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कोविड-19: श्रमिकों और जरूरमंदों की सहायता कर रहे हैं देशभर के युवा, आप भी दे सकते हैं साथ

कोरोना महामारी के दौर में सबसे अधिक नुकसान श्रमिक वर्ग का हुआ है। इन सभी तक मदद पहुंचाने के लिए कुछ युवा और उनकी संस्थाएं बढ़-चढ़कर आगे आ रही हैं।देश के अलग-अलग हिस्सों में भागीरथ प्रयास में जुटे ऐसे ही कुछ युवाओं के बारे में हम यहां बता रहे हैं।

कोरोना महामारी के दौर में सबसे अधिक नुकसान श्रमिक वर्ग का हुआ है। इन सभी तक मदद पहुंचाने के लिए कुछ युवा और उनकी संस्थाएं बढ़-चढ़कर आगे आ रही हैं। प्रवासी मजदूर जिनके पास न रहने का कोई ठिकाना है और न ही आय का कोई साधन, सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूर फंसे हुए हैं। ऐसे ही लोगों की सहायता के लिए कुछ संस्थाएं मदद उपलब्ध करा रही हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में भागीरथ प्रयास में जुटे ऐसे ही कुछ युवाओं के बारे में हम यहां बता रहे हैं।

राहुल नानीवाल की इंडिया फैलो सोशल लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम

राहुल नानीवाल, जो कि इंडिया फैलो सोशल लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के फाउंडर है, कोविड की वजह से फंसे मजदूरों और बेघरों तक मदद पहुंचाने की मुहिम में जुटे हैं। उनके अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपने घर जाने के लिए रास्ते में फंसा है तो उसकी मदद करने का सबसे अच्छा तरीका उसको धनराशि उपलब्ध कराना होगा। इसके लिए अपनी सहयोगी संस्थाओं जैसे; श्रमिक भारती, जन साहस इत्यादि के साथ मिलकर इंडिया फैलो जरूरतमंद मजदूरों और लोगों के बैंक अकाउंट में धनराशि भेजकर उनकी सहायता कर रहा है। जन-सहयोग द्वारा इन्होंने लगभग 50 लाख रुपये लोगों की मदद के लिए जुटा लिए हैं। इनके द्वारा धनराशि सीधे मजदूरों के बैंक अकाउंट में भेजी जाती है ।

मजदूरों के साथ-साथ इंडिया फैलो अन्य समुदायों जैसे; ट्रांसजेंडर आदि के लिए भी कार्यरत है।

मोइत्रासंजोग सोसाइटी की संस्थापक सुमि दास के शब्दों में “अभी सारे देश में लॉकडाउन है जिसकी वजह से हमारी कम्युनिटी भी अफेक्टेड है। जो लोग ट्रेन में जाते हैं, जो लोग शादियों में नाचते हैं वह आज बेरोजगार हो गए हैं। ऐसे समय में इंडिया फैलो ने हमारी मदद की। “

इस समय इनके साथ 100-150 वॉलिंटियर्स देशभर में जुड़े हुए हैं तथा 1000 परिवारों की ज़मीनी स्तर पर मदद कर रहे हैं।

वलंगर में सर्कस से जीविका अर्जित करने वाले लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराती इंडिया फैलो की टीम

राहुल कहते हैं, “कोविड-19 की इस आपदा में थोड़ी मुश्किल से ही सही पर ज़रूरत की चीज़ों को हम बहुत हद तक प्राप्त कर, उपयोग कर पा रहे हैं। लेकिन जैसा की आपने न्यूज़ / सोशल मीडिया में देखा होगा कि ग्राउंड रियलिटी हमारी स्थिति से काफ़ी अलग है। लोगों के पास न खाने की सामग्री है और न ही पैसे या रहने को जगह। देश भर में सड़कों पर फंसे प्रवासी व दैनिक वेतन मजदूर घर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं, मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिज़र्व के दूरदराज के गांवों में परिवार जो मजदूरी पर निर्भर हैं, साथ ही साथ मुंबई, जयपुर, दिल्ली, कानपुर आदि की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवार इसमें शामिल हैं। जब तक सिस्टम खुद को तैयार कर रहा है, तब तक आप और हम ऐसे कई लोगों की मदद कर सकते हैं। कृपया ज़्यादा से ज़्यादा राशि डोनेट करके इस आपदा में अपना योगदान करें। 31 मार्च को हम देश भर में 196 प्रवासी व दैनिक वेतन मजदूरों को उनके बैंक एकाउंट में 1,96,000 रूपये पहुंचा चुके हैं। यह समय रुकने का नहीं है। अभी और बहुत साथियों को हमारे साथ की ज़रूरत है।”
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अपर्णा की साहस कोविड-19 राहत पहल :

उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद में भोवापुर नाम के एक स्लम में तकरीबन 300 परिवार फंसे हुए हैं। ये सभी कचरा उठाने का काम करते हैं, इसलिए इनकी कमाई रोज के हिसाब से होती है। ऐसे में अपर्णा की साहस नामक संस्था अपने साथ और लोगों को ले आई है। ये सभी लोग इनके राशन-पानी और सैनिटरी नैपकिन, साबुन-सैनिटाइजर जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए फंड जुटा रहे हैं और इन परिवारों तक पहुंचा रहे हैं।

साहस मुख्यतः महिलाओं के सशक्तिकरण और शिक्षा के लिए कार्यरत है लेकिन आज के समय में यह बस्तियों में रहने वाले गरीब लोगों एवं मज़दूरों की मदद के लिए योगदान दे रहे हैं। साहस से जुड़ी बस्ती की महिलाऐं जिनके पास सिलाई मशीन है वे अपने घरों में मास्क सिलकर बस्ती के लोगों में वितरित करती हैं जिससे उनका बचाव हो सके।

