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कोरोना से लड़ने के लिए हिमाचल प्रदेश के ये 10 लोग अपने-अपने स्तर पर दे रहें हैं योगदान

कोई अपनी ज़मीन दे रहा है तो कोई कर रहा है श्रमदान, किसी ने सरकारी एंबुलेंस ठीक करने की ठानी है, तो कोई मास्क बना रहा है। किसी ने किरायेदारों का किराया माफ किया, तो किसी ने अपने घर के दरवाज़े ज़रूरतमंदों के लिए खोल दिए। हर कोई अपने सामर्थ्य के अनुसार कोरोना से इस लड़ाई में अपनी-अपनी भूमिका निभा रहा है।

कोरोना वायरस से जहां एक तरफ करोड़ों लोग अपने घरों में लाॅकडाउन हैं तो वहीं कुछ ऐसे कर्मवीर हैं, जिन्होंने संकट के इस समय में अपनी जान की परवाह किए बिना अपने घरों से बाहर निकलकर बेसहारा और ज़रूरतमंद लोगों के लिए एक सहारा बनने की कोशिश की है। इस लेख में हम आपको हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग शहरों/कस्बों में रहने वाले ऐसे ही 10 कर्मवीरों के बारे में बताएंगे –

1. औरों के लिए जीना कोई शैलजा चंदेल से सीखे

शैलजा चंदेल

युवावस्था में हर कोई अपनी और अपने परिवार के ख्वाबों को पूरा करने में लगा होता है। लेकिन हमीरपुर जिला की शैलजा चंदेल ने कारोना वायरस से पैदा हुए संकट से निपटने के लिए अपने जीवन तक को जोखिम में डालने का निर्णय ले लिया है। जी हां, शैलजा चंदेल ने घोषणा की है कि कोरोना वायरस की यदि दवा बनती है और इसके परिक्षण के लिए मानव शरीर की जरूरत होगी तो इसके लिए वह तैयार हैं। राष्ट्र प्रथम की भावना से ओतप्रोत इस युवती का कहना है कि इस संकट की घड़ी में मानवता खतरे में है इसलिए हमें आगे बढ़कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए। समाज के प्रति ऐसे समर्पण के लिए हिमाचल की इस युवती से समाज के एक बड़े वर्ग को प्रेरणा मिल रही है।

2. दानवीर डाॅ. विक्रम

डाॅ. विक्रम शर्मा

हिमाचल के बिलासपुर जिला के कृषि वैज्ञानिक डाॅ. विक्रम शर्मा ने अपनी 55 बीघा कृषि भूमि को कोरोना से निपटने के लिए आइसोलेशन सेंटर बनाने हेतु निशुल्क देने की पेशकश की है। डाॅ. विक्रम ने बताया कि इस भूमि में बिजली, पानी और सड़क की पूरी सुविधा है जिससे सरकार को इस स्थान में आइसोलेशन सेंटर स्थापित करने में किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। इतना ही नहीं डाॅ. विक्रम सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को अफवाहों से दूर रखने के लिए जागरूक कर रहे हैं। साथ ही, जो लोग कहीं फंसे हुए हैं उन्हें भी अपने बेटे रित्विक शर्मा के साथ मिलकर उनके घरों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहें हैं।

3. ऐसी विधायक जो लोगों के लिए खुद तैयार कर रहीं हैं मास्क

हिमाचल के भोरंज विधानसभा की विधायक कमलेश कुमारी

बहुत से लोगों में एक ऐसी धारणा है कि नेता केवल वोट लेने तक ही लोगों से जुड़े होते हैं। लेकिन हिमाचल के भोरंज विधानसभा की विधायक कमलेश कुमारी ने इस धारणा को बिल्कुल बदल दिया है। क्षेत्र में मास्क की कमी को देखते हुए इस विधायक ने खुद ही सिलाई मशीन उठाई और मास्क तैयार करने में जुट गईं। कमलेश कुमारी इन मास्क को कोरोना से निपट रहे सरकारी कर्मचारियों और स्वयं सेवकों को बाँट रहीं हैं। इतना ही नहीं इन्हें देख क्षेत्र की सैकड़ों महिलाएं इस कार्य में जुट गईं हैं और मास्क बनाकर लोगों को निशुल्क मुहैया करवा रहीं हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि इस विकट परिस्थिति में लोग अपने सामर्थ्य अनुसार सहयोग करें। इसके अलावा उन्होंने लोगों को सरकार की ओर से जारी निर्देशों के पालन करने के लिए भी कहा है।

