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कोरोना हीरोज़: देश भर में बुजुर्गों के दरवाज़े तक ज़रूरी चीज़ें पहुंचा रही है इस महिला की पहल!

महिता की यह पहल सिर्फ बंगलुरु ही नहीं बल्कि देश के अन्य भागों में भी पहुँच चुकी है। आप भी बन सकते हैं ‘Caremongers India’ का हिस्सा!

कुछ दिन पहले, महिता नागराज को यूके में रहने वाली अपनी एक दोस्त का फ़ोन आया। उनकी दोस्त चाहतीं थीं कि महिता उनके बुजुर्ग माता-पिता के लिए ग्रॉसरी का ज़रूरी सामान पहुंचा दें। उनके बुजुर्ग माता-पिता बंगलुरु के कोरामंगला में रहते हैं और उनके लिए वह दोस्त काफी परेशान थीं।

दुनियाभर में कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से सभी बुजुर्गों को अपने घरों में रहने की हिदायत है क्योंकि उन्हें संक्रमण होने के खतरा सबसे ज्यादा है।

महिता ने अपनी दोस्त को तसल्ली दी और फिर खुद जाकर सभी सामान उनके माता-पिता तक पहुँचाया। इसके दूसरे दिन, उन्हें अपनी एक अमेरिका में रहने वाली दोस्त का फ़ोन आया और उसने भी उनसे यही कहा कि वह उनके माता-पिता को कुछ ज़रूरी सामान और दवाइयां दे आएं।

महिता बताती हैं, “तब मुझे यह आइडिया आया। सभी जगह डॉक्टरों ने बुजुर्गों को कहीं भी बाहर न निकलने और घर में रहने की सलाह दी है। मेरे बहुत से दोस्त और रिश्तेदार विदेशों में रहते हैं और बंगलुरु में रह रहे अपने माता-पिता की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं। मैंने उनके लिए वॉलंटियर करने का फैसला किया और उनके दरवाजे तक सभी ज़रूरी ग्रॉसरी, दवाइयां और राशन पहुँचाने की ठानी।”

उन्होंने अपने इस आइडिया को फेसबुक पर पोस्ट किया और लिखा कि उनके दोस्त या फिर कोई अन्य बुजुर्ग और ज़रूरतमंद व्यक्ति, उन्हें बेहिचक संपर्क कर सकते हैं। महिता ने बिल्कुल भी नहीं सोचा था कि उनका एक छोटा-सा फेसबुक पोस्ट पूरे देश में एक ‘Caremongering’ अभियान चला देगा।

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर क्या है Caremongering? यह शब्द अंग्रेजी के ‘Scaremongering’ शब्द से मिला है। Scaremongering का मतलब होता है ऐसी अफवाह फैलाना जो लोगों के मन में डर पैदा करें। लेकिन महिता ने इस डर भरे माहौल में लोगों के लिए केयर और आशा की किरण फैलाने की सोची। इसलिए ये एक ‘Caremongering’ अभियान बन गया।

देशभर से मिल रहा है साथ

38 वर्षीय महिता एक बच्चे की माँ हैं और पेशे से डिजिटल मार्केटर हैं। उन्होंने द बेटर इंडिया को बताया, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे लोगों से इतनी ज्यादा प्रतिक्रिया मिलेगी। पूरे बंगलुरु से मुझे फ़ोन आए। ये सभी लोग बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और हर एक ज़रूरतमंद इंसान की मदद करने के लिए वॉलंटियर करना चाहते थे।”

17 मार्च, मंगलवार को महिता ने फेसबुक पर एक पब्लिक ग्रुप, ‘Caremongers India’ शुरू किया और इस ग्रुप से फिलहाल 500 से भी ज्यादा वॉलंटियर जुड़ चुके हैं। इसके लॉन्च होने के एक दिन के भीतर ही, इस अभियान में सिर्फ बंगलुरु के ही नहीं बल्कि चेन्नई, हैदराबाद, दिल्ली, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लोग शामिल हो चुके हैं।

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Mahita delivering some essentials to an elderly couple

सभी सदस्य अपने संपर्क सूत्र और उन जगहों के बारे में बताते हैं जहां पर वे सर्विस दे सकते हैं। वह बताती हैं कि एक-दो दिन पहले उन्हें एक माँ ने संपर्क किया जिन्हें अपने नवजात बच्चे के लिए बेबी फ़ॉर्मूला चाहिए था। कनकपुरा रोड के पास से एक वॉलंटियर ने अगले आधे घंटे में डिलीवरी कर दी।

इसी तरह, उन्हें एक दिन एक बुजुर्ग दंपति ने फ़ोन किया। महिता शांति नगर में रहती हैं और उन्हें यह कॉल एमजी रोड से आई थी। उन्होंने बताया कि उन अंकल-आंटी को पैसों की ज़रूरत थी और उनके घर के पास के एटीएम में कैश नहीं था। उन्होंने महिता से कहा कि वे उन्हें ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर देंगे, और वह उन्हें कहीं से कैश लाकर दे दें। महिता तुरंत उनकी मदद के लिए पहुँचीं।

बरतें एहतियात

इस अभियान से जुड़े सभी लोगों को हिदायत दी गई है कि वे जिनको भी सामान पहुंचा रहे हैं, उनसे मिले नहीं। महिता खुद काफी सावधानी बरत रहीं हैं क्योंकि वह अपने बच्चे और बुजुर्ग माँ के साथ रहतीं हैं। वह पार्सल या तो सिक्योरिटी गार्ड को दे देतीं हैं या फिर घर के दरवाजे पर रख आतीं हैं।

“मुझे अपने परिवार को भी सुरक्षित रखना है। मैं ट्रांसमीटर (Covid-19 के लिए) नहीं बन सकती,” उन्होंने कहा।

उनके अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि यही वक़्त है जब युवाओं को आगे बढ़कर बुजुर्गों का सहारा बनना चहिए। उनका एक ही मकसद है – ‘Stop Scaremongering, Start Caremongering, जिसका मतलब है कि लोगों को डर फ़ैलाने की बजाय दूसरों के प्रति संवेदनशील और मददगार होना चाहिए।

अगर आप भी इस ग्रुप से जुड़कर इस नेक अभियान का हिस्सा बनाना चाहते हैं तो यहां पर क्लिक करें!

मूल लेख: सायंतनी नाथ
संपादन- अर्चना गुप्ता


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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