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COVID-19: इन 6 हीरोज़ की करें मदद ताकि कोई ज़रूरतमंद न रहे भूखा!

लॉकडाउन की वजह से बहुत से लोगों की आमदनी रुक गई है और उनके घरों में पर्याप्त खाने-पीने के साधन भी नहीं बचे हैं। ऐसे में आप जैसे सक्षम लोगों को भी ऐसे ज़रूरतमंदों की मदद करने का मिल रहा है मौका!

Help to the poor

30 मार्च, 2020 तक देश में कोरोना वायरस के मामले 1251 तक पहुँच गए हैं और 32 लोगों की मौत हो चुकी है। स्थिति को संभालने की जद्दोजहद में लगी सरकार ने देश में 25 मार्च से 14 अप्रैल तक का लॉकडाउन घोषित कर दिया है।

हम जैसे लोग जो अपने घरों में बैठकर आराम से यह वक़्त गुज़ार सकते हैं क्योंकि हमारे पास इतने साधन मौजूद हैं। लेकिन हमारे देश की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा आज भी दिहाड़ी-मजदूरी और अन्य छोटे-मोटे कामों पर बसर करता है। उनके लिए यह स्थिति बहुत ही चुनौतीपूर्ण है क्योंकि न तो उनके पास कोई साधन हैं और न ही अब काम।

घरेलू काम करने वाले लोग, सिक्योरिटी गार्ड, रिक्शा चलाने वाले, कचरा उठाने वाले, या फिर दैनिक तौर पर सब्ज़ी आदि बेचने वालों के बारे में सोचकर ही दिल उदास होने लगता है। पता नहीं, यह लोग कैसे अपना और अपने घर का खर्च चला रहे होंगे।

सरकार ने 26 मार्च, 2020 को गरीबों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की है। लेकिन इससे भी ज्यादा सुकून देने वाली बात यह है कि कुछ नेक दिल लोगों ने किसी घोषणा का इंतज़ार किए बिना खुद इनकी मदद करने की पहल की।

हम आपको चार शहरों में चल रहे 6 अभियानों के बारे में बता रहे हैं जिनके ज़रिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी ज़रूरतमंद भूखा न रहे!

1. हसिरू डाला, बंगलुरु

Helping Hand

बंगलुरु स्थित सामाजिक संगठन, हसिरू डाला कचरा इकट्ठा करने वाले लोगों के अधिकारों के हित में काम करता है। उन्होंने कर्नाटक के छह शहरों में गरीबी रेखा/राशन कार्ड, सार्वजनिक आवास और अप्रत्याशित आय से जूझ रहे 1000 से ज्यादा कचरा इकट्ठा करने वाले परिवारों की पहचान की है। इन शहरों में, बंगलुरु, मैसूर, तुमकुरु,दावणगेरे, हुबली और धारवाड़ शामिल हैं।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए, संगठन की फाउंडर नलिनी शेखर ने कहा, “ज़्यादातर लोगों के पास घर से काम करने की सुविधा है, लेकिन ये कचरा इकट्ठा करने वाले परिवार दो वक़्त की रोटी के लिए मशक्कत कर रहें हैं। जिस कचरे को इकट्ठा करके वे दिहाड़ी कमाते थे अब वह कम हो गया है और उनके बच्चे भी स्कूल नहीं जा रहें हैं तो उन्हें मिड डे मील भी नहीं मिला रहा है। तीन हज़ार से ज्यादा लोगों के पास आमदनी के लिए कोई नौकरी नहीं है। जिन लोगों को पब्लिक हाउसिंग नहीं मिली है वे झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं। इन लोगों के पास ज्यादा मात्रा में खाना स्टोर करने के लिए न तो पैसे हैं और न ही जगह। हमें इन परिवारों को केयर किट देने के लिए फंडिंग और वॉलंटियर्स की ज़रूरत है।”

एक केयर किट में 5 किलो गेंहूँ/चावल, दो किलो दाल और दो साबुन हैं और इसकी लागत 550 रुपये है। लागत में उनके घरों तक सामान पहुंचाने का ट्रांसपोर्टेशन खर्च भी जोड़ा गया है। 25 मार्च से ही हसिरू डाला 500 से ज्यादा परिवारों को खाना पहुंचा रहा है।

फ़िलहाल, संगठन अपने फंड इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन अगर लॉकडाउन चलता रहा तो उनके लिए मैनेज करना मुश्किल हो जाएगा। आप उनकी इस अभियान में मदद कर सकते हैं:

Account name: Hasiru Dala
Savings Account no: 64132965349
State Bank of India, Cauvery Bhavan Branch, Bengaluru
IFSC code: SBIN0003182

या फिर आप उनके फंडरेजर पर सीधा डोनेट कर सकते हैं। यहाँ पर क्लिक करें!

