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700 से ज़्यादा परिवारों तक सीधा खेतों से पहुंचा रहे हैं ताज़ी सब्जियां

कोरोना वायरस को लेकर लॉकडाउन 4 मई तक बढ़ाए जाने के साथ, देश भर के किसानों और ग्राहकों, दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में सीधा खेतों से घरों तक सब्जियां पहुंचाने का मॉडल एक बेहतर समाधान हो सकता है।

बाज़ार और दुकानें कई दिनों से बंद हैं। ऐसी परिस्थिति में देश भर के किसानों को वित्तीय हानि के साथ-साथ फसलों के नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है। कर्नाटक के किसान, श्रीधर की बात करें तो देश भर में कोरोना वायरस पर नियंत्रण पाने के लिए 24 मार्च से लागू किए गए लॉकडाउन के कारण उन्हें अबतक तीन लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

लॉकडाउन के पहले 15 दिनों में, श्रीधर को होसुर के अपने घर में करीब 70 किलो शिमला मिर्च मजबूरी में स्टोर करना पड़ा था क्योंकि बाजार और परिवहन सुविधाएं पूरी तरह से बंद थी। उन्होंने बेंगलुरु के बाजारों तक पहुंचने के लिए परिवहन की व्यवस्था करने की कोशिश की लेकिन कोई मदद नहीं मिली। अंत में उन्होंने सब्ज़ी खराब होने से पहले इसे मुफ्त में बांट देने का फैसला किया।

ऐसे कठिन समय में, श्रीधर की मदद के लिए एक संस्था सामने आई है। ‘तरु’ (TARU) नाम की यह संस्था एक गैर लाभकारी पहल है जिसे कुछ दोस्तों ने मिलकर शुरू किया है।

बेंगलुरु में रहने वाले सुनील गहतोरी ने देखा कि किस तरह लॉकडाउन के कारण पड़ोस के खेतों में काम करने वाले किसान परेशान हो रहे हैं। मांग और आपूर्ति श्रृंखला के बीच की खाई को कम करने के लिए वह एक व्यवस्थित दृष्टिकोण के साथ सामने आए।

सुनील गहतोरी ने द बेटर इंडिया को बताया, “मैंने अपने दोस्तों, उमा और सोनी से बात की और उनके साथ मिलकर तरु – TARU (टीम ऑफ एग्री रिसोर्स यूटिलाइजेशन) नामक एक गैर-लाभकारी संस्था का गठन किया। इस संगठन के माध्यम से हम किसानों से ताजी सब्जियां खरीदते हैं और फिर बॉक्स बनाते हैं जिसमें करीब 6 किलो सब्जियां होती है। फिर इन बॉक्सों को अपार्टमेंट में रहने वाले निवासियों तक पहुंचाते हैं।”

यह पहल हर किसी के लिए बेहतर है और अब तक शहर भर में 700 से ज़्यादा परिवारों को ताजी सब्जियां प्रदान की हैं और धीरे-धीरे किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर रही है।

बॉक्स में क्या है?

Fresh veggies straight from the farms

एक बॉक्स में आलू, प्याज, टमाटर, नींबू, मिर्च, धनिया, अदरक और लहसुन होता है।
ग्राहक भिंडी, बैगन, बीन्स, गोभी, फूलगोभी, घिया, मूली, गाजर, खीरा, चुकंदर और शिमला मिर्च में से 5-6 तरह की सब्जियां चुन सकते हैं और यह उन्हें उपलब्धता के अनुसार दी जाती हैं।
प्रत्येक बॉक्स की कीमत 250 रुपये है और यदि बक्से की संख्या प्रति अपार्टमेंट 20 से कम है, तो 30 रुपये का डिलिवरी शुल्क लगाया जाता है।

Work in full swing

फेसबुक पेज और व्हाट्सएप के माध्यम से ऑर्डर किया जाता है। ऑर्डर करने के लिए किसी भी व्यक्ति को कुछ विवरण के साथ एक फॉर्म भरना होगा जैसे कि सब्जियों के बक्से की संख्या कितनी है और जहां सब्जियां पहुंचाई जानी है, वहां का पता आदि। आप अपने अपार्टमेंट में अन्य परिवारों के साथ फॉर्म साझा कर सकते हैं क्योंकि ऑर्डर तभी स्वीकार किया जाएगा जब प्रति अपार्टमेंट देने के लिए कम से कम 10 बॉक्स के ऑर्डर हों।

