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कोरोनावायरस अलर्ट: क्या है तथ्य और क्या है मिथक, जानिए डॉक्टर से!

फ़िलहाल, सबसे ज्यादा ज़रूरी यह है कि हम न तो खुद डरें और न ही गलत मैसेज फॉरवर्ड करके लोगों को डराएं।

भारत में कोरोना वायरस के अब तक 31 मामले सामने आ चुके हैं। जैसे-जैसे यह खबर लोगों तक पहुँच रही है, देश में डर का माहौल बन रहा है क्योंकि सोशल मीडिया के ज़रिए बहुत-सी अफवाहें भी फ़ैल रही हैं। दिन भर हमें व्हाट्सअप पर कई मैसेज मिल रहे हैं और हम बिना वेरीफाई किए इन ख़बरों पर भरोसा कर इन्हें आगे फॉरवर्ड कर रहे हैं।

मुझे भी व्हाट्सअप पर मैसेज मिला कि कोरोना वायरस इंसान ने बनाया है और यह दुनिया को खत्म कर देगा। मैंने तुरंत यह मैसेज डिलीट किया और ग्रुप में लिखा कि बिना कोई वेरिफिकेशन किए खबर को सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड न करें।

इस मुश्किल की घड़ी हमें बहुत ही समझदारी से काम लेने की ज़रूरत है। कोरोना वायरस से संबंधित मिथकों पर हमने दिल्ली के वसंत कुंज स्थित फोर्टिस अस्पताल के पल्मोनोलोजी विभाग के हेड और डायरेक्टर, डॉ. विवेक नांगिया से बात की।

1. लहसुन खाने से होगा फायदा?

प्रतीकात्मक तस्वीर

कई दिनों से मुझे भी यह मैसेज मिल रहे हैं कि लहसुन खाने से इस वायरस से लड़ने में मदद मिलेगी। इसलिए हमने डॉ. नांगिया से इस बारे में पूछा और उन्होंने कहा, “अगर आपको लहसुन खाना पसंद है तो आप बेशक खाएं। लेकिन इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि लहसुन खाने से वायरस पर कोई फर्क पड़ेगा।”

“लहसुन, प्याज खाने और थोड़े-थोड़े समय पर पानी पीने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन अगर आप यह इसलिए कर रहे हैं कि इससे कोरोना वायरस नहीं फैलेगा तो इस बात में कोई सच्चाई नहीं है,” उन्होंने आगे बताया।

2. क्या हमें मास्क पहनकर रखना चाहिए?

क्या यह है हल?

इस बारे में भी बहुत अलग-अलग राय लोगों से मिल रही है। एक तरफ, बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को मास्क पहनाकर स्कूल भेज रहे हैं तो दूसरी तरफ कुछ माता-पिता इसका विरोध कर रहे हैं। इस बारे में डॉ. नांगिया का कहना है कि दो तरह के मास्क होते हैं- सर्जिकल मास्क और N95 मास्क।

“सर्जिकल मास्क की सलाह उन लोगों को दी जा रही है, जिनमें कोरोनावायरस के लक्षण मिले हैं। इन लोगों के संपर्क में रहने वाले उनके परिवारजन और उनकी देखभाल करने वाले लोगों को भी यह मास्क पहनाया जा रहा है।”

N95 मास्क, अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा दे रहे कर्मचारियों के लिए है और वह भी ज़रूरी स्थिति में। आप इन्हें OPD या फिर क्लिनिक में नहीं पहन सकते। उन्होंने कहा, “याद रखें कि जब तक आपको कोई स्वास्थ्य सेवा कर्मचारी मास्क पहनने के लिए न कहे, तब तक इसे पहनने का कोई फायदा नहीं है।”

आपको यदि खांसी है या फिर आप बहुत छींक रहे हैं तो आप ज़रूर मास्क पहनें और मास्क पहनने का सही फायदा तभी है जब आप नियमित रूप से अपने हाथ किसी साबुन से धो रहे हैं या फिर अल्कोहल बेस्ड सैनीटाइज़र का इस्तेमाल कर रहे हैं।

साथ में, यह भी याद रखें कि इन मास्क में बहुत से पैथोजन होते हैं और इसलिए इनका उचित डिस्पोजल बहुत ज़रूरी है। इसलिए मास्क का इस्तेमाल करने के बाद इधर-उधर डस्टबिन में न फेंके। सामान्य सर्जिकल मास्क पहनने का एक कारण यह भी है कि इससे आप अपने चेहरे को बार-बार नहीं छूते और इससे इन्फेक्शन कम फैलता है।

3. क्या जानवरों के संपर्क में आने से फ़ैल सकता है वायरस?

प्रतीकात्मक तस्वीर

जिनके घरों में पालतू जानवर हैं, वे इस मिथक की वजह से काफी परेशानियाँ झेल रहे हैं। डॉ. नांगिया कहते हैं कि इस बात की पुष्टि के लिए कोई तथ्य नहीं है। हालांकि, सलाह यही है कि जब भी आप किसी पालतू या फिर अन्य घरेलू जानवर के संपर्क में आएं तो उसके बाद अपने हाथ ज़रूर धोएं।

वह सलाह देते हैं कि आपको मीट, चिकन आदि खाते समय बहुत ध्यान रखने की ज़रूरत है। “मीट खाने में कोई खतरा नहीं है लेकिन ज़रूरी यह है कि आप इसे अच्छे से पकाएं। अगर थोड़ा ज्यादा भी पक गया हो तो भी चलेगा,” उन्होंने कहा।

4. यह सिर्फ बुजुर्गों हो प्रभावित कर रहा है?

