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मिलिए झारखंड के एक ऐसे व्यक्ति से जिसने जुहू तट पर अब तक 50 जानें बचाई है!

बंटी राव, जुहू तट पर तैनात एक स्वयंसेवक लाइफ गार्ड है जो किसी भी आपात की स्थिति में आपकी मदद को तैयार रहता है ।

मुंबई एक ऐसा शहर है जो तेज़ गति से चलने को मशहूर है और जहाँ लोगों के लिये अगर कुछ अत्यधिक कीमती है तो वो है समय और पैसा ।यहाँ अपना और अपने परिवार का ख्याल रखने के लिए भी लोगों के पास समय की कमी हो जाती है, ऐसे में दूसरों के लिए समय निकालना असंभव हो जाता है । शायद ही हमें ऐसे लोग मिलें जो दूसरों का जीवन बदलने को इच्छुक दिखें । और यदि ऐसे मुठ्ठी भर लोग हैं भी तो हमारा ध्यान उनकी ओर नहीं जाता । आइये आपकी मुलाकात करवाते हैं एक ऐसे व्यक्ति से जो इस बेपरवाह शहर में दूसरों की परवाह कर रहा है ।

बंटी राव को जुहू तट के प्रवेश पर अपने दोस्तों के साथ बड़ी जिंदादिली के साथ बात करते हुए और साथ ही लोगों पर सख्त नज़र रखते हुए देखा जा सकता है । गले में एक निकोन कैमरा और हाथों में एक फोटो की एल्बम लिए हुए ये उन लोगों के पास जाता है जिन्हें समुद्र की लहरों के तट अपनी फोटो खिंचवानी हो ।

हर किसी को ये व्यक्ति एक मामूली फोटोग्राफर ही लगता अगर इसकी टी शर्ट पर ‘लाइफ गार्ड ऑन ड्यूटी’ न लिखा होता । पर बंटी इतना मामूली भी नहीं है।

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मुंबई का समुद्र और तट हर दिन हज़ारों लोगों को अपनी ओर खींचता है । कोई यहाँ समुद्र को निहारने आता है तो कोई यहाँ बिक रहे भोजन का स्वाद लेने और कुछ इसके पानी में खुद को तर करने । इसी के साथ यहाँ कई फेरीवाले, गुब्बारे, मूंगफली, पॉपकॉर्न, बुलबुले, खिलौने आदि बेचते हुए  नज़र आते हैं ।

प्रवेश पर लगे तख्ते, जिसपर इस स्वयंसेवी संस्था का नाम लिखा है,की ओर इशारा करते हुए बंटी बताते हैं, “मैं पिछले 16 सालों से ‘बेवाच लाइफ गार्ड एसोसिएशन’ (BLA) के साथ लाईफगार्ड के रूप में जुडा हूँ । पर यहाँ आने वाले लोगों का ध्यान शायद ही इस पर जाए और अगर गया भी तो उन्हें इसकी अहमियत भी शायद न समझ में आये । पर ये भी सच है कि यह जगह, बिना इस तख्ते के ऐसी नहीं होती ।”

बेवाच लाइफगार्ड एसोसिएशन की स्थापना सईद शर्मा ने तब की थी जब उन्हें ये एहसास हुआ कि इन तटो पर बी एम् सी द्वारा दी गयी सुविधाएं किसी भी दुर्घटना को रोकने के लिए पूरी तरह से ___ नहीं है । तब इन्होंने एक स्वयं सेवी संस्था की स्थापना की और इसके यहाँ लोगों को  आत्म रक्षा के गुर सिखाये । फिर इनको तट के विभिन्न हिस्सों पर तैनात कर दिया । लाइफ गार्ड के अलावा बी एल ऐ आपातस्थिति से निबटने के लिए तट पर मौजूद फेरीवालों और सैलानियों को प्राथमिक चिकित्सा और व्यवहारिक शिक्षा की भी ट्रेनिंग देता है । बंटी बताते हैं, “ हम अपने काम के लिए कोई पैसे नहीं लेते । हम जो भी करते हैं वो निःशुल्क होता है और लोगों की भलाई के लिए होता है । हम सुबह में तट की सफाई भी करते हैं ।”

बी एल ए किसी पुरस्कार की अपेक्षा किये बिना ही लोगों में ज़िम्मेदारी और जागरूकता फैलाने में यकीन रखता है।