4. इंजिनियर ने सरकारी वाहनों की मरम्मत के लिए उठाया जोखिम

जनक

कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और अन्य सरकारी विभाग जुटे हुए हैं। ऐसे में एंबुलेंस या अन्य वाहनों के खराब होने पर दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसलिए एक युवा इंजिनियर ने सभी सरकारी वाहनों की मरम्मत निशुल्क करने का दम दिखाया और वह इस काम को बखूबी निभा भी रहें हैं। स्कूटर के इंजन से कृषि में प्रयोग होने वाला सस्ता पावर टिल्लर बनाकर पूरे देश में नाम कमाने वाले इंजिनियर जनक का सोलन जिले में गाड़ियों की रिपेयरिंग की दुकान है। जनक ने इसके लिए सरकार से अनुमति प्राप्त कर काम भी शुरू कर दिया है। जनक का कहना है कि लाॅकडाउन की इस स्थिति में यदि सरकारी वाहनों या एंबुलेंस की ब्रेकडाउन होती है तो जो लोग इस काम में दिन-रात जुटें हैं उनका मनोबल कमजोर होगा। इसलिए मैं और मेरे साथ में अन्य साथी 24 घंटे वाहनों की मरम्मत के काम में जुटें रहेंगे।

5. समाज के लिए प्रेरणा बन रहे ये तीन दर्जी

गुलजारी लाल

रोजाना 400 से 500 रुपये कमा कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले इन तीन दर्जियों ने बड़े-बड़े पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को संकट के दौरान समाज के लिए काम करने की प्रेरणा दी है। शिमला के मंडी शहर निवासी अमित कुमार एक छोटी सी दुकान में दर्जी का काम करते हैं। लेकिन आजकल वह लोगों के कपड़े सीलने के बजाय कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए मास्क बनाकर निशुल्क बांटने का काम कर रहें हैं। ऐसा ही एक उदाहरण कुल्लू के आनी क्षेत्र के दो दर्जियों गुलजारी लाल और अनिल भारती ने पेश किया है। ये दोनों दर्जी मिलकर रोजाना सैकड़ों मास्क तैयार कर रहें हैं और इन्हें सरकारी कर्मचारियों और प्रशासन को निशुल्क उपलब्ध करवा रहें हैं।

6. किरायेदारों का किराया माफ कर दिखाई दरियादिली

राजन कात्यायन

संकट की घड़ी में जहां एक तरफ कई मुनाफाखोर दुकानदार लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर चीजों के दाम बढ़ा रहें हैं, वहीं दूसरी ओर राजन कात्यायन की तरह भी लोग हैं जो मौके की नज़ाकत को समझते हुए अपने किरायेदारों के किराये को माफ कर दरियादिली दिखा रहें हैं। कुल्लू जिला के भूंतर में राजन कात्यायन का एक शाॅपिंग काॅम्पलेक्स है, जिसमें उनके छह किरायेदार वर्षाें से अपनी दुकानें चला रहें हैं। राजन कात्यायन ने लाॅकडाउन होने पर अपने इन किरायेदारों के किराये को माफ करने की पहल की और अपने जैसे हजारों मकान मालिकों को ऐसा करने के लिए प्रेरित किया।

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7. लोगों के रहने और खाने के लिए खोल दिए घर के दरवाजे

आदित्य हुसैन गोयल

नाहन के आदित्य हुसैन गोयल ने घरों से दूर बेसहारा और गरीब लोगों के लिए अपने घर के दरवाजे खोल दिए हैं। आदित्य ने 100 लोगों के रहने और उनके खाने-पीने के लिए पूरी व्यवस्था की है। साथ ही, लोगों को इस बारे में जानकारी मिल सके इसके लिए वह सोशल मीडिया और सरकारी अधिकारियों के माध्यम से संदेश दे रहें हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने आपातकाल की स्थिति के लिए अपना निजी वाहन भी लोगों के लिए समर्पित कर दिया है। आदित्य का कहना है कि इस विकट स्थिति में हम सबको समाज सेवा के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को सरकार के आदेशों का पूरा पालन करना चाहिए और बिना ज़रूरत किसी को भी अधिक खाद्य सामग्री एकत्रित नहीं करना चाहिए।

