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नोट बंदी के बाद अपनी दरियादिली से लोगो का दिल जीत रहे ये लोग!

पुराने पांच सौ और हज़ार के नोट बंद हो जाने से जहाँ आम जनता को कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है वहीँ आम भारतियों के बीच संयम और सोहार्द की कहानियां भी सामने आ रही है। देश में काले धन के खिलाफ इस जंग में अपना पूरा योगदान करते ऐसे ही तीन कहानियां आज हम आपके सामने ला रहे है।

रांची के इस अस्पताल में मिल रहा है मुफ्त इलाज

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जहाँ मिडिया में ऐसे अस्पतालों के बारे में बताया गया जो पुराने नोट होने की वजह से मरीजों का इलाज करने से इनकार कर रहे है, वहीँ रांची के विनायक अस्पताल के मुख्य, डॉ. चंदन कुमार ने इंसानियत की एक नयी मिसाल खड़ी कर दी है

डॉ. चंदन कुमार ने नोटबंदी होने के बाद 10 से 13 अक्टूबर तक अपने अस्पताल में ऐसे सभी मरीजों का इलाज निःशुल्क किया, जिनके पास सिर्फ 500 या हज़ार के ही नोट बच गए थे।

डॉ. चंदन कुमार ने कहा, ‘मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद अच्छा निर्णय लिया है। फिलहाल नोटों की कमी को देखते हुए 10 से 13 नवंबर तक यहां इलाज मुफ्त किया गया है, ताकि लोगों को परेशानी न हो।”

पेटीएम से पेमेंट का विकल्प दे रहा है ये चायवालाmsid-55399306width-400resizemode-4888

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आज जब लोग बैकों की कतारों में खड़े होकर सारी समस्याओं के लिए बैंक और व्यवस्था को कोसते नज़र आ रहे हैं तो ऐसे हालात में एक  चाय वाला अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। दिल्ली का यह चायवाला 7 रुपए की चाय के लिए भी लोगों की मजबूरी को देखते हुए पेटीएम से पेमेंट ले रहा है।

चायवाले मोनू ने बताया, “7 रुपए की चाय के लिए भी मैं ऑनलाइन पेमेंट लेकर सरकार के कदम का समर्थन कर रहा हूं साथ ही इससे लोगों को भी मदद मिल रही है।”

मुसाफिरों को मुफ्त में खाना खिलाता होटल मालिक

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अकोला के नॅशनल हायवे क्रमांक 6 पर बालापुर में स्थित मराठा हॉटेल के आगे आपको आजकल एक बोर्ड नज़र आएगा, जिसपर लिखा है,

‘गाँव के बाहर से आये मुसाफिरों, यदि आपके पास सिर्फ 500 या हज़ार का ही नोट है तो बिलकुल चिंता न करे। आप यहाँ खाना खाकर जाएँ और अगली बार आकर बिल का भुगतान करे।’

इस होटल के मालिक, मुरलीधर राउत ने 8 नवम्बर को नोटबंदी होने के बाद इस बात पे गौर किया कि इस बात से सबसे ज्यादा परेशानी उन मुसाफिरों को हो रही है जिनके पास हाईवे या अन्य छोटी जगहों पर खाना खाने तक के लिए खुल्ले पैसे नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपने होटल के आगे ये बोर्ड लगाकर काफी लोगों की परेशानी दूर कर दी।

हम सभी देश में बदलाव की आशा रखते है। पर उसमे योगदान देने की बारी आती है, तो थोडा डगमगा जाते है। पर इस तरह की कहानियां ये साबित करती है कि यदि सभी भारतीय एक-जुट हो जाएँ तो  हर मुसीबत का हंस कर सामना कर सकते है।

 

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Written by मानबी कटोच

मानबी बच्चर कटोच एक पूर्व अभियंता है तथा विप्रो और फ्रांकफिंन जैसी कंपनियो के साथ काम कर चुकी है. मानबी को बचपन से ही लिखने का शौक था और अब ये शौक ही उनका जीवन बन गया है. मानबी के निजी ब्लॉग्स पढ़ने के लिए उन्हे ट्विटर पर फॉलो करे @manabi5

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