Juhu Beach

Image Source: Flickr

बंटी बी एल ए (BLA) के साथ कई दिनों से जुड़े हैं। ये बताते हैं, “मै यहाँ पिछले 16 सालों से काम कर रहा हूँ और अब तक करीब 50लोगों की जाने बचाई है। इनमे, साल में सबसे मुश्किल समय गणेश विसर्जन का होता है। लोग अपनी सुरक्षा की परवाह किये बिना, गहराई की ओर चले जाते हैं।”

जुहू तट को मुंबई के सुरक्षित जगहों में से एक माना जाता है और इसके पीछे कारण भी है। बंटी गर्व से बताते हैं, “ मैं यहाँ रात के10 बजे तक रुकता हूँ यह देखने के लिए कि सब ठीक है की नहीं। किसी भी आपात की स्थिति में लोग मुझे बुलाते हैं। ऐसा भी समय होता हैं जब इस तट पर  बहुत भीड़ होती है और उस वक़्त सिर्फ मैं ही दूसरों पर नज़र रख रहा होता हूँ।”

बंटी शुरू से ही मुंबई में नहीं रहे। इस जगह को अपनाने में इन्हें कई साल लगे।

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ये बतातें हैं, “ बहुत साल पहले मैं अपनी जीविका चलाने के लिए  SAP की नौकरी छोड़ कर, जमशेदपुर, झारखंड से मुंबई आया । मुझे शुरू से ही फोटोग्राफी का शौक रहा है और मेरे इसी शौक ने इस शहर में मेरी इज्ज़त रखी । जब तक मैंने डाक्यूमेंट्री बनाने में  सहयोग नहीं किया तब तक मैं फोटोग्राफी में हाथ ही आजमा रहा था । मैंने इंसान और बेवफा में भी सहयोग दिया है । इसी सब के बीच कई पार्टी , शादियों और कॉर्पोरेट इवेंट के लिए फोटोग्राफी कर मैंने इसे  व्यवसाय के रूप में अपनाया । मैंने वीडियोग्राफी और डाक्यूमेंट्री बनाने जैसे काम में भी अपनी किस्मत आजमाई है ।”

ज़ाहिर है कि इस शहर में रहने के लिए कमाना पड़ेगा । बंटी की प्रतिदिन की कमायी 500 से 600 रुपये हैं जिसके मध द्वीप में रहने वाले इनके परिवार का गुज़ारा चलता है ।

ये बंटी राव ही है जो किसी की जान बचाने को समुद्रे में कूदने के पहले सोचता नहीं। ये निश्चय ही हमारी प्रशंसा के काबिल है।

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Image Source: Wikipedia

अपनी जिम्मेदारियों के प्रति इनकी रूचि हर दिन इनसे कुछ नया करवाती है। पर इनके साथ बंटी ने अपने सपने और अपना लक्ष्य को भुलाया नहीं। वे इन्हें एक दिन पूरा करने की इच्छा रखते हैं। फिलहाल वे अपने कार्य और अपने जीवन से पूरी तरह संतुष्ट हैं।

जैसे जैसे सूर्यास्त होने लगा, लहरों की गति बदलने लगी, पानी और हवाएँ शांत होने लगी, नारियल के पेड़ ठंडी हवाओं में झूमने लगे । नए नए लोग तट की ओर आने लगे और पुराने अपने घरों की ओर निकल पड़े । दिन सिमटने लगा पर बंटी के लिए यह दिन अभी ख़त्म नहीं हुआ । वो अपनी जगह से उठता है। उतनी  ही सतर्कता, उतना ही सक्रीयता के साथ लोगों की ओर अपनी पैनी नज़र घुमाने लगता है कि कहीं किसी को उसकी मदद की आवश्यकता तो नहीं !

ये एक ऐसा शख्स है जिसकी ज़रूरत इस शहर को है पर जिसपर इस शहर का ध्यान सबसे कम जाता है।

Written by Sachi Mavinkurve

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Written by निधि निहार दत्ता

निधि निहार दत्ता राँची के एक कोचिंग सेंटर, 'स्टडी लाइन' की संचालिका रह चुकी है. हिन्दी साहित्य मे उनकी ख़ास रूचि रही है. एक बेहतरीन लेखिका होने के साथ साथ वे एक कुशल गृहिणी भी है तथा पाक कला मे भी परिपक्व है.

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