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सरकारी स्कूल की ईमारत गिरा दिए जाने पर गांववालों ने मिलकर किराये के मकान में चलाये रखा स्कूल!

सितम्बर 2016 में पंजाब के फतेहपुर अवाना गाँव का एकमात्र प्राथमिक सरकारी विद्यालय की ईमारत को असुरक्षित बताकर गिरा दिया गया। लुधियाना शहर से महज़ 10 किमी दूर बसा ये गाँव अब तक स्कूल की नयी ईमारत के लिए सरकार की ओर से पैसो का इंतज़ार कर रहा है।

पर आज बस पांच महीनो बाद नए साल के साथ साथ इस स्कूल की भी नयी शुरुआत हो चुकी है।

आप सोच रहे होंगे,ये कैसे हुआ!

फतेहपुर अवाना गाँव के सभी गांववाले मिलकर इस स्कूल को एक किराए के मकान में चला रहे है और मिलकर इसका किराया भी दे रहे है।

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Photo for representation. Source: Pixabay 

सिर्फ ईमारत न होने के कारण गाँव का ये एकमात्र स्कूल बंद न हो जाए इसलिए गांववालों ने मिलकर ये फैसला लिया। टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत के दौरान स्कूल के प्रधान अध्यापक, श्री मुकेश सैनी ने कहा, “हम बच्चो की पढाई बंद नहीं कर सकते थे। कुछ गांवालो ने सलाह दी कि हम किराए के मकान में बच्चो को पढाये।”

इसके बाद एक तीन कमरे का मकान किराये पर लिया गया जिसका किराया गाँव के कुछ मुखिया बारी बारी भरते है।

इस स्कूल में 140 छात्र पढ़ते है और इन सभी को 3 कमरों में पढ़ाना थोडा मुश्किल है पर मकान के बरामदे को भी क्लास रूम की तरह इस्तेमाल करके और पुरानी स्कूल की ईमारत में बचे एक कमरे को इस्तेमाल करके काम चलाया जा रहा है। बच्चो के बैठने के लिए जहाँ पास के गाँव के एक बंद हो चुके निजी स्कूल से 20 बेंचे मंगाई गयी है वहीँ बाकी के बच्चे चटाई बिछाकर बैठ जाते है।

स्कूल की नयी ईमारत में 155 कमरे बनने है, जिसके लिए सरकार की ओर से आनेवाले पैसो का इंतज़ार किया जा रहा है। पर गांववालों का कहना है कि जब तक ऐसा नहीं हो जाता तब तक वो लोग इसी तरह किराया देकर इस मकान में बच्चो का स्कूल जारी रखेंगे।

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Written by मानबी कटोच

मानबी बच्चर कटोच एक पूर्व अभियंता है तथा विप्रो और फ्रांकफिंन जैसी कंपनियो के साथ काम कर चुकी है. मानबी को बचपन से ही लिखने का शौक था और अब ये शौक ही उनका जीवन बन गया है. मानबी के निजी ब्लॉग्स पढ़ने के लिए उन्हे ट्विटर पर फॉलो करे @manabi5

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