हसिरू डाला के साथ वॉलंटियर करने के लिए covid19carekit@hasirudala.in पर मेल करें!

2. यूथ फॉर यूनिटी एंड वॉलंटरी एक्शन (YUVA), मुंबई:

YUVA Helping the needy

मुंबई स्थित एनजीओ यूथ फ़ॉर यूनिटी एंड वॉलंटरी एक्शन (YUVA) ने ग्रेटर मुंबई के चार स्थानों- वसई, विरार, मुंबई, नवी मुंबई और पनवेल में 20+ बस्तियों में एक प्रारंभिक मूल्यांकन किया जहां वे काम करते हैं। उन्हें पता चला कि यहाँ कम आय वाले 1,500 से अधिक कमजोर परिवारों को सहायता की बहुत ज़रूरत है।

YUVA ने यहाँ पर अपने अभियान, ‘Together We Can’ यानी कि ‘हम साथ में कर सकते हैं’ की शुरुआत की। उन्होंने इन गरीब परिवारों के यहाँ आपातकालीन स्थिति में खाना पहुंचाने के लिए फंड्स इकट्ठा किए। उनकी फ़ूड किट में, दाल, गेंहूँ, चावल और तेल है, जो एक हफ्ते तक आराम से चलेगा। इस एक किट की लागत 600 रुपये पड़ी है। वॉलंटियर्स ने लॉकडाउन से पहले 688 परिवारों को यह फ़ूड पैकेट बांटे थे। इन परिवारों में करीब 3,500 लोग थे।

संगठन के एक सदस्य जयकिशन ने बताया, “हमें खाना बांटने वाली अपनी टीम की सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (फुल बॉडी सूट, दस्ताने, मास्क) भी चाहिए और ट्रक/टेम्पो ऑपरेटरों का भी साथ चाहिए जो हमें खाना ले जाने और बांटने में मदद कर सकते हैं।”

अगर आप YUVA की मदद करना चाहते हैं तो यहाँ पर क्लिक करें!

आप उनसे 9830795695 या 9167723237 पर संपर्क कर सकते हैं।

3. अधिकार फाउंडेशन, दिल्ली:

Help to the poor in Delhi

लॉकडाउन के बाद, दिल्ली में अधिकार फाउंडेशन के फाउंडर, मोहद अनस ने जामिया नगर और ओखला में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले, रिक्शा चलाने वाले और ड्राईवरों की मदद के लिए पहुंचना शुरू किया।

अनस ने बताया कि लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर इन लोगों पर हुआ है। बहुत से रिक्शाचालक जो 10-12 लोगों के साथ छोटे-छोटे कमरे किराए पर लेकर रहते हैं, उनके लिए छोटे-मोटे होटल और स्टॉल ही खाने का साधन थे। अब उन्हें बाहर से खाना मिल नहीं रहा और उनके छोटे से कमरे में इतनी जगह नहीं कि वे खाना पकाएं। इसलिए अनस और उनकी टीम इन्हें खाना पहुंचा रही है।

24 मार्च से शुरू हुई उनकी ड्राइव 31 मार्च तक चलेगी। वे 400 लोगों को दो वक़्त खाना पहुंचा रहें हैं। वे एक रेस्तरां के साथ मिलकर यह काम रहें हैं।

उन्होंने आगे कहा, “हम लोगों के दरवाजों पर खाना दे आते हैं ताकि भीड़ इकट्ठा न हो। साथ ही, हम मास्क और सैनीटाइज़र का इस्तेमाल कर रहें हैं।”

जरूरतमंद लोग दोपहर के भोजन से पहले, और रात के खाने के लिए शाम 7 बजे से पहले ऑर्डर कर सकते हैं। एक वेज लंच / डिनर प्लेट की लागत 90 रुपये है, एक नॉन-वेज लंच / डिनर प्लेट की लागत 100 रुपये। 400 लोगों का खाना बनाने के लिए 15,200 रुपये प्रति दिन तक की लागत आती है।

आप अधिकार फाउंडेशन की मदद कर सकते हैं:

Adhikar Foundation
A/C- 430501000334
IFSC CODE- ICIC0004305
Branch: SAINI ENCLAVE
Phone Pay/Paytm- +91-8287059359

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उनके अभियान के बारे में ज्यादा जानने के लिए अनस को +916397804723 पर कॉल करें!

