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एक ऐसा बाज़ार जहाँ अब आप आधार कार्ड दिखाकर सब्जियां खरीद और बेच सकते है!

हते है यदि आप सूझ बुझ से काम ले, तो ऐसी कोई परेशानी नहीं है जिसका हल न निकाला जा सके और ऐसी कोई मुसीबत नहीं जिससे आप बाहर न आ सके। 500 और 1000 के नोट बंद होने के दस दिनों बाद भी लोगो की परेशानी दूर होती नज़र नहीं आ रही है। लोगों को रोज़मर्रा के ज़रूरत का सामान खरीदने में भी दिक्कत हो रही है। पर वहीँ हैदराबाद के कूकटपल्ली रायतू बाजार में माहौल कुछ और ही है। यहाँ ने ग्राहकों शुक्रवार को करीब 15000 की सब्जियां खरीदी है।

पर इस बाज़ार में खरीदारी के लिए लोगों को न पुराने नोट बदलने की चिंता करनी पड़ी और न ही नए नोट न होने की वजह से परेशान होना पडा क्यूंकि यहाँ सब्जियां नोटों से नहीं आधार कार्ड से खरीदी गयी।

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तेलंगाना स्टेट मार्केटिंग डिपार्टमेंट की पहल के तहत शुक्रवार को इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट फाइनैंशल कॉरपोरेशन के काउंटर बनाए गए, जहां करंसी की जगह लोगों को टोकन मुहैया करवाए गए। जिन ग्राहको का बैंक खाता उनके आधार कार्ड नंबर से जुड़ा हुआ है, उन्हें  5, 10 और 20 रुपए के टोकन दिए गए। ग्राहकों ने जितने भी रुपयों की सब्जी ली उतने पैसे बाद में सीधे उन लोगों के बैंक अकाउंट से काट लिया गया। और जिन टोकनों का इस्तेमाल नहीं हो सका, उन्हें कैश के रूप में लोगों को दे दिया गया।

इस बेहतरीन सुविधा का फायदा सिर्फ ग्राहकों को ही नहीं बल्कि किसानो और विक्रेताओं को भी हुआ।

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जिन किसानों या सब्जी विक्रेताओं ने टोकन के जरिए पेमेंट लिया, उनके खाते में रकम भी भेज दी गई। यदि किसी के पास बैंक अकाउंट नहीं था, तो इन आईडीएफसी काउंटरों ने अकाउंट खुलवाने का भी काम किया।

तेलंगाना के सिंचाई मंत्री टी. हरीश राव ने बताया, “इस सुविधा का इस्तेमाल शुक्रवार को सुबह 9 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक 95 लोगों ने किया। यदि सबकुछ ठीक रहा तो शनिवार को भी यह व्यवस्था जारी रहेगी। पहले चरण में इसे शहर सभी रायतु बाजारों में लागू करेंगे और दूसरे चरण में इसे अन्य जगहों पर भी लागू किया जाएगा।”

तेलुगु भाषा में रायतु का मतलब होता है किसान। तेलंगाना में काफी समय पहले रायतु बाज़ार की शुरुआत की गयी जहाँ किसान अपना माल सीधा ग्राहकों को बेचते है। किसी भी दुसरे सब्जी बाज़ार के मुकाबले मध्यस्तो के न होने की वजह से इस बाज़ार में सब्जियां काफी कम कीमत पर मिलती है और किसानो को भी बहुत फायदा होता है। नोटबंदी के चलते जिस तरह इस बाज़ार को तुरंत डिजिटल बना दिया गया, उससे ग्राहक और किसान दोनों को और भी लाभ होंगे।

 

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Written by मानबी कटोच

मानबी बच्चर कटोच एक पूर्व अभियंता है तथा विप्रो और फ्रांकफिंन जैसी कंपनियो के साथ काम कर चुकी है. मानबी को बचपन से ही लिखने का शौक था और अब ये शौक ही उनका जीवन बन गया है. मानबी के निजी ब्लॉग्स पढ़ने के लिए उन्हे ट्विटर पर फॉलो करे @manabi5

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