बक्से तैयार करने के लिए कृष्णागिरि जिले के होसुर में किसानों के समूह की सहायता ली जा रही है। एक बार बक्से तैयार हो जाने के बाद, सुनील ऑर्डर और डिलिवरी की तारीख की पुष्टि करने के लिए ग्राहक से संपर्क करते हैं। सुनील ने एक फूल विक्रेता, मंजू को काम पर रखा है, जो हर दूसरे दिन बक्से डिलिवर करता है।

मंजू गेट पर बक्से छोड़ता है जिसे बिल्डिंग का कोर्डिनेटर इक्टठा करता है। बाद में बक्से को बिल्डिंग में रहने वाले निवासियों तक पहुंचाया जाता है। पूरी प्रक्रिया में स्वच्छता पर विशेष ध्यार रखा जाता है और टीम हर तरह की सुरक्षा सावधानी बरतती है।

Maintaining social distancing

सुनील कहते हैं, “हमने किसानों को मास्क, दस्ताने, सैनिटाइज़र और बक्से प्रदान किए हैं। डिलिवरी के बाद भी वाहन को ठीक से सैनिटाइज़ किया जाता है। होसुर से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में डिलिवरी करने में किसी भी तरह की बाधा ना हो, इसके लिए हमारे पास तीन परमिट पास हैं और भुगतान केवल यूपीआई द्वारा स्वीकार किए जाते हैं। ”

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तरु का प्रभाव

श्रीधर ने द बेटर इंडिया को बताया, “मैंने कुछ ही दिनों में 100 किलो शिमला मिर्च की आपूर्ति की है और इसके लिए मुझे घर के बाहर कदम भी नहीं रखना पड़ा है। यह न केवल मेरी आय को पुनर्जीवित कर रहा है, बल्कि परिवहन लागत को भी बचा रहा है। यह एक परेशानी मुक्त और सुरक्षित प्रक्रिया है। ”

इस बीच, बेंगलुरु में 40 किलोमीटर दूर, एसएलवी स्प्लेंडर अपार्टमेंट के निवासी दयानंद को अब अपने घर से बाहर कदम रखे बिना बाजार से ताजी सब्जियां मिल रही हैं।

दयानंद ने द बेटर इंडिया से कहा, “सुनील और उनकी टीम के आने से पहले मैं महंगी दरों पर सब्जियां खरीदने के लिए मजबूर था। हमारे कॉम्प्लेक्स के करीब 52 परिवारों ने बक्से ऑर्डर किए और उनमें से सभी ने कहा कि उन्हें उचित दरों पर ताजी सब्जियां मिलीं हैं।”

दयानंद आगे बताते हैं कि कैसे उन्हें और अन्य निवासियों को अब किसानों के सामने रोजाना आने वाली कठिनाइयों का एहसास हो रहा है। वह कहते हैं, “किसान हमारी जीवनरेखा हैं और हमें भोजन प्रदान करने के लिए वे जो कष्ट का सामना करते हैं, हम उसके लिए उनके बहुत आभारी हैं।”

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4 मई तक लॉकडाउन की अवधि बढ़ा देने के साथ, देश भर के किसानों और ग्राहकों दोनों को लंबे समय के लिए इस संकट का सामना करना पड़ेगा। हम केवल यह आशा कर सकते हैं कि इस तरह की पहल से हम सभी का जीवन आसान बनेगा।

यदि आपका अपार्टमेंट सूची में है तो सब्जियां ऑर्डर करने के लिए इस फॉर्म को भरें।

यदि आपका अपार्टमेंट सूची में नहीं है तो इस फॉर्म को भरें।

TARU के साथ यहां संपर्क करें!

मूल लेख: गोपी करेलिया 


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Written by पूजा दास

पूजा दास पिछले दस वर्षों से मीडिया से जुड़ी हैं। स्वास्थ्य और फैशन से जुड़े मुद्दों पर नियमित तौर पर लिखती रही हैं। पूजा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है और नेकवर्क 18 के हिंदी चैनल, आईबीएन7, प्रज्ञा टीवी, इंडियास्पेंड.कॉम में सक्रिय योगदान दिया है। लेखन के अलावा पूजा की दिलचस्पी यात्रा करने और खाना बनाने में है।

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