प्रतीकात्मक तस्वीर (स्त्रोत)

वह बताते हैं, “अभी तक जो भी रिसर्च हुई है उसके मुताबिक बच्चे थोड़ा खतरे से बाहर है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम अच्छा है। कोरोना वायरस से प्रभावित होने वाला औसत आयु वर्ग 47 साल है।”

यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह वायरस किसी भी आयु के लोगों में फ़ैल सकता है। युवा लोगों में इस वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए कोई स्पेशल प्रोटेक्शन सिस्टम नहीं है। बुजुर्गों में इसके फैलने का ज्यादा खतरा उनकी बढ़ती उम्र और अन्य स्वास्थ्य संबंधित परेशानियाँ हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ बुजुर्गों ही इससे संक्रमित हो सकते हैं।

5. क्या कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति का बचना मुमकिन है?

Coronavirus

डॉ. नांगिया कहते हैं कि कोरोना वायरस होने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि आप मर जाएंगे और यह बात लोगों को समझने की ज़रूरत है। वायरस के लक्षण और इसके प्रभाव को समझें। जिनको कोरोना वायरस हुआ है, उन्हें रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में सामान्य ठंड जैसी हल्की या फिर मध्यम स्तर की बीमारी हो सकती है।

लक्षण: जुकाम, खांसी, गले में दर्द, सिरदर्द और बुखार जो कुछ दिनों के लिए रह सकता है।

बुजुर्ग लोगों को ज्यादा परेशानियाँ हो सकती हैं, लेकिन आपको घबराने की या फिर डरने की ज़रूरत नहीं है। लोगों को खुद को और दूसरों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए समझदारी से काम लेने की ज़रूरत है।

6. वायरस को खत्म करने में एंटीबायोटिक्स फायदेमंद हैं?

प्रतीकात्मक तस्वीर (स्त्रोत)

“एंटीबायोटिक्स, जैसा कि नाम से ही समझ में आ रहा है, बैक्टीरियल इन्फेक्शन से लड़ने के लिए है, न कि वायरस से। इसलिए अगर आपको एंटीबायोटिक्स दी जा रहीं हैं तो इसका कोई फायदा नहीं है,” डॉ. नांगिया ने बताया। याद रखें कि कोरोना वायरस को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

WHO/ विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, अभी तक, कोरोना वायरस के लिए कोई भी वैक्सीन या फिर कोई ट्रीटमेंट नहीं है। इसलिए वायरस से इंफेक्टेड लोगों को सही देखभाल मिलना बहुत ज़रूरी है।

7. जुकाम है तो तुरंत अस्पताल जाएं?

प्रतीकात्मक तस्वीर

“नहीं,” डॉ. नांगिया कहते हैं कि अगर आपको हल्की सी सर्दी, जुकाम या बुखार है तो शुरू के दो-तीन दिन आप इन लक्षणों के मुताबिक ट्रीटमेंट लें। खुद को हाइड्रेटेड और ऑक्सीजेनेटेड रखें।

दूसरों के सम्पर्क में आने से बचें और एक कमरे में ही रहें। थोड़ा वक़्त दें और अगर आपको लगे कि आपके लक्षण बढ़ रहे हैं जैसे कि लगातार बुखार, ढंग से सांस न ले पाना, और छाती में कड़ापन महसूस होना आदि, तभी अस्पताल में चेक-अप के लिए जाएं।

8. हमेशा ग्लव्स पहन कर रखें?

डॉ. नांगिया कहते हैं कि यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह वायरस कैसे फैलता है? वैसे अभी तक इस बात की जानकारी नहीं है कि यह वायरस कैसे लोगों में आसानी से फ़ैल रहा है। लेकिन लग यही रहा है कि लोगों के छींकने और खांसने से यह वायरस हवा में आ जाता है और अगर कोई उसी हवा में सांस ले तो उसे भी यह इन्फेक्शन हो सकता है।
इस स्थिति में ग्लव्स पहनना सही तरीका नहीं है। डॉ. नांगिया कहते हैं कि ग्लव्स भी दूषित हो सकते हैं। सबसे अच्छा तरीका है कि हम पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखें, जिसमें सबसे ज्यादा ज़रूरी है बार-बार हाथों को साबुन से धोना या फिर अल्कोहल बेस्ड सैनीटाइज़र इस्तेमाल करना।

9. अल्कोहल या फिर क्लोरीन स्प्रे करने से नये कोरोना वायरस मर जाएंगे?

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, यह सिर्फ एक मिथक है। अल्कोहल या फिर क्लोरीन अपनी बॉडी पर स्प्रे करने से आपके शरीर में पहले से प्रवेश कर चुके वायरस पर कोई असर नहीं होगा। इस तरह की चीजें अपने शरीर पर डालना आपके कपड़ों और म्यूकस मेम्ब्रेन जैसे मुंह और आँखों के लिए हानिकारक हो सकता है। याद रखें कि अल्कोहल और क्लोरीन सिर्फ सतहों को डिसइंफेक्ट करने के लिए सही हैं, लेकिन यह भी उचित मार्गदर्शन में होना चाहिए।

उम्मीद है कि इस लेख को पढ़ने के बाद आपके बहुत से मिथक टूटे होंगे। इस लेख को ज्यादा से ज्यादा लोगों से साझा करें और उन्हें समझाएं कि डरने की ज़रूरत नहीं है, सिर्फ समझदारी से काम लें।

मूल लेख: विद्या राजा
संपादन – अर्चना गुप्ता


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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