4. पालघर की लिनेट्ट डिसूजा:

Help the poor

बोरीवली में रहकर जीव- जन्तुओं के लिए काम करने वाली लिनेट्ट डिसूजा फ़िलहाल अपने होमटाउन पालघर में रह रहीं हैं। यहाँ पर वह दिहाड़ी-मजदूरों की मदद में जुटीं हैं।

द बेटर इंडिया से फ़ोन पर बात करते हुए उन्होंने बताया, “मैं वन्य-जीवों की रक्षा करती हूँ और जानवरों के अधिकारों के लिए कार्य करती हूँ। जब मैं लॉकडाउन पीरियड के लिए अपने घर पालघर आई तो मैंने पुलिस अधीक्षक से खास अनुमति ली ताकि मैं रात में बेसहारा जानवरों को खाना खिला पाऊं। कुछ दिन पहले जब मैं जानवरों को खाना खिलाने गई तो मुझे कुछ दिहाड़ी- मजदूर वहां मिले। उनसे बात करने के बाद मैं उनकी परेशानियों के बारे में सोच रही थी। मैंने अब तक 30 लोगों की मदद की है। मैंने अपने यहाँ किराने वाले को मेरे घर राशन के पैकेट देने को कहा ताकि मैं ज़रुरतमंदों को दे सकूं।”

इस किट में दाल, चावल, तेल और खाना पकाने के लिए कुछ मसाले हैं।

उन्होंने इस अभियान के लिए अभी तक खुद अपनी जेब से ही खर्च किया है। “हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी है। मेरे पति गायनॉकोलोजिस्ट हैं, हमारा अस्पताल और ब्लड बैंक है। इसलिए मुझे ख़ुशी है मैंने लोगों की मदद कर पा रही हूँ।”

जिन लोगों को जरूरत है, वे कांता अस्पताल, पालघर के पास से मुफ्त में फ़ूड किट ले सकते हैं। आप उनसे 9765472264 पर संपर्क कर सकते हैं।

5. रोटी घर, मुंबई:

Corona Help

मुंबई में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता, चीनू क्वात्रा के रोटी घर ने भी दिहाड़ी-मजदूरों के लिए अपनी रसोई के दरवाजे खोल दिए हैं।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए, क्वात्रा ने कहा कि उन्होंने मुंबई, ठाणे, ऐरोली, भिवंडी में 1,000 फ़ूड पैकेट सिक्योरिटी गार्ड, मजदूरों और कचरा बीनने वालों तक पहुंचाए हैं।

वह कहते हैं, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस लॉकडाउन में रोटी घर को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए हमारे सात सदस्यों ने डीसीपी जोन – 9 द्वारा मुंबई पुलिस से ‘आवश्यक सेवा पास’ लिया है।”

स्वयंसेवकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, कोई भीड़ या फिर सभा नहीं लगेगी। खाना पैकेट्स में पैक करके वैन की मदद से बांटा जा रहा है।  इसके अलावा, स्वयंसेवक मास्क, काले चश्मे, दस्ताने, टोपी भी पहन रहे हैं और सैनिटाइज़र का उपयोग कर रहें हैं।

Corona Help

रोटी घर दिन में दो बार फूड पैकेट्स बांट रहा है। इस एक पैकेट की कीमत 25 रुपये है। आप कुछ डोनेशन देकर इस पहल में उनका साथ दे सकते हैं:

Paytm/Google Pay on 9769181218
For Neft/Imps transfers:
Account holder’s name: Khushiyaan Foundation
A/c no: 919010011925633
IFSC code- UTIB0000772
Bank: Axis Bank
Branch – Ghodbunder Road, Thane
A/c type – Savings

6. सफाई करने वाले लोगों की मदद के लिए एकजुट हुए चेन्नई के लोग:

Feed the needy

ज़रूरी नहीं की सुपर हीरो सिर्फ पर्दे पर ही दिखें। कुछ सुपर हीरो हमारे आस-पास भी होते हैं, जो हाथों में झाड़ू लेकर और मास्क पहनकर कचरे के ढ़ेरों से हमें निजात दिलाते हैं। चाहे बाढ़ आए या फिर कोरोना वायरस, इनका काम कभी नहीं रुकता। ये सिपाही हर रोज़ चेन्नई की सड़कों की स्वच्छता बरकरार रखते हैं।

इन लोगों की मदद करने के लिए चेन्नई के लोग, उन्हें सैनिटाइज़र, दस्ताने और डिस्पोजेबल मास्क प्रदान करने की कोशिश कर रहें हैं।

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पर स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, जोन 13 चेन्नई के निवासियों ने फंड इकट्ठा करना शुरू किया है। ये सफाई कर्मचारी बहुत ही कम आमदनी पर काम करते हैं और इनके पास कोई पेंशन या फिर अतिरिक्त बचत नहीं होती। आपकी मदद से इन कर्मचारियों की बेहतरी के लिए एक मदद फंड तैयार किया जा सकता है।

जुटाई गई राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। अपना योगदान देने के लिए यहाँ पर क्लिक करें!

अपने घर पर रहते हुए और अपने परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए, इन ज़रूरतमंदों के बारे में भी ज़रूर सोचें और यथासंभव मदद करने की कोशिश करें!

मूल लेख: जोविटा अरान्हा

संपादन – अर्चना गुप्ता


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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