साहस से संपर्क करने के लिए आप उन्हें ngosaahas@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं।

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अनुप्रिया की कोरोना वारियर्स:

पूरी दुनिया भर में फैल चुकी कोरोना वायरस से एक जंग सोशल मीडिया पर भी लड़ी जा रही है। लॉकडाउन की वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग इधर-उधर फंसे हुए हैं। इससे खासकर कामगार वर्ग प्रभावित है, जो रोज की कमाई से अपना पेट भरता है। लॉकडाउन की वजह से इनके पास खाने-पीने और राशन की समस्या पैदा हो गई है। आस-पास दुकानें तो खुल रही हैं लेकिन राशन खरीदने के लिए इनके पास पैसे नहीं हैं। सोशल मीडिया पर तमाम लोग ऐसे लोगों तक मदद पहुंचा रहे हैं। फेसबुक पर ऐसा ही एक ग्रुप ‘कोरोना वारियर्स‘ नाम से सक्रिय है। इस पहल की शुरूआत अनुप्रिया और उनके कुछ साथियों ने मिलकर की। 26 मार्च को बने इस ग्रुप में 8000 से भी अधिक लोग जुड़ गए हैं। इस ग्रुप के द्वारा जम्मू कश्मीर से तमिलनाडु और गुजरात से लेकर असम तक लोगों तक मदद पहुंचाई जा रही है।

अनुप्रिया के साथ इस मुहिम में अंकिता सिंह, संदीप सिंह और अरूण राजपुरोहित प्रमुख रूप से शामिल हैं, जिन्हें ग्रुप के अन्य 8000 लोगों का सहयोग मिल रहा है। अनुप्रिया बताती हैं कि इस पहल की शुरुआत करने का सुझाव उन्हें फेसबुक से आया, जब उन्होंने एक पोस्ट देखा जिसमें उनके फेसबुक मित्र लॉकडाउन के कारण मध्यप्रदेश में फंस गये। उन्होंने अपनी जान-पहचान के द्वारा उन तक मदद पहुंचाई। इसके बाद उन्होंने सोचा कि क्यों ना एक ऐसी चेन बनाई जाए जिसमें देशभर से लोग जुड़े हो और जो अपनी जान-पहचान के द्वारा जरूरतमंद लोगों की समय पर मदद कर सकें।

अनुप्रिया कहती हैं, “हमारा काम कुछ नहीं है, हमें घर से बाहर भी नहीं निकलना पड़ता। हमें बस कॉर्डनिशेन करना पड़ता है, जो हम सुबह 10 बजे से रात के दो बजे तक करते हैं।”

उन्होंने बताया कि इससे उनको रात में सोने से पहले काफी संतुष्टि मिलती है। कोरोना वारियर्स से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

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बिहार के युवाओं की टीम:

बिहार के नालंदा में रहने वाले सौरभ राज सोशल सेक्टर में काम करते हैं। सौरभ बिहार में डॉक्टरों को पीपीई किट्स मुहैया कराने के लिए फंड्स जुटाने का अभूतपूर्व और बेहद जरूरी काम कर रहे हैं। यह पांच लोगों की एक टीम है। इस टीम में सुदिशी और अंकित राज (पीएमसीएच छात्र), शादान आरफ़ी, चंद्र भूषण और सौरभ राज शामिल हैं। यह टीम और भी ज्यादा वॉलंटियर्स के साथ बड़ी होती जा रही है। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के कुछ मेडिकल स्टूडेंट्स की मदद से सुदिशी, शुभी और अंकित राज ने डॉक्टरों और हेल्थ प्रोफ़ेशनल्स के लिए फंड जुटाने का निर्णय किया।

बिहार की युवा टीम द्वारा तैयार किया गया राहत बक्सा

सौरभ कहते हैं, “दुर्भाग्य से, बड़ी संख्या में लोगों के विभिन्न शहरों और विदेशी देशों से लौटेने के कारण कोरोना से बिहार में लड़ाई शुरू करने के लिए बुनियादी उपकरणों का अभाव है। बिहार में हेल्थ प्रोफ़ेशनल्स के पास पीपीई, बेसिक सेफ्टी इक्विमेंट्स जैसे; N95 मास्क, सैनिटाइज़र और दूसरी चीज़ें नहीं हैं। हमने फ़ैसला किया है कि हम इन सभी की मदद करेंगे। हमने पीएमसीएच के लिए एक ऑनलाइन क्राउड फंडिंग कैंपेन शुरू किया है।”

युवाओं का यह समूह भागलपुर, पटना, गया आदि जगहों के सरकारी अस्पतालों में मदद उपलब्ध करा रहा है। अब तक ये लोग 6.34 लाख रुपए जुटा चुके हैं। जीवन की रक्षा करने वालों की सुरक्षा में अपना योगदान देने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

देशभर में कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे इन युवाओं को सलाम!

“बेटर टुगेदर” द बेटर इंडिया की एक पहल है जो देश भर के सिविल सेवा अधिकारियों को एक साथ लाया है ताकि वे प्रवासी मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों, फ्रंटलाइन श्रमिकों और उन सभी की मदद कर सकें जिन्हें इस संकट के समय में हमारी मदद की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। आप हमसे जुड़ सकते हैं और COVID-19 के खिलाफ इस लड़ाई में उनका साथ दे सकते हैं।  डोनेट करने के लिए यहाँ पर क्लिक करें!


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