in

सूखे पत्तों से घर पर बनाइए खाद, एक्सपर्ट्स से जानिए कैसे!

आप अपने घर की किसी बाल्टी या फिर डिब्बे में भी खाद बना सकते हैं और यह बहुत ही आसान है!

कुछ दिन पहले, बंगलुरु में रहने वाली हमारी एक पाठक, सुमन शर्मा ने हमसे संपर्क किया और बताया कि वह हर दिन रास्ते से सूखे पत्ते इकट्ठा करतीं हैं। सुमन इन पत्तों से खाद बनाना चाहतीं हैं, लेकिन उनके पास जगह सीमित है। इसलिए वह ऐसा तरीका जानना चाहतीं हैं, जिससे बिना किसी बड़े सेट-अप के, वह खाद बना पाएं।

उनकी मदद के लिए हमने मुंबई में रहने वाले एचबी सिंह से संपर्क किया, जिन्होंने अपनी सोसाइटी के कचरे से 400 किलो खाद बनवाई है और इस खाद से सोसाइटी के पार्क को हरा-भरा रखा जा रहा है।

हमने पुणे की मृणाल पटेल से भी बात की, जो अपने घर के गीले कचरे से खाद बनातीं हैं और अब वह अपने दोस्तों को यह खाद बेच रहीं हैं।

इस लेख में हम बताएंगे कि इन दोनों एक्सपर्ट्स ने सुमन की समस्या का क्या हल बताया है!

 

सबसे पहले क्या करें:

आपकी खाद अच्छी बनें और इसमें कोई बदबू न आए, इसके लिए ज़रूरी है कि आप ध्यान रखें कि गीला कचरा जहां इकट्ठा कर रहे हैं वहां वेंटीलेशन अच्छा हो। इसके बाद आप सभी कचरे को अच्छी तरह से मिक्स करें।

अगर आप पहली बार खाद बना रहे हैं तो आपको ज्यादा परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से होम-कम्पोस्टिंग किट यानी कि घर में ही खाद बनाने के लिए पहले से तैयार बाल्टी और अन्य चीजें खरीद सकते हैं। अगर आपको अकेले खाद बनानी है तो आप एक व्यक्ति के लिए किट खरीदें। इसके अलावा, 2- 3 लोगों या 4 लोगों के लिए होम कम्पोस्टिंग किट भी आप खरीद सकते हैं

Compost
Home Composting Kit

इन बाल्टियों के ढक्कन अच्छे से बंद होते हैं और इनमें वेंटिलेशन के लिए सही जगहों पर छेद किए गए हैं। साथ ही, आपको कम्पोस्टिंग मिक्स पाउडर भी मिलता है, जो गीले कचरे से बदबू को दूर करता है और इसे खाद में बदलने के लिए कैटेलिस्ट के तौर पर काम करता है।

आज ही होम-कम्पोस्टिंग किट खरीदने के लिए यहाँ पर क्लिक करें!

अगर आपको खाद बनाने का अनुभव है तो आप अपने घर की किसी बाल्टी या फिर डिब्बे को भी कम्पोस्टिंग किट में बदल सकते हैं!

 

सूखे पत्तों से कैसे बनाए खाद:

सिंह बताते हैं कि अगर आपने काफी ज्यादा मात्रा में पत्ते इकट्ठे किए हैं तो यह 18 लीटर की बाल्टी में आ सकते हैं। गीले कचरे से खाद बनाने वाले लोग भी यह प्रक्रिया फॉलो कर सकते हैं। क्योंकि अगर वे गीले कचरे के साथ सूखे पत्तों की भी एक परत रखते हैं तो यह नमी को सोखने का काम करेंगे।

Compost
Fecal sludge is processed to make compost

सिंह के मुताबिक, सबसे पहले आप पत्तों को धूप में सुखाएं ताकि इनमें बिल्कुल भी नमी न रहे। इसके बाद इन्हें मसलकर इनका पाउडर बना लें। अब इसमें से आधा पाउडर बाल्टी में डालें और बाकी को बाद के लिए रखें।

अब इसमें एक परत रीमिक्स पाउडर की डालें या फिर गोबर मिलाएं। अब 8 से 10 दिनों तक पाउडर या फिर गोबर में मौजूद जीवाणुओं को अपना काम करने दें। याद रखें कि अगर आप गोबर डाल रहें हैं तो इस पूरे मिक्स को बार-बार हिलाते रहें। इससे पत्तों और गीले कचरे को ऑक्सीजन मिलेगा और इस मिक्स को डीकंपोज होने में आसानी होगी। लेकिन आपने रीमिक्स पाउडर मिलाया है तो ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है।

Promotion

8- 10 दिन बाद, आप देखेंगे कि इस पूरे मिश्रण से पानी निकल रहा है। यह इस बात का संकेत है कि आप बाकी बचे हुए सूखे पत्तों के पाउडर को इसमें मिलाएं। लेकिन एक साथ आपको सारा पाउडर नहीं मिलाना है बल्कि थोड़ा-थोड़ा करके कई दिनों तक यह प्रक्रिया करें।