8. अस्पतालों में रक्त की कमी को पूरा कर रहे अजय श्रीवास्तव

अजय श्रीवास्तव

कोरोना संक्रमण फैलने के डर से लोग अस्पतालों में जाने से परहेज कर रहें हैं। ऐसे में, अस्पतालों में रक्त की कमी हो गई है। इस कमी को पूरा करने के लिए समाज सेवा में जुटी संस्था उमंग फांउडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने बीड़ा उठाया है। अजय ने हिमाचल के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में रक्त पहुंचाने के लिए शिमला से 20 किलोमीटर दूर प्रशासन के साथ मिलकर एक ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किया और इसमें 40 यूनिट रक्त एकत्रित कर अस्पताल में जरूरतमंदों तक पहुंचाया। इसके अलावा अजय लगातार शिमला शहर के अस्पतालों के संपर्क में रहते हैं और जरूरत पड़ने पर रक्तदानियों को अस्पताल तक पहुंचाकर सेवा करते हैं। इतना ही नहीं, अजय अक्षम लोगों की सेवा के लिए भी हमेशा आगे रहकर लोगों को भी समाज सेवा के लिए प्रेरित कर रहें हैं।

9. इस दंपत्ति ने लोगों के घरों में सामान पहुंचाने का उठाया बीड़ा

डाॅ. नितिन व्यास और शितल व्यास

चाहे बात पर्यावरण संरक्षण, बाल और महिला अधिकारों की हो या समाज के किसी अन्य वर्ग की भलाई की, शिमला शहर का यह व्यास दंपत्ति हमेशा आगे रहता है। कोरोना से लड़ने के लिए भी डाॅ. नितिन व्यास और उनकी पत्नी शितल व्यास ने एक वाॅलंटियर के तौर पर भूमिका निभाने का फैसला लिया है। शिमला शहर में लोगों के घरों तक सामान पहुंचाने के लिए जिला उपायुक्त ने एक वाॅलंटियर दल बनाने का फैसला लिया है और इसके लिए सबसे पहले इस दंपत्ति ने अपना नाम दिया है। इतना ही नहीं, ये दोनों दंपत्ति कोरोना वायरस को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने का काम भी कर रहें हैं। साथ ही, ये दोनों सरकार की ओर से जारी की जाने वाली सभी सूचनाओं को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहें हैं।

10. मुनाफाखोरों से लोगों को बचा रहे प्रोफेसर जोगेंद्र

प्रो. जोगेंद्र सकलानी

लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी कर रहे दुकानदारों से समाज को बचाने के लिए प्रो. जोगेंद्र सकलानी एक सजग जागरूक उपभोक्ता के तौर पर भूमिका निभा रहें हैं। प्रो. जोगेंद्र लाॅकडाउन के दौरान मिलने वाली छूट के बाद लोगों को ओवर चार्जिंग से बचाने के लिए दुकानदारों के पास जा-जा कर उनसे जरूरी वस्तुओं के दाम पूछते हैं और विडियो बनाकर इन्हें सोशल मीडिया में डालते हैं। इसके साथ ही यदि कोई दुकानदार अधिक दाम लेते हुए पाया जाता है तो वह इसके बारे में प्रशासन को सूचित कर रहें हैं। प्रो. जोगेंद्र का कहना है कि संकट के समय में हमें एक-दूसरे के काम आना चाहिए और मुनाफाखोरों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

ये सारे लोग हिमाचल प्रदेश में अपने राज्य के लोगों की सेवा में जुटे हैं। छोटा ही सही पर इस वक्त के लिए ज़रूरी पहल कर समाजसेवा कर रहें हैं। अगर आप भी अपने आसपास ऐसे लोगों को जानते हैं तो मेल कर हमें बताइए।

संपादन – अर्चना गुप्ता


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Written by रोहित पराशर

पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, सक्सेस स्टोरी, यात्रा वृतांत और जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण के बारे में लिखने के शौकिन रोहित पराशर हिमाचल से हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से मास्टर इन मास कम्यूनिकेशन करने के बाद पिछले एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुडे़ हुए हैं। देश के प्रतिष्ठित समाचारपत्र दैनिक भास्कर और पर्यावरण के क्षेत्र की बेहतरिन मैग्जीन डाउन टू अर्थ में सक्रीय रूप से लिखते हैं। लोगों से उनके अनुभवों के बारे में बाते करने का शौक रखते हैं और पहाड़ों से खासा लगाव रखते हैं।

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