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कोरोना हीरोज: मेड-इन-इंडिया टेस्टिंग किट्स, वेंटीलेटर्स बना रहे हैं ये स्टार्टअप!

ICMR के अनुसार, COVID-19 से ग्रस्त मरीज़ों में से लगभग 5% को बहुत ज्यादा देखभाल की ज़रूरत होगी और इसे देखते हुए देश की कुछ मेडिकल-टेक्नोलॉजी कंपनियां दिन-रात काम कर रहीं हैं।

Startup helping hospitals

कुछ दिन पहले ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी। देश में सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवाएं, एयरलाइन, ट्रेन और बसें बंद हैं ताकि कोरोना वायरस को जितना जल्दी हो सके काबू में कर लिया जाए।

29 मार्च तक भारत में कोरोना वायरस के सक्रिय मामले 901 तक पहुँच चुके हैं और इनमें से 27 लोगों की मौत हो चुकी हैं। इस वक़्त, हमारे अस्पतालों को टेस्टिंग किट, वेंटीलेटर, और N95 मास्क जैसी ज़रूरी चीजों की ज़रूरत है।

अच्छी बात यह है कि कुछ स्टार्टअप आगे आकर इस कमी को पूरा करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

1. मायलैब (टेस्टिंग किट)

कुछ दिन पहले ही, पुणे स्थित मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को COVID-19 टेस्टिंग किट बनाने में सफलता मिली है। अच्छी बात यह है कि सरकार ने मायलैब को उनकी पैथोडिटेक्ट COVID-19 क्वालिटेटिव पीसीआर किट अस्पतालों को सप्लाई करने की अनुमति दे दी है। ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर देते हुए, मायलैब ने केंद्र सरकार की मदद से यह COVID-19 टेस्टिंग किट तैयार की है। इन किट को बनाने के लिए WHO/CDC के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया है।

स्टार्टअप द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, “मायलैब ने वादा किया है कि वे एक हफ्ते में एक लाख टेस्ट किट्स का निर्माण करा सकते हैं और अगर ज़रूरत पड़ी तो और ज्यादा। साथ ही, कंपनी का दावा है कि एक टेस्ट किट की मदद से 100 मरीज़ों का टेस्ट किया जा सकता है। एक सामान्य लैब, जिसमें ऑटोमेटेड पीसीआर है, एक दिन में 1000 से ज्यादा लोगों को टेस्ट कर सकती है।”

आगे उनकी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, यह भारत के लिए एक बड़ी सफलता है। क्योंकि उनकी टेस्टिंग किट का मूल्य, फिलहाल इस्तेमाल की जा रही किट की कीमत का सिर्फ एक चौथाई है। साथ ही, उनकी किट से इन्फेक्शन का पता मात्र 2.5 घंटे में चल जाता है जबकि, अभी इस्तेमाल किए जा रहे किट से 7 घंटे से ज्यादा का समय लग रहा है। इसका मतलब है कि लैबोरेट्रीज एक वक़्त में एक ही मशीन पर दुगनी गति से टेस्ट कर पाएंगी।

“हमारी कंपनी पहले सालों से उच्च गुणवत्ता वाली मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक किट्स बना रही है। COVID-19 महामारी में, हम अपनी निर्माण करने की और रिसर्च व डेवलपमेंट की क्षमताओं को उपयोग करने में सक्षम हैं। हमारी कंपनी के लिए यह गर्व की बात है कि हम इस महामारी में अपना योगदान दे पा रहें हैं,” मायलैब के मेडिकल अफेयर्स डायरेक्टर, डॉ. गौतम वानखेड़े ने द बेटर इंडिया को बताया।

पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स ने सबसे बड़ी चिंता यही जताई थी कि भारत पर्याप्त टेस्ट नहीं कर रहा है और इस वजह से कोरोना वायरस के फैलने के सही आंकड़े नहीं मिल रहे हैं। जर्मनी जैसे देशों से टेस्टिंग किट मंगवाने में भी बहुत-सी समस्याएं आ रहीं थीं।

2. एग्वा हेल्थकेयर/AgVa Healthcare (Ventilator)

