजाय सीधे नदी में मल छोड़ा जा रहा था। 24 ऐसे स्थान थे जहाँ पाइपलाइन ने काम करना बंद कर दिया था। यहां तक कि लाइनें बंद होने के कारण सीवेज ओवरफ्लो भी हो रहे थे।”

इसी तरह की समस्या खान नदी के साथ भी देखी गई थी। इसलिए, आईएएस 2018 में एक योजना के साथ आए जिसका लक्ष्य विकेंद्री एसटीपी स्थापित करके दोनों नदियों (कुल 23 किलोमीटर की दूरी ) को पहले जैसा करना था।

शहर के 434 स्थानों से 65 एमएलडी सीवेज के उपचार के लिए संचयी क्षमता के साथ छह एसटीपी स्थापित करने की योजना थी , “नागरिक निर्माण कार्य का अधिकांश काम पूरा हो गया है। छह एसटीपी में से एक पूरी तरह से चालू है और बाकि लॉकडाउन अवधि के बाद पूरे होंगे।”

समाधान लागू करना

आदर्श रूप से, उपचार के लिए सीवेज एक एसटीपी में प्रवेश करता है, जिसे फिर नदी में निर्देशित किया जाता है। यह प्रक्रिया नदी प्रदूषण और भूजल प्रदूषण को रोकती है।

हालांकि, सरस्वती सीवेज लाइनों की क्षति या कमी के कारण प्रदूषित थी। इसलिए, आईएमसी का पहला कदम, सीवेज निकासी की मैपिंग करना था। एक बार, स्पॉट की पहचान होने पर, नई पाइपलाइन बिछाने और इसे एसटीपी से जोड़ने के लिए जियोटैग किया गया था।

अगला कदम शहर के अंदर एसटीपी स्थापित करने के लिए स्थानों की तलाश करना था। उन्होंने कहा, ” जगह की कमी के कारण हमें 250 घरों के पुनर्वास सहित कुछ कठोर निर्णय लेने पड़े। असमान जमीन का लेवल (ढलान) ने स्थापना प्रक्रिया को और अधिक कठिन बना दिया।”

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निकासी का मैपिंग करने के अलावा, आईएमसी ने प्राथमिक लाइनों को सुधारने और दोनों नदियों की सफाई का काम किया। पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए, आईएमसी ने एक निजी फर्म की मदद से आर्टिफिशिअल फ्लोटिंग आईलैंड भी बनाए।

आर्टिफिशिअल फ्लोटिंग आईलैंड बिना मिट्टी की संरचना है जो फ्लोटिंग मैट, फ्लोटिंग जलीय पौधों और फास्फोरस और नाइट्रोजन का पुनर्चक्रण करके शैवाल कम करने वाले आर्द्रभूमि पौधे के साथ बनाई जाती है। यह आईलैंड पानी के जैविक ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) स्तर में सुधार भी करते हैं। बीओडी पानी में ऑक्सीजन की मात्रा के परीक्षण के लिए इकाई है।

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आशीष सिंह कहते हैं, “बीओडी स्तर 10 पीपीएम (प्रति मिलियन भागों) से कम होना चाहिए। यदि बीओडी स्तर उच्च है, तो नदी बहुत ज़्यादा प्रदूषित है और हमारे हालिया परीक्षण के अनुसार, सरस्वती का स्तर 70 या 80 के मुकाबले आठ है। ”

सुंदर दिखने के लिए आईएमसी ने 2 किमी खंड में नियमित अंतराल में फव्वारे का निर्माण किया है। सरस्वती परियोजना के पूरा होने की घोषणा (12 अप्रैल को) तब हुई जब पूरा देश लॉकडाउन में है।

नदियों को स्वच्छ और अविरल बनाने के इस तरह के प्रयास की सराहना की जानी चाहिए। हम जहां हैं, वहां के आसपास के जल स्रोतों को बचाने के लिए कदम बढ़ाना चाहिए और प्रशासन की मदद करनी चाहिए। इस निराशाजनक समय में, ऐसी सकारात्मक खबरें वास्तव में सुकून देती हैं।

यह भी पढ़ें: ‘जल-योद्धा’ के प्रयासों से पुनर्जीवित हुई नदी, 450 तालाब और सैकड़ों गांवों की हुई मदद!

सरस्वती नदी के परिवर्तन का वीडियो यहां देखें:

मूल लेख: गोपी करेलिया


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