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पौधे लगाकर फोटो खींच ली? अब मंजरी से सीखिए लगाये गए पौधों को कैसे बनाएं फलदार वृक्ष!

मंजरी ने अब तक 3800 पौधे लगाए हैं, जिनमें से 80% सुरक्षित हैं और कई फलदार पेड़ बन चुके हैं!

म अक्सर अख़बारों में पढ़ते हैं कि ‘फलां साल में इतने करोड़ पौधे लगाए गए’ या ‘उस संस्था ने पेड़ लगाने का रिकॉर्ड बनाया’। लेकिन ये शायद कभी पता नहीं चलता कि उन लगाए गए पौधों में कितने पेड़ बने?

हमारी आपकी तरह ये सवाल लखनऊ की मंजरी अनिल उपाध्याय के मन में भी उठता था। ये सब बस ख्याल बनकर रह जाता अगर उस दिन उन्हें सड़क किनारे पौधों में पानी डालते वे दो युवक न दिखते।

“मुझे बच्चों के स्कूल आने- जाने के रास्ते मे कई बार दो युवक सड़क किनारे लगे पौधों को पानी देते नजर आये। लड़के अच्छे घर से और पढ़े- लिखे दिख रहे थे। एक दिन मैंने उनसे उत्सुकता वश पूछा तो पता चला वे दोनों लखनऊ से 300 किलोमीटर दूर अपने लगाए पेड़ों को पानी देने आते हैं।” – मंजरी

अगले दिन बच्चों को स्कूल छोड़ते वक़्त, मंजरी ने कार में एक बोतल पानी रख लिया। लौटते वक्त जब उन्होंने पौधों को पानी दिया तो उन्हें अजीब सा सुकून मिला। फिर ये रोज का सिलसिला हो गया।

 

मंजरी के मुताबिक रोज पानी पाकर पौधे तेजी से बढ़ने लगे और जैसे-जैसे उस पुल के पास वाली सड़क के किनारे हरियाली बढ़ रही थी उनके अंदर पेड़ों और पर्यावरण के प्रति लगाव बढ़ता जा रहा था।

“इस बार मैंने फिर उन युवकों से संपर्क किया और उन्हीं के साथ मिलकर कुछ और पौधे लगाए। तब मैंने सोचा जब ये युवक अपने लगाए पौधों को पानी देने इतनी दूर पैसे खर्च कर आ सकते हैं तो मैं तो यहीं रहती हूं। इसी दौरान मेरी मुलाकात पीपल बाबा से हुई। वह अपने जीवन के 43 साल पेड़ लगाने को दे चुके हैं और अब तक 1 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगा चुके हैं।” -मंजरी

पीपल बाबा बिना किसी स्वार्थ के धरती और पर्यावरण के लिए काम करने वाले लोगों में से हैं। इसलिए मंजरी भी पीपल बाबा की संस्था “गिव मी ट्रीज” में वालेंटियर की तरह जुड़ीं। पीपल बाबा की जीवन यात्रा और उनके उद्देश्य ने मंजरी को बहुत प्रभावित किया और उनके मन में पेड़ों के प्रति लगाव और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी को बढ़ावा दिया।

मंजरी अनिल उपाध्याय

मंजरी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहती हैं। वह एक जॉइंट फैमिली से आई हैं और ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक रखती हैं। “गिव मी ट्रीज” में सहयोग के साथ उन्होंने अपनी भी एक संस्था जिजीविषा सोयायटी बनाई है।

बीफार्मा की नौकरी छोड़ वह अब तक करीब 3800 पौधे लगा चुकी हैं जिनमे 3400 के आसपास जीवित व स्वस्थ हैं। करीब 300 पौधे 20 फीट से ऊँचे हो चुके हैं और 70 से अधिक पौधे फल देते हैं।

मंजरी बताती हैं, – “बीफार्मा करने के बाद मैंने 7 साल तक इंडस्ट्री में काम किया। बतौर एग्जीक्यूविट करियर की शुरुआत की और टीम लीडर तक बनी। लेकिन दूसरे बच्चे के जन्म के बाद करियर को न कह दिया। कुछ दिन घर पर बिताए फिर ये पेड़ लगाने का सिलसिला शुरू हो गया। मैं गाँव में पली-बड़ी हूँ इसलिए आसपास पेड़ अगर न हों तो शायद ही मैं उस जगह में रहा पांऊ।”

सामाजिक कार्यों से नाता रखने वाली मंजरी ने नौकरी छोड़ने के बाद कानून की पढ़ाई की। लेकिन वह कोर्ट-कचहरी से ज्यादा पेड़-पौधों को बचाने और हरियाली बढ़ाने की वकालत करती नजर आती हैं।

मंजरी का मानना है कि पेड़ लगाना बड़ी बात नहीं है, बड़ी बात है उसे सहेजना, उसे पालना और उसे वृक्ष बनते देखना। पेड़ों की देखरेख बिल्कुल वैसे ही करनी पड़ती है जैसे बच्चों की। शायद यहीं वजह है कि उनके लगाए 3800 में से 3400 पौधे हरे-भरे हैं।

मंजरी के मुताबिक उन्होंने अपने पैसों से बहुत से पेड़ लगाए। खुद की कमाई और मायके आदि से तीज त्योहार पर मिलने वाले पौधे भी लगाए। धीरे-धीरे उनके काम को विस्तार मिलने लगा। पेड़ों की संख्या बढ़ रही थी तो एक माली व 2-3 मजदूर भी जुड़ गए। जब ज़्यादा फंड्स की ज़रूरत पड़ने लगी तो मददगार साथियों के साथ मिलकर उन्होंने ‘जिजिविषा सोयायटी’ का गठन किया। अपने दोस्तो के बारे में बताते हुए मंजरी कहती हैं, “मित्रों के साथ संबंध में मैं सदा ही बहुत भाग्यशाली रही। पौधों व अन्य सामाजिक सरोकारों में परवीन अख्तर मैम का लगातार साथ बना रहा। ज़मीनी तौर पर जुड़ कर हर मुहिम में वह हमेशा साथ रहती हैं। दरअसल वह हमारे सभी काम के पीछे का बहुत सशक्त स्तम्भ हैं।”