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के अनुसार, COVID-19 से ग्रस्त मरीज़ों में से लगभग 5 प्रतिशत को बहुत ज्यादा देखभाल की ज़रूरत होगी और इनमें से आधों को मैकेनिकल वेंटिलेशन पर रखना पड़ेगा। इसलिए अस्पतालों को इन मरीज़ों के इलाज के लिए पर्याप्त मात्रा में वेंटिलेटर चाहिए। मरीज़ के फेफड़े खराब होने पर उसे इसी वेंटीलेटर की मदद से कृत्रिम सांस दी जाएगी।

बिज़नेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने नोएडा स्थित मेडिकल-टेक्नोलॉजी स्टार्टअप, AgVa Healthcare से बात की। उन्हें 15 अप्रैल तक 5,000 वेंटीलेटर्स बनाने के लिए कहा गया है। अब तक, यह स्टार्टअप एम्स, सफदरजंग जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर्स की आपूर्ति कर रहा है।

MyLab Testing Kit
(Source: Twitter/Professor Diwakar Vaish)

मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह स्टार्टअप अपने वेंटीलेटर बनाने की क्षमता को बढ़ाने पर काम कर रहा है। पहले वे हर महीने 150 वेंटीलेटर बनाते थे, लेकिन अब उन्होंने 12,000 वेंटीलेटर प्रति माह बनाने की ठानी है। उनका कहना है, “एक वेंटीलेटर की कीमत 5 लाख रुपये से 12 लाख रुपये तक होती है। AgVa के मुताबिक उनका वेंटीलेटर 2 लाख रुपये का है। अब तक यह सबसे सस्ता लेकिन बेसिक वेंटीलेटर है।”

लेकिन, इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, सरकार द्वारा एयरलाइन पर बैन लगने से, वेंटीलेटर के ज़रूरी सेंसर, चिप्स और माइक्रोकंट्रोलर्स को मंगवाना मुश्किल हो गया है।

3. नैनोक्लीन ग्लोबल (N95 फेस मास्क)

फ़िलहाल, देश के हालात ऐसे हैं कि चिकित्सकों के लिए भी मास्क्स की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस स्थिति के लड़ने के लिए दिल्ली स्थित स्टार्टअप नैनोक्लिन ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड ने अपने यहां नैज़ो मास्क का उत्पादन बढ़ा दिया है। ये N95/FFP2 ग्रेड फेस मास्क हैं जो संक्रामक वायरस से बचाव के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

मास्क के अंदर एक नैनोफाइबर लगाया गया है जो बैक्टीरिया, अल्ट्रा फाइन डस्ट और वायरस को रोकता है।

IIT दिल्ली से पढ़े, प्रतीक शर्मा, तुषार व्यास और जतिन केवलानी द्वारा शुरू किया गया यह स्टार्टअप 249 रुपये में यह नैज़ो मास्क दे रहा है। COVID-19 जबसे फैलना शुरू हुआ है तब से ही यह स्टार्टअप मास्क के ज्यादा उत्पादन में लगा हुआ है।

Startups helping doctors
Naso mask (Source: Nanoclean Global)

प्रतीक शर्मा ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए कहा कि वे दिल्ली-एनसीआर, मुंबई के अस्पतालों में मास्क सप्लाई कर रहे हैं और जल्दी ही, हैदराबाद में भी करेंगे। फ़िलहाल, वे लॉकडाउन की वजह से इन मास्क की डिलीवरी के लिए लॉजिस्टिक्स पर काम कर रहे हैं। उनके बहुत से डिलिवरी पैकेट राज्यों की सीमा पर रुके हुए हैं और वे इस पर काम कर रहे हैं।

जनता कर्फ्यू से पहले वे एक दिन में 25 हज़ार मास्क डिलीवर कर पा रहे थे। लेकिन जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है, कोई डिलीवरी नहीं हो पाई है। हालांकि, उनका प्रोडक्शन नहीं रुका है। लेकिन फिर भी उनकी कोशिश है कि वे जहां-जहां मास्क पहुंचा सकते हैं, पहुंचा रहें हैं।

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इन स्टार्टअप्स के अलावा और भी कई फर्म हैं जो इन ज़रूरी चीजों की कमी को पूरा करने में जुटें हैं। लेकिन जिस तरह से देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, हमारे अस्पतालों को वैसे ही तैयार रहना होगा। अगर कोई और स्टार्टअप जो इसमें मदद कर रहा है तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं!

मूल लेख: रिनचेन नोरबू वांगचुक

संपादन – अर्चना गुप्ता


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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