दो हफ्ते बाद, आप इसमें फलों और सब्जियों के छिलके या बचा हुआ खाना मिला सकते हैं। जब पहली बाल्टी भर जाए तो आप दूसरी बाल्टी में यह प्रक्रिया शुरू करें। ध्यान रहे कि आप बाल्टियों का ढक्कन सही से बंद करें। कम्पोस्टिंग किट का अगर आप इस्तेमाल कर रहे हैं तो ध्यान रहे कि पहली बाल्टी पूरी भर जाने के बाद ही दूसरी बाल्टी में शुरुआत करें।

जब तक आपकी दूसरी बाल्टी भरेगी (औसतन 3 हफ्ते में), तब तक आपकी पहली बाल्टी में खाद बन चुकी होगी और अब आप इसे अपने पेड़-पौधों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसमें से खाद निकालने के बाद फिर से यह प्रक्रिया शुरू करें।

कम्पोस्टिंग मिक्स खरीदने के लिए यहाँ पर क्लिक करें। आपको यह सिर्फ एक बार खरीदने की ज़रूरत है। क्योंकि एक बार खाद बनने के बाद आप इसी खाद को अगली प्रक्रिया में कैटेलिस्ट की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

कैसे करें खाद का इस्तेमाल:

Composting
A patch of Mrunal Patel’s garden. You can get similar grow bags by clicking on this link.

मृणाल पटेल के परिवार में उनके बेटे और पति हैं। यह परिवार पर्याप्त मात्रा में फल और सब्ज़ियाँ खाता है, जिससे इनके छिलकों को खाद बनाने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। यह खाद उनके घर के बगीचे के रख-रखाव के लिए काफी होती है।

मृणाल कहती हैं, “सबसे पहले अपने घर में पेड़-पौधों से शुरू करें। अगर आपके यहाँ कोई बगीचा नहीं है तो आप घर के अंदर ही छोटे-बड़े पेड़ लगा सकते हैं। बाकी बची हुई खाद को आप ऐसे लोगों को दे सकते हैं, जिनके यहाँ पेड़ हैं। खासतौर पर वह माली, जो दिन की मजदूरी पर काम करते हैं, उनके लिए यह मुफ्त की खाद काफी मददगार होगी। साथ ही, सार्वजनिक बगीचों आदि में इस खाद का अच्छा इस्तेमाल हो सकता है।”

इंडोर प्लांट्स लगाने के साथ-साथ आप अपने घर में जैविक सब्ज़ियाँ उगा सकते हैं, इससे आपके परिवार को ताज़ा खाना मिलेगा। आज ही अपना बालकनी या टेरेस गार्डन शुरू करने के लिए यहाँ से ग्रो किट खरीदें!

कुछ समय पहले ही, पटेल को पता चला कि उनके अपने सोशल सर्कल में जैविक खाद की काफी मांग है। इसके बाद, उन्होंने अपने यहाँ बचने वाली खाद को छोटे-छोटे पैकेट्स में पैक करके कम से कम दाम पर बेचना शुरू किया। जबकि सिंह, फिलहाल इससे एक स्टेप आगे काम कर रहे हैं। वह 20 किलो खाद के पैक बनाते हैं और इसे एक नर्सरी में देते हैं। हालांकि, सिंह की तरह कमर्शियल काम करने के लिए आपको एक बड़े सेट-अप और ऑफिशियल बिज़नेस की ज़रूरत पड़ेगी।

अंत में, हम सिर्फ इतना कहेंगे कि खाद बनाना एक अच्छी आदत है, उनके लिए जिनके यहाँ बगीचा है और जो अपने गीले कचरे को अच्छे से मैनेज करना चाहते हैं।

मूल लेख: तन्वी पटेल 

संपादन – अर्चना गुप्ता


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है, या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ साझा करना चाहते हो, तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखें, या Facebook और Twitter पर संपर्क करें। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो 7337854222 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं।

Promotion

देश में हो रही हर अच्छी ख़बर को द बेटर इंडिया आप तक पहुँचाना चाहता है। सकारात्मक पत्रकारिता के ज़रिए हम भारत को बेहतर बनाना चाहते हैं, जो आपके साथ के बिना मुमकिन नहीं है। यदि आप द बेटर इंडिया पर छपी इन अच्छी ख़बरों को पढ़ते हैं, पसंद करते हैं और इन्हें पढ़कर अपने देश पर गर्व महसूस करते हैं, तो इस मुहिम को आगे बढ़ाने में हमारा साथ दें। नीचे दिए बटन पर क्लिक करें -

₹   999 ₹   2999

Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

IBM कंपनी में जनरल मैनेजर की नौकरी छोड़ ऑर्गेनिक खेती की, चार हजार किसानों को जोड़ा

कोरोना वायरस अलर्ट: कैसे करें आपातकालीन स्थिति की तैयारी और किन चीज़ों की खरीददारी!