मंजरी की देखा-देखी उनकी कॉलोनी में तमाम लोगों ने अपने घरों के आसपास पौधे लगाए। जिन स्कूल में मंजरी के बच्चे पढ़ते हैं उन्होंने वहां स्कूल के साथ मिलकर छोटे बच्चों को पेड़ लगाने और उन्हें बचाने के काम से जोड़ा है। मंजरी कहती हैं जब कहीं खाली, बेकार जमीन दिखती है तो मैं सोचती हूं यहां कैसे और कौन सा पेड़ लगाया जाए।

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शुरुआत में जिजीविषा ने निजी नर्सरी आदि से पौधे खरीदे लेकिन अब वह खुद की नर्सरी बनाने लगी हैं। घर के पास के पार्क के एक हिस्से को नर्सरी बना दिया गया है। संस्था के पास एक ठेलिया और दो माली हैं, जो शहर के सूखे बेजान डिवाइडर, सड़क किनारे, हाईवे के पास और पार्कों में हरियाली बढ़ा रहे हैं।

पेड़ लगाने की यात्रा के दौरान उन्होंने लॉ में एडमिशन लिया और फस्ट क्लास में पास किया। धीरे –धीरे दायरा बढ़ा तो कई साथी भी उनके साथ हो लिए। अब पेड़-पौधे लगाने के साथ-साथ उनका संगठन महिला मुद्दों जैसे महिलाओं को सेल्फ डिफेंस, गुड-टच बैड-चट और कार्यस्थल पर महिला उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर लोगों को जागरुक करता है।

जिजीविषा सोसायटी न सिर्फ पौधे लगाती है बल्कि कई स्कूलों में ट्रेनिंग प्रोग्राम भी करती है। वह फार्मा, लॉ आदि के ज्ञान का मिश्रण बना के ट्रेनिंग्स करती हैं। जो जीजिविषा के लिए आर्थिक सहयोग का काम करती है।

दो बच्चों और घर की पूरी ज़िम्मेदारी के बाद भी ट्रेनिंग्स और पौधारोपण के लिए वह समय कैसे मैनेज करती हैं, ये पूछने पर मंजरी बताती हैं,

“यदि हम कुछ सकारात्मक करना चाहे तो समय निकालना भी संभव हो जाता है, कुछ समय सोशल मीडिया व टेलीविज़न से दूर रहने से भी काम भर का समय निकल ही आता है।”

अब तक के सफर के बारे में मंजरी खुश होकर कहती हैं “कुल मिला के पौधों से जुड़ा सफर बहुत रोचक व संतुष्टि देने वाला रहा, आने वाली पीढ़ियों के लिए ये हमारा कर्तव्य है कि उन्हें शुद्ध हवा में सांस लेने लायक संसार देकर जाएं। बच्चों के साथ काम करना अब तक सबसे सुखद रहा है और भविष्य में भी हम बच्चों के साथ बहुत सारा काम करना चाहते हैं।
ईश्वर हमें और हरियाली फैलाने की जीजिविषा दें”।

पेड़ लगाने के लिए अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आपके आस पास भी बिखर सकती है हरियाली:

1. जब भी बाहर जाए तो साथ मे एक-दो बोतल पानी की ज़रूर रखें, रास्ते मे सूख रहे पौधों में पानी दें और उनमें ऊर्जा भरें।

2. पेड़-पौधे लगाने के लिए घर की आस -पास की ही जगह या वो रास्ते जहां से रोज़ का आना-जाना हो, उसे चुने।

3. शुरुआत में पेड़ लगाने के लिए खाली पड़े ट्री गार्ड्स, डिवाइडर या सड़क के किनारे पड़ी खाली जगह चुनें।

4. लागत काम करने के लिए घर की खाली पड़ी प्लास्टिक बैग में पौधे उगायें। ये छोटी सी नर्सरी की तरह बन जाएगी, बाद में पौधों को बड़ी जगह शिफ्ट कर दें।

5. बच्चों से मदद लें। बच्चों को मिट्टी में खेलना पसंद होता है और पौधे लगाने से उनकी आउटडोर एक्टिविटी भी होगी और पर्यावरण की तरफ अपनी जि़म्मेदारी भी वे समझ पाएंगे।

अगर आप भी मंजरी से संपर्क करना चाहते हैं तो फेसबुक , मेल और या जिजीविषा की आधिकारिक मेल पर भी जुड़ सकते हैं, साथ ही मोबाइल नंबर पर फोन भी कर सकते हैं – 099185 00172

संपादन – अर्चना गुप्ता

 


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Written by साधना शुक्ला

उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी से MBA करने के बाद, लगभग 3 साल दिल्ली की एक बड़ी रियल एस्टेट कंपनी में असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर रह चुकी साधना को लिखने पढ़ने का शौक शुरुआत से ही था। इसी दौरान उन्हें देश के चहेते स्टोरी टेलर नीलेश मिसरा की मंडली जॉइन करने का मौका मिला और लिखने का सिलसिला चल पड़ा। साधना ने अब तक, रेडियो के एक शो 'यूपी की कहानियां' और सावन एप पर 'द नीलेश मिसरा शो' के लिए 25 से ज़्यादा कहानियां लिखीं है।

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